श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ५० श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ५० ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पचासवाँ अध्याय जरासन्ध से युद्ध और द्वारकापुरी का निर्माण श्रीशुकदेवजी कहते हैं — भरतवंशशिरोमणि परीक्षित् ! कंस की दो रानियाँ — अस्ति और प्राप्ति । पति की मृत्यु से उन्हें बड़ा दुःख हुआ और वे अपने पिता… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय ४९ श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय ४९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय उनचासवाँ अध्याय अक्रूरजी का हस्तिनापुर जाना श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! भगवान् के आज्ञानुसार अक्रूरजी हस्तिनापुर गये । वहाँ की एक-एक वस्तु पर पुरुवंशी नरपतियों की अमरकीर्ति की छाप लग रही है । वे वहाँ पहले… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय ४८ श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय ४८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय अड़तालीसवाँ अध्याय भगवान् का कुब्जा और अक्रूरजी के घर जाना श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! तदनन्तर सबके आत्मा तथा सब कुछ देखनेवाले भगवान् श्रीकृष्ण अपने से मिलन की आकाङ्क्षा रखकर व्याकुल हुई कुब्जा का प्रिय करने… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय ४७ श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय ४७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सैंतालीसवाँ अध्याय उद्धव तथा गोपियों की बातचीत और भ्रमरगीत श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! गोपियों ने देखा कि श्रीकृष्ण के सेवक उद्धवजी की आकृति और वेषभूषा श्रीकृष्ण से मिलती-जुलती है । घुटनों तक लंबी-लंबी भुजाएँ हैं,… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय ४६ श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय ४६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय छियालीसवाँ अध्याय उद्धवजी की व्रजयात्रा श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! उद्धवजी [महामतिमान उद्धव वृष्णिवंशीय यादवों के माननीय मन्त्री थे।[1] उनके पिता का नाम ‘उपंग’ कहा गया है। कहीं-कहीं उन्हें वसुदेव के भाई ‘देवभाग’ का पुत्र कहा… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय ४५ श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय ४५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पैंतालीसवाँ अध्याय श्रीकृष्ण-बलराम का यज्ञोपवीत और गुरुकुलप्रवेश श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! भगवान् श्रीकृष्ण ने देखा कि माता-पिता को मेरे ऐश्वर्य का, मेरे भगवद्भाव का ज्ञान हो गया है, परंतु इन्हें ऐसा ज्ञान होना ठीक नहीं,… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय ४४ श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय ४४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय चौवालीसवाँ अध्याय चाणूर, मुष्टिक आदि पहलवानों का तथा कंस का उद्धार श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! भगवान् श्रीकृष्ण ने चाणूर आदि के वध का निश्चित संकल्प कर लिया । जोड़ बद दिये जाने पर श्रीकृष्ण चाणूर… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय ४३ श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय ४३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तैंतालीसवाँ अध्याय कुवलयापीड़ का उद्धार और अखाड़े में प्रवेश श्रीशुकदेवजी कहते हैं — काम-क्रोधादि शत्रुओं को पराजित करनेवाले परीक्षित् ! अब श्रीकृष्ण और बलराम भी स्नानादि नित्यकर्म से निवृत्त हो दंगल के अनुरूप नगाड़े की ध्वनि सुनकर… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय ४२ श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय ४२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय बयालीसवाँ अध्याय कुब्जा पर कृपा, धनुषभङ्ग और कंस की घबड़ाहट श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! इसके बाद भगवान् श्रीकृष्ण जब अपनी मण्डली के साथ राजमार्ग से आगे बढ़े, तब उन्होंने एक युवती स्त्री को देखा ।… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय ४१ श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय ४१ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय इकतालीसवाँ अध्याय श्रीकृष्ण का मथुराजी में प्रवेश श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! अक्रूरजी इस प्रकार स्तुति कर रहे थे । उन्हें भगवान् श्रीकृष्ण ने जल में अपने दिव्यरूप के दर्शन कराये और फिर उसे छिपा लिया,… Read More