श्रीमद्भागवतमहापुराण – षष्ठ स्कन्ध – अध्याय १२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय बारहवाँ अध्याय वृत्रासुर का वध श्रीशुकदेवजी कहते हैं — राजन् ! वृत्रासुर रणभूमि में अपना शरीर छोड़ना चाहता था, क्योंकि उसके विचार से इन्द्र पर विजय प्राप्त करके स्वर्ग पाने की अपेक्षा मरकर भगवान् को प्राप्त करना श्रेष्ठ… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – षष्ठ स्कन्ध – अध्याय ११ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ग्यारहवाँ अध्याय वृत्रासुर की वीरवाणी और भगवत्प्राप्ति श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! असुरसेना भयभीत होकर भाग रही थी । उसके सैनिक इतने अचेत हो रहे थे कि उन्होंने अपने स्वामी के धर्मानुकूल वचनों पर भी ध्यान न… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – षष्ठ स्कन्ध – अध्याय १० ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय दसवाँ अध्याय देवताओं द्वारा दधीचि ऋषि की अस्थियों से वज्र-निर्माण और वृत्रासुर की सेना पर आक्रमण श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! विश्व के जीवनदाता श्रीहरि इन्द्र को इस प्रकार आदेश देकर देवताओं के सामने वहीं-के-वहीं अन्तर्धान हो… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – षष्ठ स्कन्ध – अध्याय ९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नवाँ अध्याय विश्वरूप का वध, वृत्रासुर द्वारा देवताओं की हार और भगवान् की प्रेरणा से देवताओं का दधीचि ऋषि के पास जाना श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! हमने सुना हैं कि विश्वरूप के तीन सिर थे ।… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – षष्ठ स्कन्ध – अध्याय ८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय आठवाँ अध्याय नारायणकवच का उपदेश राजा परीक्षित् ने पूछा — भगवन् ! देवराज इन्द्र ने जिससे सुरक्षित होकर शत्रुओं की चतुरङ्गिणी सेना को खेल-खेल में-अनायास ही जीतकर त्रिलोकी की राजलक्ष्मी का उपभोग किया, आप उस नारायणकवच को मुझे… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – षष्ठ स्कन्ध – अध्याय ७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सातवाँ अध्याय बृहस्पतिजी के द्वारा देवताओं का त्याग और विश्वरूप का देवगुरु के रूप में वरण राजा परीक्षित् ने पूछा — भगवन् ! देवाचार्य बृहस्पतिजी ने अपने प्रिय शिष्य देवताओं को किस कारण त्याग दिया था ? देवताओं… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – षष्ठ स्कन्ध – अध्याय ६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय छठा अध्याय दक्षप्रजापति की साठ कन्याओं के वंश का विवरण श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! तदनन्तर ब्रह्माजी के बहुत अनुनय-विनय करने पर दक्षप्रजापति ने अपनी पत्नी असिक्नी के गर्भ से साठ कन्याएँ उत्पन्न की । वे सभी… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – षष्ठ स्कन्ध – अध्याय ५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पाँचवाँ अध्याय श्रीनारदजी के उपदेश से दक्षपुत्रों की विरक्ति तथा नारदजी को दक्ष का शाप श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! भगवान् के शक्तिसञ्चार से दक्ष प्रजापति परम समर्थ हो गये थे । उन्होंने पञ्चजन की पुत्री असिक्नी… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – षष्ठ स्कन्ध – अध्याय ४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय चौथा अध्याय दक्षके द्वारा भगवान् की स्तुति और भगवान् का प्रादुर्भाव राजा परीक्षित् ने पूछा — भगवन् ! आपने संक्षेप से (तीसरे स्कन्धमें) इस बात का वर्णन किया कि स्वायम्भुव मन्वन्तर में देवता, असुर, मनुष्य, सर्प और पशु-पक्षी… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – षष्ठ स्कन्ध – अध्याय ३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तीसरा अध्याय यम और यमदूतों का संवाद राजा परीक्षित् ने पूछा — भगवन् ! देवाधिदेव धर्मराज के वश में सारे जीव हैं और भगवान् के पार्षदों ने उन्हीं की आज्ञा भंग कर दी तथा उनके दूतों को अपमानित… Read More