श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ७० ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सत्तरवाँ अध्याय भगवान् श्रीकृष्ण की नित्यचर्या और उनके पास जरासन्ध के कैदी राजाओं के दूत का आना श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! जब सबेरा होने लगता, कुक्कुट (मुरगे) बोलने लगते, तब वे श्रीकृष्ण-पत्नियाँ, जिनके कण्ठ में… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ६९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय उनहत्तरवाँ अध्याय देवर्षि नारदजी का भगवान् की गृहचर्या देखना श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! जब देवर्षि नारद ने सुना कि भगवान् श्रीकृष्ण ने नरकासुर (भौमासुर) को मारकर अकेले ही हजारों राजकुमारियों के साथ विवाह कर लिया… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ६८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय अड़सठवाँ अध्याय कौरवों पर बलरामजी का कोप और साम्ब का विवाह श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! जाम्बवतीनन्दन साम्ब अकेले ही बहुत बड़े-बड़े वीरों पर विजय प्राप्त करनेवाले थे । वे स्वयंवर में स्थित दुर्योधन की कन्या… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ६७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सड़सठवाँ अध्याय द्विविद का उद्धार राजा परीक्षित् ने पूछा — भगवान् बलरामजी सर्वशक्तिमान् एवं सृष्टि-प्रलय की सीमा से परे, अनन्त हैं । उनका स्वरूप, गुण, लीला आदि मन, बुद्धि और वाणी के विषय नहीं हैं । उनकी… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ६६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय छाछठवाँ अध्याय पौण्ड्रक और काशिराज का उद्धार श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! जब भगवान् बलरामजी नन्दबाबा के व्रज में गये हुए थे, तब पीछे से करूष देश के अज्ञानी राजा पौण्ड्रक ने भगवान् श्रीकृष्ण के पास… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ६५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पैंसठवाँ अध्याय श्रीबलरामजी का व्रजगमन श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! भगवान् बलरामजी के मन में व्रज के नन्दबाबा आदि स्वजन-सम्बन्धियों से मिलने की बड़ी इच्छा और उत्कण्ठा थी । अब वे रथ पर सवार होकर द्वारका… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ६४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय चौंसठवाँ अध्याय नृग राजा की कथा श्रीशुकदेवजी कहते हैं — प्रिय परीक्षित् ! एक दिन साम्ब, प्रद्युम्न, चारुभानु और गद आदि यदुवंशी राजकुमार घूमने के लिये उपवन में गये ॥ १ ॥ वहाँ बहुत देर तक खेल… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ६३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तिरसठवाँ अध्याय भगवान् श्रीकृष्ण के साथ बाणासुर का युद्ध श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! बरसात के चार महीने बीत गये । परन्तु अनिरुद्धजी का कहीं पता न चला । उनके घर के लोग, इस घटना से… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ६२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय बासठवाँ अध्याय ऊषा-अनिरुद्ध मिलन राजा परीक्षित् ने पूछा — महायोगसम्पन्न मुनीश्वर ! मैंने सुना है कि यदुवंशशिरोमणि अनिरुद्धजी ने बाणासुर की पुत्री ऊषा से विवाह किया था और इस प्रसङ्ग में भगवान् श्रीकृष्ण और शङ्करजी का बहुत… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ६१ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय इकसठवाँ अध्याय भगवान् की सन्तति का वर्णन तथा अनिरुद्ध के विवाह में रुक्मी का मारा जाना श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! भगवान् श्रीकृष्ण की प्रत्येक पत्नी के गर्भ से दस-दस पुत्र उत्पन्न हुए । वे रूप,… Read More