सर्वोपयोगी अनुभूत साधना सर्वोपयोगी अनुभूत साधना इस ‘साधना-क्रम’ में तीन उपासनाएँ है- (१) श्री गायत्री उपासना, (२) श्री दुर्गोपासना एवं (३) श्री बटुक-भैरवोपासना। प्रतिदिन प्रातःकाल और रात्रि-भोजन के पूर्व, निजी आसन पर बैठकर नियमित रुप से निश्वित समय पर इस साधना कप करने से जीवन की सभी बाधाएँ दूर होती हैं एवं सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।… Read More
अमोघ लघु प्रयोग अमोघ लघु प्रयोग नवार्ण-मन्त्रः- “ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।।” ‘ऐं’ – बीजमादीन्दु – समान – दीप्तिम् । ‘ह्रीं’ सूर्य – तेजो – द्युतिं द्वितीयम् ।। ‘क्लीं’ – मूर्तिः वैश्वानर – तुल्य – रुपम् । तृतीयमानन्द – सुखाय चिन्त्यम् ।।१ ‘चां’ शुद्ध – जाम्बु – वत् – कान्ति – तुर्यम् । ‘मुं’ पञ्चमं रक्त – तरं… Read More
महा-लक्ष्मी महा-मन्त्र प्रयोग महा-लक्ष्मी महा-मन्त्र प्रयोग विनियोगः- ॐ अस्य श्रीपञ्च-दश-ऋचस्य श्री-सूक्तस्य श्रीआनन्द-कर्दम-चिक्लीतेन्दिरा-सुता ऋषयः, अनुष्टुप्-वृहति-प्रस्तार-पंक्ति-छन्दांसि, श्रीमहा-लक्ष्मी देवताः, श्रीमहा-लक्ष्मी-प्रसाद-सिद्धयर्थे राज-वश्यार्थे सर्व-स्त्री-पुरुष-वश्यार्थे महा-मन्त्र-जपे विनियोगः।… Read More
त्रि-विध-सिद्धि-प्रद मन्त्र त्रि-विध-सिद्धि-प्रद मन्त्र मन्त्रः- “ॐ ह्रीं श्रीं ठं ठं ठं नमो भगवते मम सर्व-कार्याणि, साधय-साधय, मां रक्ष-रक्ष, शीघ्रं मां धनिनं कुरु-कुरु हुं फट्, श्रियं देहि, प्रज्ञां देहि, ममापत्तिं निवारय-निवारय स्वाहा ।”… Read More
तन्त्रोक्त कवच संस्कार तन्त्रोक्त कवच संस्कार ‘तन्त्रों’ के अनुसार ‘कवच’ को भोज-पत्र आदि पर लिखकर रक्त-सूत्र (लाल-रेशमी डोरे) या श्वेत-सूत्र (सफेद-रेशमी डोरे) से लपेटे । तब स्वर्ण, रजत, ताम्र आदि धातु की ‘गुटिका’ (ताबीज) में उसे स्थापित करे । इस गुटिका को शुभ दिन ‘पञ्च-गव्य’ और ‘पञ्चामृत’ द्वारा स्नान कराए। स्नान कराते समय मूल-मन्त्र का जप करता रहे।… Read More
ग्रह-बाधा, ज्वर-नाशक विघ्नेश-मन्त्र ग्रह-बाधा, ज्वर-नाशक विघ्नेश-मन्त्र “ॐ नमो गणपतये महा-वीर ! दश-भुज ! मदन-काल-विनाशन ! मृत्युं हन-हन, धम-धम, मथ-मथ, कालं संहर-संहर, सर्व-ग्रहांश्चूर्णय-चूर्णय, नागान् मोटय-मोटय, रुद्र-रुप त्रिभुवनेश्वर सर्वतोमुख ! हुं फट्-स्वाहा ।।”… Read More
श्रीसंग्राम-विजया विद्या श्रीसंग्राम-विजया विद्या विनियोगः- ॐ अस्य श्रीसंग्राम-विजया-विद्यायाः श्रीईश्वर ऋषिः । उष्णिक् छन्दः । श्रीचामुण्डा देवता, सर्व-कार्येषु जयार्थे, शत्रु-नाशार्थे वा जपे विनियोगः । ऋष्यादि-न्यासः- श्रीईश्वर ऋषये नमः शिरसि । उष्णिक् छन्दसे नमः मुखे । श्रीचामुण्डा देवतायै नमः हृदि, सर्व-कार्येषु जयार्थे, शत्रु-नाशार्थे वा जपे विनियोगाय नमः सर्वांगे ।… Read More
सर्प-भय-निवारण के प्रयोग सर्प-भय-निवारण के प्रयोग यदि किसी को अपने आस-पास सर्पों का भय हो, तो इस प्रयोगों में से किसी एक अथवा सभी का उपयोग कर उक्त भय से मुक्त हो सकते हैं । १॰ निम्न मन्त्र का पाठ करें –… Read More
सिद्ध लक्ष्मी-प्रार्थना सिद्ध लक्ष्मी-प्रार्थना सिद्धि के लिए दो बातें अत्यन्त आवश्यक है – श्रद्धा और विश्वास । श्रद्धा और विश्वास से ‘मन्त्र’ साधना अवश्य सफल होती है । भगवती कमला की शास्त्रीय प्रार्थना – ‘श्री श्रीविद्यार्णव तन्त्र’ में द्वा-विंशः श्वास में ‘लक्ष्मी-हृदय’ के प्रसङ्ग में बतलाई हुई एक सिद्ध-क्रिया यहाँ आपके सम्मुख प्रस्तुत है । इससे सरल… Read More
भगवान् श्रीकृष्ण की साधना भगवान् श्रीकृष्ण की साधना मन्त्रः- ॥ श्रीं ह्रीं क्लीं कृष्णाय स्वाहा ॥ (आठ अक्षर) भगवान् श्रीकृष्ण के उक्त “अष्टाक्षर-मन्त्र” की साधना से भक्तों की सभी कामनाएँ पूरी होती है । इस मन्त्र की साधना विधि इस प्रकार है – विनियोगः- ॐ अस्य श्रीकृष्ण-अष्टाक्षर-मन्त्रस्य श्री नारद ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, श्रीकृष्णः देवता, मम सकल-कामना-सिद्धयर्थे जपे विनियोगः ।… Read More