श्रीमद्भागवतमहापुराण – षष्ठ स्कन्ध – अध्याय २ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय दूसरा अध्याय विष्णुदूतों द्वारा भागवतधर्म-निरूपण और अजामिल का परमधामगमन श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! भगवान् के नीतिनिपुण एवं धर्म का मर्म जाननेवाले पार्षदों ने यमदूत का यह अभिभाषण सुनकर उनसे इस प्रकार कहा — ॥ १ ॥… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – षष्ठ स्कन्ध – अध्याय १ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पहला अध्याय अजामिलोपाख्यान का प्रारम्भ राजा परीक्षित् ने कहा — भगवन् ! आप पहले | (द्वितीय स्कन्ध में) निवृत्तिमार्ग का वर्णन कर चुके हैं तथा यह बतला चुके हैं कि उसके द्वारा अर्चिरादि मार्ग से जीव क्रमशः ब्रह्मलोक… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – पञ्चम स्कन्ध – अध्याय २६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय छबीसवाँ अध्याय नरकों की विभिन्न गतियों का वर्णन राजा परीक्षित् ने पूछा — महर्षे ! लोगों को जो ये ऊँची-नीची गतियाँ प्राप्त होती हैं, उनमें इतनी |विभिन्नता क्यों है? ॥ १ ॥ श्रीशुकदेवजी ने कहा — राजन् !… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – पञ्चम स्कन्ध – अध्याय २५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पचीसवाँ अध्याय श्रीसङ्कर्षणदेव का विवरण और स्तुति श्रीशुकदेवजी कहते है — राजन् ! पाताललोक के नीचे तीस हजार योजन की दूरी पर अनन्त नाम से विख्यात भगवान् की तामसी नित्य कला है । यह अहङ्काररूपा होने से द्रष्टा… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – पञ्चम स्कन्ध – अध्याय २४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय चौबीसवाँ अध्याय राहु आदि की स्थिति, अतलादि नीचे के लोकों का वर्णन श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! कुछ लोगों का कथन है कि सूर्य से दस हजार योजन नीचे राहू नक्षत्रों के समान घूमता है । इसने… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – पञ्चम स्कन्ध – अध्याय २३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तेईसवाँ अध्याय शिशुमारचक्र का वर्णन श्रीशुकदेवजी कहते हैं — राजन् ! सप्तर्षियों से तेरह लाख योजन ऊपर ध्रुवलोक है । इसे भगवान् विष्णु का परम पद कहते हैं । यहाँ उत्तानपाद के पुत्र परम भगवद्भक्त ध्रुवजी विराजमान हैं… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – पञ्चम स्कन्ध – अध्याय २२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय बाईसवाँ अध्याय भिन्न-भिन्न ग्रहों की स्थिति और गति का वर्णन राजा परीक्षित् ने पूछा — भगवन् ! आपने जो कहा कि यद्यपि भगवान् सूर्य राशियों की ओर जाते समय मेरु और ध्रुव को दायीं ओर रखकर चलते मालूम… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – पञ्चम स्कन्ध – अध्याय २१ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय इक्कीसवाँ अध्याय सूर्य के रथ और उसकी गति का वर्णन श्रीशुकदेवजी कहते हैं — राजन् ! परिमाण और लक्षणों के सहित इस भूमण्डल का कुल इतना ही विस्तार है, सो हमने तुम्हें बता दिया ॥ १ ॥ इसी… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – पञ्चम स्कन्ध – अध्याय २० ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय बीसवाँ अध्याय अन्य छः द्वीपों तथा लोकालोकपर्वत का वर्णन श्रीशुकदेवजी कहते हैं — राजन् ! अब परिमाण, लक्षण और स्थिति के अनुसार लक्षादि अन्य द्वीपों के वर्षविभाग का वर्णन किया जाता है ॥ १ ॥ जिस प्रकार मेरु… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – पञ्चम स्कन्ध – अध्याय १९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय उन्नीसवाँ अध्याय किम्पुरुष और भारतवर्ष का वर्णन श्रीशुकदेवजी कहते हैं — राजन् ! किम्पुरुषवर्ष में श्रीलक्ष्मणजी के बड़े भाई, आदिपुरुष, सीताहृदयाभिराम भगवान् श्रीराम के चरणों की सन्निधि के रसिक परम भागवत श्रीहनुमान् जी अन्य किन्नरों के सहित अविचल… Read More