क्लेश निवारक शाबर मन्त्र मन्त्रः- “ॐ ग्लौम् गौरी-पुत्र, वक्रतुण्ड, गण-पति, गुरु, गणेश ! ग्लौम् गण-पतिं, ऋद्धि-पति, सिद्धि-पति ! मेरे कर दूर क्लेश ।।”… Read More


दरिया देव की कृपा मन्त्रः- “पहिले नाम भगवान् का । दूजे नाम औतार का । तिजे नाम सत्-गुरु, जिनका नाम स्वामी जी । उनकी कृपा और उनकी दया । इस ख्वाजा-खिदर पूजने के लिए परसाद लेकर आया । लोना चमारी दिरन्त की दुहाई । वैष्णो शाकुम्बरा और औतार पीर और पैगम्बर — इन सबकी दया… Read More


अभीष्ट देवता का आकर्षण मुजपफरनगर जिले के पश्चिमी भाग में ‘झिझाना’ नाम का कस्बा है । उस कस्बे के अन्तर्गत यमुना किनारे ‘बिडौली,-ग्राम बसा हुआ है । यहीं पर एक अत्यन्त प्राचीन चमत्कारिक मजार है, जो जङ्गल में बनी हुई है । प्रत्येक वर्ष के ज्येष्ठ मास के आरम्भ मे यहाँ बड़ा मेला लगता है… Read More


सर्वार्थ-सिद्धि-दायक शाबर-मन्त्र सर्वार्थ-सिद्धि का सरल-सफल साधन है-‘शाबर-मन्त्र-साधना । जहाँ शास्त्रोक्त मन्त्रोपासना में अनेक नियमों का पालन करना प्रत्येक साधक के लिए असम्भव है, वही ‘शाबर-मन्त्रोपासना’ (साधना) सरलता व सुलभता-पूर्ण नियमों के पालन करने से सफल हो जाती है । स्पष्ट है कि शाबर मन्त्रों में असीम शक्तियाँ समाहित रहती हैं, किन्तु ये मन्त्र शास्त्रीय नही… Read More


धूमावती-प्रयोग यह प्रयोग अत्यन्त भय – कारक है । विचार पूर्वक इस मन्त्र का प्रयोग करना चाहिए । अभी तक यह मन्त्र गोपनीय रहा । मन्त्रः-… Read More


वशीकरण यन्त्र विधिः- निम्न ‘यन्त्र’ को शुक्रवार के दिन शुक्र की होरा में, लाल चन्दन द्वारा अनार की लेखनी से १०८ की संख्या में लिखे । तत्पश्चात् गन्ध-अक्षतादि द्वारा पूजा कर इन्हें नदी में बहा दें ।… Read More


एक चमत्कारी प्रयोग यह प्रयोग सिद्ध साधक द्वारा बताया हुआ है । प्रयोग तो चमत्कारी है ही, मन्त्र का स्वरूप भी विचित्र है । मन्त्र व उसके प्रयोग की विधि इस प्रकार है- –… Read More


शत्रु-नाश के लिए विधिः- उक्त मन्त्र को ग्यारह हजार की सख्यां में जप कर सिद्ध कर लें । जब प्रयोग करना हो, तो रात्रि में श्मशान जाकर राई व सरसों के तेल से चिता में १०८ आहुतियाँ दे । यह प्रयोग तीन रात्रि करें ।… Read More


विद्वेषण का सफल-तम मन्त्र यह प्रयोग दो घनिष्ठ प्रेमियों के मध्य शत्रुता उत्पन्न कराता है । शान्तिक-पौष्टिक कर्मो को छोडकर शेष सभी कर्म, तन्त्र में, ‘अभि-चार’-कर्मो की श्रेणी में आते हैं । ‘विद्वेषण’ भी अभिचार-कर्म होने के कारण निन्दनीय माना गया है क्योकि ये कर्म लोक-हित में नहीं, अपितु स्वार्थ-सिद्धि में उपयोग किए जाते हैं,… Read More