कटे-जले घाव की चिकित्सा
मन्त्रः- “राम लछुमन बोउ भाइ । काटा घाव फूँका जाइ ।। नाहीं घाव, नाहीं पूज । सिद्ध गुरू उस्तादे पाँव ।। काँवरू- काँवरू कामाक्षा-कामाक्षा आज्ञा हाड़ी जीते ।।”

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विधिः- उक्त मन्त्र से सात बार अभिमन्त्रित भस्म या धूल कटे-जले स्थान पर डालकर मन्त्र द्वारा फूँके । बहता हुआ रक्त बन्द हो जायेगा, दर्द दूर होगा और घाव नहीं पकेगा । शीघ्र ही भरकर ठीक हो जायेगा ।

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