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गुड़-मोहन मन्त्र
मन्त्रः- ”बन में उपजे बन की घास, जिसके रस में भारी मिठास ।।
पी-पी पथिक मिटाए प्यास । घास पुराए सबकी आश ।।
रस से गुड़, गुड़ से बन शक्कर । मोहे सुर-नृप-योगी-फक्कर ।।
दोहाई कामाक्षा देवी की, गुड़ में कर दे माया ।
जिस-जिसके मुख में पड़े, मोहे मन-काया ।।
मन्त्र फुरो, ईश्वरो वाचा शब्द न होवे काँचा ।
जा-जा रे गुड़ ! कर सत-गुरु का वचन साँचा ।
ॐ नमः कामाक्षाय अंकंचंटंतंपंयंशं ह्रीं क्रीं श्रीं फट् स्वाहा ।।”

durgaविधि :- रविवार या मङ्गलवार को एक छटाँक गुड़ खरीद लाए । उसी दिन अर्द्ध-रात्रि के समय, गाँव के बाहर, पीपल के नीचे, दक्षिण दिशा की ओर मुख कर आसन पर बैठे । पीपल के पत्ते पर गुड़ को रख दे । इसके बाद कुश लेकर उक्त मन्त्र पढ़ते हुए, कुश से गुड़ को स्पर्श करता जाए । १०८ बार मन्त्र पढ कर उस ‘गुड़’ को घर ले आए ।
ध्यान रहे, मन्त्र पढते समय श्री कामाक्षा का ध्यान करता रहे । मन्त्र सिद्ध हो जाएगा । फिर जब किसी को सम्मोहित करना हो, चमेली के तेल को ७ बार अभिमन्त्रित कर किसी युक्ति से इच्छित व्यक्ति के सिर मे डाल दे, तो वह व्यक्ति (स्त्री या पुरुष) साधक पर मोहित हो जाएगा । इस मन्त्र का प्रयोग स्त्री – पुरुष दोनो कर सकते है ।

One comment on “गुड़-मोहन मन्त्र

  • prnaam panditjee mujhe kamksha mantra ka kaluva bhoot mantra mere email par mail bajiye panditjee aap bhaut abaree rahunga

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