भैरव जी का शाबर मन्त्र
मन्त्रः- “भैरों उचके, भैरों कूदे । भैरों सोर (शोर) मचावै । मेरा कहना ना करे, तो कालिका को (का) पूत न कहावै । शब्द साँचा, फुरो मन्त्र, ईश्वरी वाचा ।”

विधि – होली की रात में, पोतनी ( सफेद) मिट्टी या लाल मिट्टी से चौका देकर अण्डी ( एरण्ड) की सूखी लकड़ी पर तेल का हवन करे । जब लौ प्रज्वलित हो, तब उसी प्रज्वलित लौ को चमेली के फूलों की माला पहना दे । सिन्दूर, मदिरा, मगौड़ी, इत्र, पान चढ़ा कर गूगल का हवन करे । १००१ बार उक्त मन्त्र जपे । मन्त्र सिद्ध हो जाएगा ।
आगे नवरावि, दीवाली एवं अन्य सिद्ध पर्वों में १ माला ‘जप’ करे । ‘जप’ के पूर्व पूजन, हवन करे । जब कोई कार्य सिद्ध करना हो, तो जहाँ ‘मेरा’ कहना लिखा है, वहाँ ‘मेरा अमुक कार्य’ कहे ।

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