श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय २० श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय २० ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय बीसवाँ अध्याय ज्ञानयोग, कर्मयोग और भक्तियोग उद्धवजी ने कहा — कमलनयन श्रीकृष्ण ! आप सर्वशक्तिमान् हैं । आपकी आज्ञा ही वेद है, उसमें कुछ कर्मों को करने की विधि है और कुछ करने का निषेध हैं । यह… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय १९ श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय १९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय उन्नीसवाँ अध्याय भक्ति, ज्ञान और यम-नियमादि साधनों का वर्णन भगवान् श्रीकृष्ण कहते हैं — उद्धवजी ! जिसने उपनिषदादि शास्त्रों के श्रवण, मनन और निदिध्यासन के द्वारा आत्मसाक्षात्कार कर लिया है, जो श्रोत्रिय एवं ब्रह्मनिष्ठ हैं, जिसका निश्चय केवल… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय १८ श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय १८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय अठारहवाँ अध्याय वानप्रस्थ और संन्यासी के धर्म भगवान् श्रीकृष्ण कहते हैं — प्रिय उद्धव ! यदि गृहस्थ मनुष्य वानप्रस्थ-आश्रम में जाना चाहे, तो अपनी पत्नी को पुत्रों के हाथ सौंप दे अथवा अपने साथ ही ले ले और… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय १७ श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय १७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सत्रहवाँ अध्याय वर्णाश्रम-धर्म-निरूपण उद्धवजी ने कहा — कमलनयन श्रीकृष्ण ! आपने पहले वर्णाश्रम-धर्म का पालन करनेवालों के लिये और सामान्यतः मनुष्यमात्र के लिये इस धर्म का उपदेश किया था, जिससे आपकी भक्ति प्राप्त होती है । अब आप… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय १६ श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय १६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सोलहवाँ अध्याय भगवान् की विभूतियों का वर्णन उद्धजी ने कहा — भगवन् ! आप स्वयं परब्रह्म हैं, न आपका आदि है और न अन्त । आप आवरणरहित अद्वितीय तत्व हैं । समस्त प्राणियों और पदार्थों की उत्पत्ति, स्थिति,… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय १५ श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय १५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पंद्रहवाँ अध्याय भिन्न-भिन्न सिद्धियों के नाम और लक्षण भगवान् श्रीकृष्ण कहते हैं — प्रिय उद्धव ! जब साधक इन्द्रिय, प्राण और मन को अपने वश में करके अपना चित्त मुझमें लगाने लगता है, मेरी धारणा करने लगता है,… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय १४ श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय १४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय चौदहवाँ अध्याय भक्तियोग की महिमा तथा ध्यानविधि का वर्णन उद्धवजी ने पूछा — श्रीकृष्ण ! ब्रह्मवादी महात्मा आत्मकल्याण के अनेकों साधन बतलाते हैं । उनमें अपनी-अपनी दृष्टि के अनुसार सभी श्रेष्ठ अथवा किसी एक की प्रधानता है ?… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय १३ श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय १३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तेरहवाँ अध्याय हंसरूप से सनकादि को दिये हुए उपदेश का वर्णन भगवान् श्रीकृष्ण कहते हैं — प्रिय उद्धव ! सत्त्व, रज और तम — ये तीनों बुद्धि (प्रकृति) के गुण हैं, आत्मा के नहीं । सत्त्व के द्वारा… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय १२ श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय १२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय बारहवाँ अध्याय सत्सङ्ग की महिमा और कर्म तथा कर्मत्याग की विधि भगवान् श्रीकृष्ण कहते हैं — प्रिय उद्धव ! जगत् में जितनी आसक्तियाँ हैं, उन्हें सत्सङ्ग नष्ट कर देता है । यहीं कारण है कि सत्सङ्ग जिस प्रकार… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय ११ श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय ११ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ग्यारहवाँ अध्याय बद्ध, मुक्त और भक्तजनों के लक्षण भगवान् श्रीकृष्ण ने कहा — प्यारे उद्धव ! आत्मा बद्ध है या मुक्त है, इस प्रकार की व्याख्या या व्यवहार मेरे अधीन रहनेवाले सत्त्वादि गुणों की उपाधि से ही होता… Read More