श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ९० ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नब्बेवाँ अध्याय भगवान् श्रीकृष्ण के लीला-विहार का वर्णन श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! द्वारकानगरी की छटा अलौकिक थी । उसकी सड़कें मद चूते हुए मतवाले हाथियों, सुसज्जित योद्धाओं, घोड़ों और स्वर्णमय रथों की भीड़ से सदा… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ८९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नवासीवाँ अध्याय भृगुजी के द्वारा त्रिदेवों की परीक्षा तथा भगवान् का मरे हुए ब्राह्मण-बालकों को वापस लाना श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! एक बार सरस्वती नदी के पावन तट पर यज्ञ प्रारम्भ करने के लिये बड़े-बड़े… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ८८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय अट्ठासीवाँ अध्याय शिवजी का सङ्कटमोचन राजा परीक्षित् ने पूछा — भगवन् ! भगवान् शङ्कर ने समस्त भोगों का परित्याग कर रक्खा है; परन्तु देखा यह जाता है कि जो देवता, असुर अथवा मनुष्य उनकी उपासना करते हैं,… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ८७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सत्तासीवाँ अध्याय वेदस्तुति राजा परीक्षित् ने पूछा — भगवन् ! ब्रह्म कार्य और कारण से सर्वथा परे है । सत्व, रज और तम — ये तीनों गुण उसमें हैं ही नहीं । मन और वाणी से सङ्केत… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ८६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय छियासीवाँ अध्याय सुभद्राहरण और भगवान् का मिथिलापुरी में राजा जनक और श्रुतदेव ब्राह्मण के घर एक ही साथ जाना राजा परीक्षित् ने पूछा — भगवन् ! मेरे दादा अर्जुन ने भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजी की बहिन सुभद्राजी… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ८५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पचासीवाँ अध्याय श्रीभगवान् के द्वारा वसुदेवजी को ब्रह्मज्ञान का उपदेश तथा देवकीजी के छः पुत्रों को लौटा लाना श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! इसके बाद एक दिन भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजी प्रातःकालीन प्रणाम करने के लिये… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ८४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय चौरासीवाँ अध्याय वसुदेवजीका यज्ञोत्सव श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! सर्वात्मा भक्तभवहारो भगवान् श्रीकृष्ण के प्रति उनकी पत्नियों का कितना प्रेम हैं — यह बात कुन्ती, गान्धारी, द्रौपदी, सुभद्रा, दूसरी राजपत्नियों और भगवान् की प्रियतमा गोपियों ने… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ८३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तिरासीवाँ अध्याय भगवान् की पटरानियों के साथ द्रौपदी की बातचीत श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! भगवान् श्रीकृष्ण ही गोपियों को शिक्षा देनेवाले हैं और वहीं उस शिक्षा के द्वारा प्राप्त होनेवाली वस्तु हैं । इसके पहले,… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ८२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय बयासीवाँ अध्याय भगवान् श्रीकृष्ण-बलराम से गोप-गोपियों की भेंट श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! इसी प्रकार भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजी द्वारका में निवास कर रहे थे । एक बार सर्वग्रास सूर्यग्रहण लगा, जैसा कि प्रलय के समय… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ८१ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय इक्यासीवाँ अध्याय सुदामाजी को ऐश्वर्य की प्राप्ति श्रीशुकदेवजी कहते हैं — प्रिय परीक्षित् ! भगवान् श्रीकृष्ण सबके मन की बात जानते हैं । वे ब्राह्मणों के परम भक्त, उनके क्लेशों के नाशक तथा संतों के एकमात्र आश्रय… Read More