कर्णपिशाचिनी साधना कर्णपिशाचिनी साधना प्रयोग 1 यह प्रयोग निरंतर ग्यारह दिन तक किया जाता है। सर्वप्रथम काँसे की थाली में सिंदूर का त्रिशूल बनाएँ। इस त्रिशूल का दिए गए मंत्र द्वारा विधिवत पूजन करें। यह पूजा रात और दिन उचित चौघड़िया में की जाती है।… Read More
विद्या-प्राप्ति-प्रयोग विद्या-प्राप्ति-प्रयोग परीक्षा, नौकरी में तो इस मन्त्र के जप के द्वारा सफलता प्राप्त होती ही है, साथ ही नेतृत्व के गुण भी उत्पन्न होते हैं और समाज में प्रतिष्ठा एवं यश की प्राप्ति होती है।… Read More
गणेश शाबर मन्त्र श्रीगणेश मन्त्र “ॐ नमो सिद्ध-विनायकाय सर्व-कार्य-कर्त्रे सर्व-विघ्न-प्रशमनाय सर्व-राज्य-वश्य-करणाय सर्व-जन-सर्व-स्त्री-पुरुष-आकर्षणाय श्रीं ॐ स्वाहा।” विधि- नित्य-कर्म से निवृत्त होकर उक्त मन्त्र का निश्चित संख्या में नित्य १ से १० माला ‘जप’ करे। बाद में जब घर से निकले, तब अपने अभीष्ट कार्य का चिन्तन करे। इससे अभीष्ट कार्व सुगमता से पूरे हो जाते हैं।… Read More
सिद्ध मोहन मन्त्र १॰ सिद्ध मोहन मन्त्र क॰ “ॐ अं आं इं ईं उं ऊं हूँ फट्।” विधिः- ताम्बूल को उक्त मन्त्र से अभिमन्त्रित कर साध्या को खिलाने से उसे खिलानेवाले के ऊपर मोह उत्पन्न होता है।… Read More
सिद्ध वशीकरण मन्त्र रुठी हुई स्त्री का वशीकरण- “मोहिनी माता, भूत पिता, भूत सिर वेताल। उड़ ऐं काली ‘नागिन’ को जा लाग। ऐसी जा के लाग कि ‘नागिन’ को लग जावै हमारी मुहब्बत की आग। न खड़े सुख, न लेटे सुख, न सोते सुख। सिन्दूर चढ़ाऊँ मंगलवार, कभी न छोड़े हमारा ख्याल। जब तक न देखे हमारा मुख,… Read More
उलटने का मन्त्र उलटने का मन्त्र “ॐ उलटत नरसिंह, पलटत काया। ऐही ले नरसिंह तोहे बुलाया। जो मोर नाम करत, सो मरत-परत। भैरो चक्कर में, उलटी वेद उसी को लागे। कार दुहाई, बड़े वीर नरसिहं की दुहाई। कामरु कामाख्या देवी की दुहाई। अष्ट-भुजी देवी कालिका की दुहाई। शिव सत्-गुरु के वन्दे पायो।”… Read More
आशु-फल-प्रद सिद्ध शाबर महा-लक्ष्मी मन्त्र आशु-फल-प्रद सिद्ध शाबर महा-लक्ष्मी मन्त्र विनियोगः- ॐ अस्य श्रीधन-प्रद-महा-लक्ष्मी-सिद्ध-शाबर-मन्त्रस्य श्रीविष्णु ऋषिः। अनुष्टुप छन्दः। श्रीमहा-लक्ष्मी देवता। श्रीं बीजं। ह्रीं शक्तिः। क्लीं कीलकं। मम सकल-कामना-सिद्धयर्थे जपे विनियोगः।… Read More
आप लोगों का मंगल करें आप लोगों का मंगल करें श्रीमत्पङ्कजविष्टरो हरिहरो वायुर्महेन्द्रोऽनलश्चन्द्रो, भास्करवित्तपालवरुणाः प्रेताधिपाद्या ग्रहाः । प्रद्युम्नो नल-कूबरौ सुरगजश्चिन्तामणिः कौस्तुभः, स्वामी शक्तिधरश्च लाङ्लधरः कुर्वन्तु वो मङ्गलम् ।। सर्वैश्वर्य ब्रह्मा, विष्णु एवं शिव, वायुदेव, देवराज इन्द्र तथा अग्नि देवता, चन्द्र-देवता, भगवान् सूर्य, धनाध्यक्ष कुबेर, वरुण और संयमनी-पुरी के स्वामी यमराज, सभी ग्रह, श्रीकृष्ण के पुत्र प्रद्युम्न, नल और कूबर, ऐरावत… Read More
काल विकाल बाण प्रयोग बंगाल के सिद्ध मंत्र प्रयोग काल विकाल बाण प्रयोग इस प्रयोग को करते समय देवी घट स्थापन करें, उसमें देवी का आवाहन करें । कार्तिकेय, गणेश, शिव का पूजन भी करें । दिग्-रक्षण प्रयोग स्वयं का एवं अपने स्थान का करें, यदि अन्यत्र जाके प्रयोग कर रहे हैं तो साधक पहले अपने स्थान, परिवार व… Read More
जपमाला के संस्कार जपमाला के संस्कार कबीर जी ने कहा है – माला फेरत जुग भया, मिटा ना मन का फेर । कर का मन का छाड़ि के, मन का मनका फेर ।। माला के सम्बन्ध में शास्त्रों में बहुत विचार किया गया है । यहाँ संक्षेप में उसका कुछ थोड़ा-सा अनुमान मात्र दिया जाता है – माला… Read More