प्रकृतेर्ब्रह्माण्ड-मोहन-कवचम् प्रकृतेर्ब्रह्माण्ड-मोहन-कवचम् ।। नारद उवाच ।। भगवन् सर्वधर्मज्ञ सर्वज्ञानविशारद । ब्रह्माण्डमोहनं नाम प्रकृतेः कवचं वद ।।१ ।। नारायण उवाच ।। श्रृणु वक्ष्यामि हे वत्स कवचं च सुदुर्लभम् । श्रीकृष्णेनैव कथितं कृपया ब्रह्मणे पुरा ।।२… Read More
श्रीमद्-देवी-भगवत की ज्ञान-दायिनी सिद्ध देवी-स्तुति श्रीमद्-देवी-भगवत की ज्ञान-दायिनी सिद्ध देवी-स्तुति नमो देव्यै प्रकृत्यै च, विधात्र्यै सततं नमः । कल्याण्यै कामदायै च, वृद्ध्यै सिद्ध्यै नमो नमः ।।१ सच्चिदानन्द-रुपिण्यै, संसारारणये नमः । पञ्च-कृत्य-विधात्र्यै ते, भुवनेश्यै नमो नमः ।।२ सर्वाधिष्ठान-रुपायै, कूटस्थायै नमो नमः । अर्ध-मात्रार्थ-भूतायै, हृल्लेखायै नमो नमः ।।३… Read More
श्रीदुर्गे स्मृतेति – मन्त्र की साधना ‘श्रीदुर्गे स्मृतेति’ – मन्त्र की साधना सभी प्रकार के कष्ट-निवारण, आर्थिक-संकट-निवारण हेतुः शुद्ध होकर आसन पर बैठे। आसन-शोधन, आत्म-शोधन की प्रारम्भिक क्रियाएँ कर हाथ में जल लेकर विनियोग पढ़े – विनियोगः- ॐ अस्य श्रीदुर्गे स्मृतेति मन्त्रस्य विष्णुः ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, श्रीमहा-लक्ष्मी देवता, शाकम्भरी शक्तिः, वायु कीलकं, सकल-संकेत-कष्ट-दारिद्र्य-परिहारार्थं जपे विनियोगः।… Read More
सिद्धि-चण्डी महा-विद्या सहस्राक्षर मन्त्र सिद्धि-चण्डी महा-विद्या सहस्राक्षर मन्त्र वन्दे परागम-विद्यां, सिद्धि-चण्डीं सङ्गिताम् । महा-सप्तशती-मन्त्र-स्वरुपां सर्व-सिद्धिदाम् ।। विनियोगः- ॐ अस्य सर्व-विज्ञान-महा-राज्ञी-सप्तशती रहस्याति-रहस्य-मयी-परा-शक्ति श्रीमदाद्या-भगवती-सिद्धि-चण्डिका-सहस्राक्षरी-महा-विद्या-मन्त्रस्य श्रीमार्कण्डेय-सुमेधा ऋषि, गायत्र्यादि नाना-विधानि छन्दांसि, नव-कोटि-शक्ति-युक्ता-श्रीमदाद्या-भगवती-सिद्धि-चण्डी देवता, श्रीमदाद्या-भगवती-सिद्धि-चण्डी-प्रसादादखिलेष्टार्थे जपे विनियोगः ।… Read More
भगवती षोडशी भगवती षोडशी ‘दस महा-विद्याओ’ में तीसरी महा-विद्या भगवती षोडशी है, अतः इन्हें तृतीया भी कहते हैं । यहाँ यह उल्लेखनीय है कि वास्तव में आदि-शक्ति एक ही हैं, उन्हीं का आदि रुप ‘काली’ है और उसी रुप का विकसित स्वरुप ‘षोडशी’ है, इसी से ‘षोडशी’ को ‘रक्त-काली’ नाम से भी स्मरण किया जाता है ।… Read More
अष्टा-विंशत्यक्षर वीरवर-गणपति अष्टा-विंशत्यक्षर वीरवर-गणपति मन्त्रः- “ह्रीं क्लीं वीर-वर-गणपतये वः वः इदं विश्वं मम वशमानय ॐ ह्रीं फट् ।”… Read More
सप्त-श्लोकी चण्डी-पाठ हिन्दी सप्त-श्लोकी चण्डी-पाठ ।। श्री शिव बोले ।। ।। पूर्व पीठिका ।। तुम हो देवी ! भक्ति-सुलभ, सब कार्य कलापों की स्वामिनि हो । बोलो, कलि में कार्य-सिद्धि-हित, जन को क्या उपाय करना है ? ।। श्रीदेवी बोलीं ।। कलियुग का उत्तम-तम साधन, श्रवण करें हे देव ! ध्यान धर । बतलाती मैं स्नेह-सहित, केवल… Read More
सिद्ध शूलिनी दुर्गा-स्तुति सिद्ध शूलिनी दुर्गा-स्तुति दुःख दुशासन पत चीर हाथ ले, मो सँग करत अँधेर । कपटी कुटिल मैं दास तिहारो, तुझे सुनाऊँ टेर ।। मैय्या॰ ।।१ बुद्धि चकित थकित भए गाता, तुम ही भवानी मम दुःख-त्राता । चरण शरण तव छाँड़ि कित जाऊँ, सब जीवन दुःख निवेड़ ।।मैय्या॰ ।।२ भक्ति-हीन शक्ति के नैना, तुझ बिन तड़पत… Read More
मूल सप्तशती ।। मूल सप्तशती ।। ।। ॐ श्रीदेव्युवाच ।। गर्ज गर्ज क्षणं मूढ ! मधु यावत् पिबाम्यहम् । मया त्वयि हतेऽत्रैव, गर्जिष्यन्त्याशु देवताः ।।१ व्रियतां त्रिदशाः सर्वे, यदस्मत्तोऽभिवाञ्छितम् ।।२ ।।ॐ ऋषिरुवाच ।।… Read More
राहुकाल दुर्गापूजा विधानम् राहुकाल दुर्गापूजा विधानम् राहुकाल की दक्षिण भारत में विशेष मान्यता है । राहुकाल में आसुरी शक्तियों का उदय होता है अतः अन्य शुभ कार्य नहीं किये जाते हैं । आसुरी शक्तिरयों के दमन हेतु व्यक्ति को जप पाठ एवं स्वाध्याय करना श्रेयस्कर होता है । राहुकाल में दुर्गा उपासना श्रेष्ठ फलदायिनी हैं । राहु का… Read More