श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय ४० ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय चालीसवाँ अध्याय अक्रूरजी के द्वारा भगवान् श्रीकृष्ण की स्तुति अक्रूरजी बोले — प्रभो ! आप प्रकृति आदि समस्त कारणों के परम कारण हैं । आप ही अविनाशी पुरुषोत्तम नारायण हैं तथा आपके ही नाभिकमल से उन ब्रह्माजी… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय ३९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय उनतालीसवाँ अध्याय श्रीकृष्ण-बलराम का मथुरागमन श्रीशुकदेवजी कहते हैं — भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजी ने अक्रूरजी का भली-भाँति सम्मान किया । वे आराम से पलंग पर बैठ गये । उन्होंने मार्ग में जो-जो अभिलाषाएँ की थीं, वे सब… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय ३८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय अड़तीसवाँ अध्याय अक्रूरजी की व्रज-यात्रा श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! महामति अक्रूरजी भी वह रात मथुरापुरी में बिताकर प्रातःकाल होते ही रथ पर सवार हुए और नन्दबाबा के गोकुल की ओर चल दिये ॥ १ ॥… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय ३७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सैंतीसवाँ अध्याय केशी और व्योमासुर का उद्धार तथा नारदजी के द्वारा भगवान् की स्तुति श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! कंस ने जिस केशी नामक दैत्य को भेजा था, वह बड़े भारी घोड़े के रूप में मन… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय ३६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय छत्तीसवाँ अध्याय अरिष्टासुर का उद्धार और कंस का श्रीअक्रूरजी को व्रज में भेजना श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! जिस समय भगवान् श्रीकृष्ण व्रज में प्रवेश कर रहे थे और वहाँ आनन्दोत्सव की धूम मची हुई थी,… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय ३५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पैंतीसवाँ अध्याय युगलगीत श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! भगवान् श्रीकृष्ण के गौओं को चराने के लिये प्रतिदिन वन में चले जाने पर उनके साथ गोपियों का चित्त भी चला जाता था । उनका मन श्रीकृष्ण का… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय ३४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय चौंतीसवाँ अध्याय सुदर्शन और शङ्खचूड का उद्धार श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! एक बार नन्दबाबा आदि गोपों ने शिवरात्रि के अवसर पर बड़ी उत्सुकता, कौतूहल और आनन्द से भरकर बैलों से जुती हुई गाड़ियों पर सवार… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय ३३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तैंतीसवाँ अध्याय महारास श्रीशुकदेवजी कहते हैं — राजन् ! गोपियाँ भगवान् की इस प्रकार प्रेमभरी सुमधुर वाणी सुनकर जो कुछ विरह-जन्य ताप शेष था, उससे भी मुक्त हो गयी और सौन्दर्य-माधुर्य-निधि प्राण-प्यारे के अङ्ग-सङ्ग से सफल-मनोरथ हो… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय ३२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय बत्तीसवाँ अध्याय भगवान् का प्रकट होकर गोपियों को सान्त्वना देना श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! भगवान् की प्यारी गोपियाँ विरह के आवेश में इस प्रकार भाँति-भाँति से गाने और प्रलाप करने लगीं । अपने कृष्ण-प्यारे के… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध पूर्वार्ध – अध्याय ३१ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय इकतीसवाँ अध्याय गोपिकागीत गोपियाँ विरहावेश में गाने लगीं — ‘प्यारे ! तुम्हारे जन्म के कारण वैकुण्ठ आदि लोकों से भी व्रज की महिमा बढ़ गयी हैं । तभी तो सौन्दर्य और मृदुलता की देवी लक्ष्मीजी अपना निवासस्थान… Read More