शारदीय नव-रात्र में कलश-स्थापन शारदीय नव-रात्र में कलश-स्थापन चारों नव-रात्रों में “शारदीय-नव-रात्र’ का विशेष महत्त्व है। कहा भी है- शरत्-काले महा-पूजा, क्रियते या च वार्षिकी । तस्याह सकलां बाधां, नाशयिष्याम्यसंशयम् ।। ऐसी दशा में ‘शारदीय नव-रात्र’ के पूजा-विधान पर विशेष रुप से ध्यान देना आवश्यक है। भगवान् आशुतोष कथित अनेक तन्त्र-शास्त्र एवं स्मार्त-शास्त्र इस पूजा के उत्तमोत्तम विधि-विधान से… Read More
आपदुद्धारक-बटुक-भैरव-स्तोत्र घटित चन्डी-विधानम् ‘आपदुद्धारक-बटुक-भैरव-स्तोत्र’ घटित चन्डी-विधानम् सम्पूर्ण कामनाओं की यथा-शीघ्र सिद्धि के लिए मैथिलों द्वारा कही हुई चण्डी-पाठ-घटित ‘आपदुद्धारक-बटुक-भैरव-स्तोत्र’ के पाठ की विधि आचमन, प्राणायाम, संकल्प (देश-काल-निर्देश) के उपरान्त – ‘अमुक-प्रवरान्वित अमुक-गोत्रोत्पन्नामुक-शर्मणः अमुक-वेदान्तर्गत अमुक-शाखाध्यायी मम (यजमानस्य) शीघ्रं अमुक-दुस्तर-संकट-निवृत्त्यर्थं सप्तशती-माला-मन्त्रस्य क्रमेण प्रथमादि-त्रयोदशाध्यायान्ते क्रियमाण आपदुद्धारक-बटुक-भैरवाष्टोत्तर-शत-नाम-मात्रावर्तन-घटित-अमुक-संख्यकावर्तनमहं करिष्ये।’ उक्त प्रकार ‘संकल्प’ में योजना करे। इसके बाद पहले विघ्नों के निवारण के लिए… Read More
रुद्र-यामलोक्त श्रीदुर्गा-पञ्जर-स्तवम् रुद्र-यामलोक्त श्रीदुर्गा-पञ्जर-स्तवम् विनियोगः- अस्य श्रीदुर्गा-पञ्जर-स्तोत्रस्य श्रीमहा-मार्तण्ड-भैरवः ऋषिः, त्रिष्टुप् छन्दः, श्रीपराऽम्बिका दुर्गा देवता, दुं बीजं, स्वाहा शक्तिः, क्लीं कीलकं, सर्वार्थ-साधने पाठे विनियोगः। ध्यान्- हेम-प्रख्यामिन्दु-खण्डात्त-मौलिं, शंखाभीष्टाभीति-हस्तां त्रिनेत्राम्। हेमाब्जस्थां पीत-वस्त्रां प्रसन्नां, देवीं दुर्गां दिव्य-रुपां नमामि ।।… Read More
दृष्टि द्वारा वशीकरण करने का शाबर मन्त्र दृष्टि द्वारा वशीकरण करने का शाबर मन्त्र मन्त्रः- “ॐ नमो भगवती पुर-पुर देशनि पुराधिपतये सर्व जगद-भयंकरिच्छीमै ॐ रांग र रीं क्ला वालो सल्पञ्च काम-बाण सर्वश्री समस्त नर-नारी-गणं मम वशमानय मानय स्वाहा ।”… Read More
नवदुर्गोपनिषत् नवदुर्गोपनिषत् उक्तं चाथर्वणरहस्ये । विनियोगः- ॐ अस्य श्रीनवदुर्गामहामन्त्रस्य किरातरुपधर ईश्वर ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, अन्तर्यामी नारायणः किरातरुप धरेश्वरो नवदुर्गागायत्री देवता, ॐ बीजं, स्वाहा शक्तिः, क्लीं कीलकं, मम धर्मार्थकाममोक्षार्थे जपे विनियोगः ।… Read More
श्री दुर्गा पूजन और श्रीदुर्गा-सप्तशती पाठ का सही क्रम श्री दुर्गा पूजन और श्रीदुर्गा-सप्तशती पाठ का सही क्रम नवरात्र में माता दुर्गा की प्रसन्नता के लिए श्रीदुर्गा-सप्तशती का पाठ करने का भी विधान है। कतिपय ध्यातव्य नियम इस प्रकार हैं – १॰ प्रथम दिन घट-स्थापना की जाती है और उसके बाद ही देवी के स्वरुप एवं अन्य देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना की जाती है। देवी… Read More
श्रीदुर्गा-सप्तशती-पाठ के विविध क्रम श्रीदुर्गा-सप्तशती-पाठ के विविध क्रम – ‘श्रीदुर्गा-सप्तशती’ के स्वाध्याय अर्थात् पाठ की कई विधियाँ है। ‘मरीच-कल्प’ में लिखा है कि ‘सप्तशती’ का पाठ करने के पहले ‘रात्रि-सूक्त’ का पाठ करना चाहिए और जब उसका पाठ कर चुके, तब अन्त में ‘देवी-सूक्त’ का पाठ करे। – दूसरा मत यह है कि ‘सप्तशती’ का पाठ उसके अंगों के… Read More
सर्वोपयोगी अनुभूत साधना सर्वोपयोगी अनुभूत साधना इस ‘साधना-क्रम’ में तीन उपासनाएँ है- (१) श्री गायत्री उपासना, (२) श्री दुर्गोपासना एवं (३) श्री बटुक-भैरवोपासना। प्रतिदिन प्रातःकाल और रात्रि-भोजन के पूर्व, निजी आसन पर बैठकर नियमित रुप से निश्वित समय पर इस साधना कप करने से जीवन की सभी बाधाएँ दूर होती हैं एवं सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।… Read More
अमोघ लघु प्रयोग अमोघ लघु प्रयोग नवार्ण-मन्त्रः- “ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।।” ‘ऐं’ – बीजमादीन्दु – समान – दीप्तिम् । ‘ह्रीं’ सूर्य – तेजो – द्युतिं द्वितीयम् ।। ‘क्लीं’ – मूर्तिः वैश्वानर – तुल्य – रुपम् । तृतीयमानन्द – सुखाय चिन्त्यम् ।।१ ‘चां’ शुद्ध – जाम्बु – वत् – कान्ति – तुर्यम् । ‘मुं’ पञ्चमं रक्त – तरं… Read More
सप्त-दिवसीय श्रीदुर्गा-सप्तशती-पाठ का परिचय एवं विधि सप्त-दिवसीय श्रीदुर्गा-सप्तशती-पाठ का परिचय एवं विधि १॰ सप्त-दिवसीय श्रीदुर्गा-सप्तशती-पाठ के अन्तर्गत श्रीदुर्गा-सप्तशती के १३ अध्यायों का पाठ सात दिनों में किया जाता है। २॰ “पा – ठोऽ – यं – व – र – का – रः” – सूत्र के अनुसार पहले दिन एक अध्याय (प), दूसरे दिन दो अध्याय (ठ), तीसरे दिन एक अध्याय… Read More