मृत्युञ्जय सहस्रनाम स्तोत्रम् ॥ मृत्युञ्जयसहस्रनामस्तोत्रम् ॥ ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीभैरव उवाच ॥ अधुना शृणु देवेशि सहस्राख्यस्तवोत्तमम् । महामृत्युञ्जयस्यास्य सारात् सारोत्तमोत्तमम् ॥ विनियोगः- अस्य श्रीमहामृत्युञ्जसहस्रनामस्तोत्र मन्त्रस्य, भैरव ऋषिः, उष्णिक् छन्दः, श्रीमहामृत्युञ्जयो देवता, ॐ बीजं, जूं शक्तिः, सः कीलकं, मम सर्वविधरोगादिशमनपूर्वकं दीर्घायुः प्राप्तये सहस्रनाम पाठे विनियोगः । ऋष्यादिन्यास :- भैरवऋषये नमः (शिरसि ), उष्णिक् छन्दसे नमः । (मुखे),… Read More
महामृत्युञ्जय कवचम् ॥ महामृत्युञ्जयकवचम् ॥ विनियोगः:- ॐ अस्य श्रीमहामृत्युञ्जय कवचस्य श्रीभैरवऋषिः गायत्री छन्दः श्रीमृत्युञ्जय रुद्रो देवता ॐ बीजं जूं शक्तिः सः कीलकं हौमिति तत्त्वं श्री चतुर्वर्गफल साधनाय पाठे विनियोगः । ऋष्यादिन्यास: – श्रीभैरव ऋषये नमः (शिरसि ), गायत्रीछन्दसे नमः (मुखे ), श्रीमृत्युञ्जयरुद्र देवतायै नमः ( हृदये), ॐ बीजाय नमः ( गुह्ये ), जूं शक्तये नमः ( पादयोः… Read More
अमृतेश्वरी मन्त्र प्रयोगः ॥ अमृतेश्वरी मन्त्र प्रयोगः ॥ पुरुष देवता के साथ उसकी शक्ति देवता का पूजन करने से पूर्णाङ्ग होता है । स्त्री देवता के साथ पुरुष देवता का पूजन-अर्चन भी आवश्यक है । यदि पुरुष देवता के एक लक्ष जप किये जाये तो उसके दशांश जप (दस हजार) उसकी स्त्री देवता के करने आवश्यक है ।… Read More
सर्वरोगनाशक धर्मराज मन्त्र विधानम् ॥ सर्वरोगनाशक धर्मराज मन्त्र विधानम् ॥ (मन्त्रमहोदधि ग्रन्थ में इसका संक्षिप्त विधान है।) संकल्प – मम सकलापदां विनाशनाय सर्वरोगाणां प्रशमनार्थे श्रीधर्मराज मन्त्र जपमहं करिष्ये। करन्यास – हृदयादिन्यास की तरह करें । ॐ क्रों ह्रीं हृदयाय नमः । ॐ आं वैं शिरसे स्वाहा । ॐ वैवस्वताय श्खिायै वषट् । ॐ धर्मराजाय कवचाय हुँ । ॐ भक्तानुग्रहकृते… Read More
मृत्युञ्जय मन्त्र सुंपुटित व्यासमन्त्र ॥ व्यास मन्त्र ॥ मन्त्रमहोदधि में कहा गया है कि – मृत्युञ्जयेन पुटितं यो व्यासस्य मन्त्रं जपेत् । सर्वोपद्रव सन्त्यक्तो लभते वाञ्छितं फलम् ॥ प्रायः कई बार ऐसी परिस्थिति बनती है कि विभिन्न वैद्य, डॉक्टरों का इलाज लंबे समय तक चलने पर भी रोग का शमन नहीं होता है तो उस समय मृत्युञ्जय मन्त्र सुंपुटित… Read More
मृत्युञ्जय श्रीचक्रपूजा ॥ अथ महामृत्युञ्जय मन्त्र प्रयोगः ॥ (शुक्रोपासिता) विनियोगः- ॐ अस्य श्री महामृत्युञ्जय मन्त्रस्य महर्षि भृगु ऋर्षि, पंक्ति गायत्री, अनुष्टुप् छन्दः , सदाशिव महामृत्युञ्जय रुद्रो देवता, श्रीं बीजं, ह्रीं शक्तिं ममाभीष्ट सिद्धये जपे विनियोगः । षडङ्गन्यास – ॐ हौं ॐ जूं ॐ स: ॐ भूः ॐ भुवः ॐ स्वः ॐ त्र्यम्बकं नमो भगवते रुद्राय शूलपाणये स्वाहा… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [प्रथम-सृष्टिखण्ड] – अध्याय 20 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [प्रथम-सृष्टिखण्ड] – अध्याय 20 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः बीसवाँ अध्याय भगवान् शिव का कैलास पर्वत पर गमन तथा सृष्टिखण्ड का उपसंहार ब्रह्माजी बोले — हे नारद ! हे मुने ! कुबेर के तपोबल से भगवान् शिव का जिस प्रकार पर्वतश्रेष्ठ कैलास पर शुभागमन हुआ, वह प्रसंग सुनिये ॥ १… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [प्रथम-सृष्टिखण्ड] – अध्याय 19 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [प्रथम-सृष्टिखण्ड] – अध्याय 19 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः उन्नीसवाँ अध्याय कुबेर का काशीपुरी में आकर तप करना, तपस्या से प्रसन्न उमासहित भगवान् विश्वनाथ का प्रकट हो उसे दर्शन देना और अनेक वर प्रदान करना, कुबेर द्वारा शिवमैत्री प्राप्त करना ब्रह्माजी बोले — पहले के पाद्मकल्प की बात है, मुझ… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [प्रथम-सृष्टिखण्ड] – अध्याय 18 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [प्रथम-सृष्टिखण्ड] – अध्याय 18 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः अठारहवाँ अध्याय शिवमन्दिर में दीपदान के प्रभाव से पापमुक्त होकर गुणनिधि का दूसरे जन्म में कलिंगदेश का राजा बनना और फिर शिवभक्ति के कारण कुबेर पद की प्राप्ति ब्रह्माजी बोले — उन वृत्तान्तों को सुनकर वह दीक्षितपुत्र अपने भाग्य की निन्दा… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [प्रथम-सृष्टिखण्ड] – अध्याय 17 शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [प्रथम-सृष्टिखण्ड] – अध्याय 17 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः सत्रहवाँ अध्याय यज्ञदत्त के पुत्र गुणनिधि का चरित्र सूतजी बोले — हे मुनीश्वरो ! ब्रह्माजी की यह बात सुनकर नारदजी ने विनयपूर्वक उन्हें प्रणाम करके पुनः पूछा — ॥ १ ॥ नारदजी बोले — भक्तवत्सल भगवान् शंकर कैलासपर्वत पर कब गये… Read More