चतुष्षष्टि-योगिनी नाम-स्तोत्रम् चतुष्षष्टि-योगिनी नाम-स्तोत्रम् गजास्या सिंह-वक्त्रा च, गृध्रास्या काक-तुण्डिका । उष्ट्रा-स्याऽश्व-खर-ग्रीवा, वाराहास्या शिवानना ।। उलूकाक्षी घोर-रवा, मायूरी शरभानना । कोटराक्षी चाष्ट-वक्त्रा, कुब्जा च विकटानना ।। शुष्कोदरी ललज्जिह्वा, श्व-दंष्ट्रा वानरानना । ऋक्षाक्षी केकराक्षी च, बृहत्-तुण्डा सुराप्रिया ।। कपालहस्ता रक्ताक्षी च, शुकी श्येनी कपोतिका । पाशहस्ता दंडहस्ता, प्रचण्डा चण्डविक्रमा ।। शिशुघ्नी पाशहन्त्री च, काली रुधिर-पायिनी । वसापाना गर्भरक्षा, शवहस्ताऽऽन्त्रमालिका… Read More
मातृका न्यास मातृका न्यास इस न्यास के नाम से ही स्पष्ट है कि इसमें मातृकाओं अर्थात् वर्णों (अक्षरों) की स्थापना शरीर के अंगों में विधि-पूर्वक की जाती है । ‘अ’ से लेकर ‘क्ष’ तक की वर्ण-माला का ही सांकेतिक नाम ‘मातृका’ है । वर्ण या अक्षर ‘शब्द-ब्रह्म’ या ‘वाग्-शक्ति’ के स्वरुप हैं । इनका सूक्ष्म रुप ‘विमर्श-शक्ति’… Read More
धनाधीश कुबेर धनाधीश कुबेर महिर्ष पुलस्त्य के पुत्र महामुनि विश्रवा ने इलविडा (या देववर्णिणी) का पाणिग्रहण किया। उसी से कुबेर जी की उत्पत्ति हुई। भगवान् ब्रह्मा ने इन्हें समस्त सम्पत्ति का स्वामी बनाया। ये तप करके उत्तर दिशा के लोक पाल हुए। कैलास के समीप इनकी अलकापुरी है। श्वेतवर्ण, तुन्दिल शरीर, अष्ट-दन्त एवं तीन चरणों वाले, गदाधारी… Read More
हनुमान् ज्योतिष हनुमान् ज्योतिष विधिः- जिज्ञासु को स्नानादि से शुद्ध होकर “ॐ रां रामाय नमः” मन्त्र का ११ बार जप कर “ॐ हनुमते नमः” का जप करना चाहिए । उसके बाद सम्पूर्ण राम दरबार का स्मरण करते हुए प्रश्नावली चक्र पर तर्जनी अंगुली घुमाते एवं मन-ही-मन अपने प्रश्न को दोहराते हुए किसी एक कोष्ठक पर अंगुली रोक… Read More
दरोगा बड़ा एक ताऊ 10 साल बाद एक मुकदमा जीत गए… जज-बधाई हो बावा आप केस जीत गए। ताऊ-शाबाश, भगवान तेरी इतनी तरक्की करे कि तू दरोगा बन जाए जज-रे ताऊ, मैं तो जज हूं, जज तो दरोगा से बड़ा होवे है… ताऊ- ना मेरी नजर में तो दरोगा बड़ा है जज-कैसे ? ताऊ-तूने केस खत्म करने में 10 साल लगा दिए,… Read More
प्रोसीजर बैंक में एक ग्राहक ने सुन्दर बैंक कर्मी से बड़ी ही शालीनता से पूछा ? ग्राहक :– मैडम जी,क्या मैं यह जान सकता हूं कि जो चेक मैंने अभी दिया है वो कितने दिन में क्लियर होगा! मैडम :– कम से कम 2 दिन लगेंगे ! ग्राहक :– लेकिन मैडम, इतना टाइम क्यों लगेगा? जिस… Read More
घण्टाकर्ण कल्प ।। अथ घण्टाकर्ण कल्प ।। प्रस्तुत प्रयोग जैन साधक की संवत १६६१ की पाण्डुलिपि में से उद्धृत् है । प्रयोग शुभ मास, शुक्ल पक्ष तथा ५-१०-१५ तिथि सोम, बुध व गुरुवार में करें । रवि-पुष्य, हस्त व मूल नक्षत्र में हो या अन्य कोई “अमृत-सिद्धि-योग” बने तब प्रयोग करें । प्रयोग देवस्थान, नदी, तालाब के… Read More
दश महाविद्या जयन्ती दश महाविद्या जयन्ती १॰ श्री भुवनेश्वरी जयन्तीः- भाद्रपद शुक्ला द्वादशी, रविवार । २॰ श्री काली जयन्तीः- भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को अर्द्ध-रात्रि । ३॰ श्री ललिता जयन्तीः- माघ पूर्णिमा को प्रदोष समय । ४॰ श्री तारा जयन्तीः- चैत्र शुक्ल नवमी, शनिवार को मध्य रात्रि । ५॰ श्री छिन्न-मस्ता जयन्तीः- वैशाख शुक्ल चतुर्दशी को अर्द्ध-रात्रि । ६॰… Read More
सप्तशती पाठ चतुःषष्ठि योगिनी सप्तशती पाठ चतुःषष्ठि योगिनी चतुःषष्ठि योगिनी के देशकाल आधार पर भिन्न-भिन्न नाम बतलाये जाते हैं । दैनिक कर्म में पूजित ६४ योगिनियाँ अलग हैं तथा प्रत्येक चरित की महाकाली, महालक्ष्मी तथा महासरस्वती की भिन्न-भिन्न ६४ योगिनियाँ अलग हैं । प्रत्येक चरित के साथ क्रमशः उनका पाठ किया जा सकता है । ९ दुर्गा की प्रत्येक… Read More
ब्रह्मणस्पती सूक्त ब्रह्मणस्पती सूक्त ऋग्वेद-संहिता – प्रथम मंडल सूक्त १८ [ऋषि-मेधातिथी काण्व। देवता- १-३ ब्रह्मणस्पति, ४ इन्द्र,ब्रह्मणस्पति,सोम ५-ब्रह्मणस्पति,दक्षिणा, ६-८ सदसस्पति,९,नराशंस। छन्द -गायत्री]… Read More