श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ६० ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय साठवाँ अध्याय श्रीकृष्ण-रुक्मिणी-संवाद श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! एक दिन समस्त जगत् के परमपिता और ज्ञानदाता भगवान् श्रीकृष्ण रुक्मिणीजी के पलँग पर आराम से बैठे हुए थे । भीष्मक-नन्दिनी श्रीरुक्मिणीजी सखियों के साथ अपने पतिदेव की… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ५९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय उनसठवाँ अध्याय भौमासुर का उद्धार और सोलह हजार एक सौ राजकन्याओं के साथ भगवान् का विवाह राजा परीक्षित् ने पूछा — भगवन् ! भगवान् श्रीकृष्ण ने भौमासुर को, जिसने उन स्त्रियों को बंदीगृह में डाल रक्खा था,… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ५८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय अट्ठावनवाँ अध्याय भगवान् श्रीकृष्ण के अन्यान्य विवाहों की कथा श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! अब पाण्डवों का पता चल गया था कि वे लाक्षाभवन में जले नहीं हैं । एक बार भगवान् श्रीकृष्ण उनसे मिलने के… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ५७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सत्तावनवाँ अध्याय स्यमन्तक-हरण, शतधन्वा का उद्धार और अकूरजी को फिर से द्वारका बुलाना श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! यद्यपि भगवान् श्रीकृष्ण को इस बात का पता था कि लाक्षागृह की आग से पाण्डवों का बाल भी… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ५६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय छप्पनवाँ अध्याय स्यमन्तक-मणि की कथा, जाम्बवती और सत्यभामा के साथ श्रीकृष्ण का विवाह श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! सत्राजित्… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ५५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पचपनवाँ अध्याय प्रद्युम्न का जन्म और शम्बरासुर का वध श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! कामदेव भगवान् वासुदेव के ही अंश हैं । वे पहले रुद्रभगवान् की क्रोधाग्नि से भस्म हो गये थे । अब फिर शरीर-प्राप्ति… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ५४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय चौवनवाँ अध्याय शिशुपाल के साथी राजाओं की और रुक्मी की हार तथा श्रीकृष्ण-रुक्मिणी-विवाह श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! इस प्रकार कह सुनकर सब-के-सब राजा क्रोध से आगबबूला हो उठे और कवच पहनकर अपने-अपने वाहनों पर सवार… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ५३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तिरपनवाँ अध्याय रुक्मिणीहरण श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! भगवान् श्रीकृष्ण ने विदर्भराजकुमारी रुक्मिणीजी का यह सन्देश सुनकर अपने हाथ से ब्राह्मणदेवता का हाथ पकड़ लिया और हँसते हुए यों बोले ॥ १ ॥ भगवान् श्रीकृष्ण ने… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ५२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय बावनवाँ अध्याय द्वारकागमन, श्रीबलरामजी का विवाह तथा श्रीकृष्ण के पास रुक्मिणीजी का सन्देश लेकर ब्राह्मण का आना श्रीशुकदेवजी कहते हैं — प्यारे परीक्षित् ! भगवान् श्रीकृष्ण ने इस प्रकार इक्ष्वाकुनन्दन राजा मुचुकुन्द पर अनुग्रह किया । अब… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ५१ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय इक्यावनवाँ अध्याय कालयवन का भस्म होना, मुचुकुन्द की कथा श्रीशुकदेवजी कहते हैं — प्रिय परीक्षित् ! जिस समय भगवान् श्रीकृष्ण मथुरा नगर के मुख्य द्वार से निकले, उस समय ऐसा मालूम पड़ा मानो पूर्व दिशा से चन्द्रोदय… Read More