अग्निपुराण – अध्याय 069 अग्निपुराण – अध्याय 069 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ उनहत्तरवाँ अध्याय स्नपनोत्सव के विस्तार का वर्णन स्नानविधानं अग्निदेव कहते हैं — ब्रह्मन् ! अब मैं स्नपनोत्सव का विस्तारपूर्वक वर्णन करता हूँ। प्रासाद के सम्मुख मण्डप के नीचे मण्डल में कलशों का न्यास करे। प्रारम्भकाल में तथा सम्पूर्ण कर्मो को… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 068 अग्निपुराण – अध्याय 068 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ अड़सठवाँ अध्याय उत्सव – विधि का कथन यात्रोत्सवविधिकथनं श्रीभगवान् कहते हैं — अब मैं उत्सव की विधि का वर्णन करता हूँ। देवस्थापन होने के पश्चात् उसी वर्ष में एकरात्र, त्रिरात्र या अष्टरात्र उत्सव मनावे; क्योंकि उत्सव के बिना देवप्रतिष्ठा निष्फल… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 067 अग्निपुराण – अध्याय 067 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ सड़सठवाँ अध्याय जीर्णोद्धार–विधि जीर्णोद्धारविधानं श्रीभगवान् कहते हैं — ब्रह्मन् ! अब मैं जीर्णोद्धार की विधि बतलाता हूँ। आचार्य मूर्ति को विभूषित करके स्नान करावे। अत्यन्त जीर्ण, अङ्गहीन, भग्न तथा शिलामात्रावशिष्ट (विशेष चिह्न से रहित) प्रतिमा का परित्याग करे। उसके स्थान… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 066 अग्निपुराण – अध्याय 066 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ पैंसठवाँ अध्याय देवता सामान्य प्रतिष्ठा साधारणप्रतिष्ठाविधानं श्रीभगवान् कहते हैं — अब मैं देव समुदाय की प्रतिष्ठा का वर्णन करूँगा। यह भगवान् वासुदेव की प्रतिष्ठा की भाँति ही होती है। आदित्य, वसु, रुद्र, साध्य, विश्वेदेव, अश्विनीकुमार, ऋषि तथा अन्य देवगण-ये देवसमुदाय… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 065 अग्निपुराण – अध्याय 065 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ पैंसठवाँ अध्याय सभा-स्थापन और एकशालादि भवन के निर्माण आदि की विधि, गृहप्रवेश का क्रम तथा गोमाता से अभ्युदय के लिये प्रार्थना सभास्थापनकथनं श्रीभगवान् बोले — अब मैं सभा (देवमन्दिर) आदि की स्थापना का विषय बताऊँगा तथा इन सबकी प्रवृत्ति के… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 064 अग्निपुराण – अध्याय 064 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ चौंसठवाँ अध्याय कुआँ, बावड़ी और पोखरे आदि की प्रतिष्ठा की विधि कूपादिप्रतिष्ठाकथनं श्रीभगवान् कहते हैं — ब्रह्मन् ! अब मैं कूप, वापी और तड़ाग की प्रतिष्ठा की विधि का वर्णन करता हूँ, उसे सुनो। भगवान् श्रीहरि ही जलरूप से देवश्रेष्ठ… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 063 अग्निपुराण – अध्याय 063 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तिरसठवाँ अध्याय विष्णु आदि देवताओं की प्रतिष्ठा की सामान्य विधि तथा पुस्तक लेखन-विधि सुदर्शनचक्रादिप्रतिष्ठाकथनं श्रीभगवान् कहते हैं — इस प्रकार विनतानन्दन गरुड, सुदर्शनचक्र, ब्रह्मा और भगवान् नृसिंह की प्रतिष्ठा भी उनके अपने-अपने मन्त्र से श्रीविष्णु की ही भाँति करनी चाहिये;… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 062 अग्निपुराण – अध्याय 062 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ बासठवाँ अध्याय लक्ष्मी आदि देवियों की प्रतिष्ठा की सामान्य विधि लक्ष्मीप्रतिष्ठाविधिः श्रीभगवान् कहते हैं — अब मैं सामूहिक रूप से देवता आदि की प्रतिष्ठा का तुमसे वर्णन करता हूँ। पहले लक्ष्मी की, फिर अन्य देवियों के समुदाय की स्थापना का… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 061 अग्निपुराण – अध्याय 061 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ इकसठवाँ अध्याय अवभृथस्नान, द्वारप्रतिष्ठा और ध्वजारोपण आदि की विधि का वर्णन ध्वजारोहणं श्रीभगवान् हयग्रीव कहते हैं — ब्रह्मन् ! अब मैं अवभृथस्नान… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 060 अग्निपुराण – अध्याय 060 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ साठवाँ अध्याय वासुदेव आदि देवताओं के स्थापन की साधारण विधि वासुदेवप्रतिष्ठादिविधिः श्रीभगवान् हयग्रीव कहते हैं — ब्रह्मन् ! पिण्डिका की स्थापना के लिये विद्वान् पुरुष मन्दिर के गर्भगृह को सात भागों में विभक्त करे और ब्रह्मभाग में प्रतिमा को स्थापित… Read More