भैरों सिद्धि का मन्त्र मन्त्रः- “काला भैरों कपली जटा । हत्थ वराड़ा, कुन्द बड़ा । काला भैरों हाजिर खड़ा । चाम की गुत्थी, लौंग की विभूत । लगे लगाए की करे भस्मा भूत । काली बिल्ली, लोहे की पाखर, गुराँ सिखाए अढ़ाई अखर । अढ़ाई अखर गए गुराँ के पास, गुराँ बुलाई काली । काली… Read More


भैरों सिद्धि का मन्त्र मन्त्रः- “भैरों ऐंडी, भैरों मैंडी, भैरों सबका दूत । देवी का दूत, देवता का दूत । गुरु का दूत, पीर का दूत । नाथों का दूत, पीरों का दूत । भैरों छड़िया कहाए जहाँ, सिमरूँ तहाँ आए । जहाँ भेजूँ, तहाँ जाए । चले मन्त्र, फुरे वाचा । देखूँ छड़िया भैरों,… Read More


अभिचार-नाशक मन्त्र मन्त्रः- “काली-काली, महा-काली । ब्रह्मा की बेटी, इन्द्र की साली । दोनों हाथ बजावे ताली । हङ्किनी – डङ्किनी को भस्म करे । अल्लाह-बिसमिल्लाह को भस्म करे । नौ नाथ, चौरासी सिद्धों को भस्म करे । नौ नारसिंह, सोलह सींडुओं को भस्म करे । बावन वीर, चौंसठ योगिनी को भस्म करे । अस्सी… Read More


अभिचार-नाशक मन्त्र मन्त्रः- “हनुमान वीर बैठे मसान, जो मन भावे सो प्रमाण । पञ्जे अङ्गी, पञ्जे मुट्‌ठी । छेवाँ गुग्गल, होया प्रकाश । मोहनी-दोहनी दोनों बहनाँ, हत्थ में तक्की तेल- कड़ावाँ । तेल हमारे मुख में चढ़े । सार का तड़ाग, रूपे का लँगोट । हनुमान वीर सुत्ते ताँ जाग हमारे पास । भूत-प्रेत को… Read More


अभिचार-नाशक मन्त्र मन्त्रः- “अग्नि का घोड़ा, बिजली की लगाम, जहाँ चढ़े हनुमान वीर, पठान लाल खान-जवान । क्या करता आया? भन्न के भसूड़ी, कढ़ के कलेजा, उस दुश्मन का खाया । जिसने ‘फलाने’ पर बार चलाया । सवा घड़ी में उसका स्यापा पाया । देखां हनुमान वीर, पठान लाल खान- जवान, तेरे इल्म चोट का… Read More


भगवान् वराह स्रुक्-तुण्ड सामस्वरधीरनाद, प्राग्वंशकायाखिलसत्रसन्धे । पूर्तेष्टधर्मश्रवणोऽसि देव सनातनात्मन् भगवन् प्रसीद ।। (विष्णुपुराण १ । ४ । ३४) ‘प्रभो ! स्रुक् आपका तुण्ड (थूथनी) है, सामस्वर धीर-गम्भीर शब्द है, प्राग्वंश (यजमानगृह) शरीर है तथा सम्पूर्ण सत्र (सोमयाग) शरीर की संधियाँ हैं । देव ! इष्ट (यज्ञ-यागादि) और पूर्त (कुआँ, बावली, तालाब आदि खुदवाना, बगीचा लगाना… Read More


लक्ष्मी-प्राप्ति प्रयोग मन्त्रः- “ॐ नमो आदेश गुरु को । नमो सिद्ध गणपति-प्रसादात् विघ्न-हर्तु’ गणपत गणापत वसो मसाण । जो फल चीहुं, सो फल आण । पञ्च लाडूं, सिर सिन्दूर । रिद्धि-सिद्धि आण । गौरी का पुत्र सिंहासन बैठा । राजा कँपे, प्रजा कँपे । द्रष्टे राजा सिम चाँपे । पञ्च-कोष पूर्व-पश्चिम से आण । उत्तर… Read More


भुतादि-दोष-निवारण प्रयोग मन्त्रः- “नमो आदेश गुरु को । सात भवानी कालिका । बार वर्ष कुमार । एक मार्ग परमेश्वरी, चौदह भुवन द्वार । दो पाँख निर्मली, तेरह देवी-देवा । अष्ट-भुजा परमेश्वरी, ग्यारह रुद्र-सेवा, सोल कला सम्पूर्णा । तीन नयन भरपूर । दश-नाम, दश अवतार, पाँच देव रक्षा करें । नव-नाथा चौरासी सिद्ध, षट्-दर्शन पाइए, पन्द्रह… Read More


शत्रु-संहारक शाबर मन्त्र 02 मन्त्रः- “तुमसे अरज करूँ, ऐ हो मात कालिका ! मोहि जो सतावे, सुख पावे न आठों याम । वाको तुम भक्ष लेओ, मेरी मात कालिका ! तुमसे अरज करूँ … ।। हाड़ तो हविष लेओ, खाल को खविष लेओ, गले पहिनो मात, आँतन की जालिका । तुमसे अरज करूँ … ।।… Read More


शत्रु-संहारक शाबर मन्त्र 01 मन्त्रः- “ॐ नमो, आदेश गुरू को ? काला भैंरु-कपिल जटा । भेरू खेले चौराह-चौहट्टा । मद्य-मांस को भोजन करे । जाग जाग से काला भेरू ! मात कालिका के पूत ! साथे जोगी जङ्गम और अवधूत । मेरा वैरी ………. (अमुक) तेरा भक । काट कलेजा, हिया चक्ख । भेजी का… Read More