श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ८० ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय अस्सीवाँ अध्याय श्रीकृष्ण के द्वारा सुदामाजी का स्वागत राजा परीक्षित् ने पूछा — भगवन् ! प्रेम और मुक्ति के दाता परब्रह्म परमात्मा भगवान् श्रीकृष्ण की शक्ति अनन्त हैं । इसलिये उनकी माधुर्य और ऐश्वर्य से भरी लीलाएँ… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ७९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय उन्नासीवाँ अध्याय बल्वल का उद्वार और बलरामजी की तीर्थयात्रा श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! पर्व का दिन आने पर बड़ा भयङ्कर अंधड़ चलने लगा । धूल की वर्षा होने लगी और चारों ओर से पीब की… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ७८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय अठहत्तरवाँ अध्याय दन्तवक्त्र और विदूरथ का उद्धार तथा तीर्थयात्रा में बलरामजी के हाथ से सूतजी का वध श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! शिशुपाल, शाल्व और पौण्ड्रक के मारे जाने पर उनकी मित्रता का ऋण चुकाने के… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ७७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सतहत्तरवाँ अध्याय शाल्व-उद्धार श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! अब प्रद्युम्नजी ने हाथ-मुँह धोकर, कवच पहन धनुष धारण किया और सारथि से कहा कि ‘मुझे वीर द्युमान् के पास फिर से ले चलो’ ॥ १ ॥ उस… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ७६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय छिहत्तरवाँ अध्याय शाल्व के साथ यादवों का युद्ध श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! अब मनुष्यकी-सी लीला करनेवाले भगवान् श्रीकृष्ण का एक और भी अद्भुत चरित्र सुनो । इसमें यह बताया जायेगा कि सौभ नामक विमान का… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ७५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पचहत्तरवाँ अध्याय राजसूय यज्ञ की पूर्ति और दुर्योधन का अपमान राजा परीक्षित् ने पूछा — भगवन् ! अजातशत्रु धर्मराज युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ-महोत्सव को देखकर, जितने मनुष्य, नरपति, ऋषि, मुनि और देवता आदि आये थे, वे सब… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ७४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय चौहत्तरवाँ अध्याय भगवान् की अग्रपूजा और शिशुपाल का उद्धार श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! धर्मराज युधिष्ठिर जरासन्ध का वध और सर्वशक्तिमान् भगवान् श्रीकृष्ण की अद्भुत महिमा सुनकर बहुत प्रसन्न हुए और उनसे बोले ॥ १ ॥… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ७३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तिहत्तरवाँ अध्याय जरासन्ध के जेल से छूटे हुए राजाओं की विदाई और भगवान् का इन्द्रप्रस्थ लौट आना श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! जरासन्ध ने अनायास ही बीस हजार आठ सौ राजाओं को जीतकर पहाड़ों की घाटी… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ७२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय बहत्तरवाँ अध्याय पाण्डवों के राजसूययज्ञ का आयोजन और जरासन्ध का उद्धार श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! एक दिन महाराज युधिष्ठिर बहुत-से मुनियों, ब्राह्मण, क्षत्रियों, वैश्यों, भीमसेन आदि भाइयों, आचार्यों, कुल के बड़े-बूढों, जाति-बन्धुओं, सम्बन्धियों एवं कुटुम्बियों… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ७१ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय इकहत्तरवाँ अध्याय श्रीकृष्णभगवान् का इन्द्रप्रस्थ पधारना श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! भगवान् श्रीकृष्ण के वचन सुनकर महामति उद्धवजी ने देवर्षि नारद, सभासद् और भगवान् श्रीकृष्ण के मत पर विचार किया और फिर वे कहने लगे ॥… Read More