श्रीनृसिंह पूजन विधि श्रीनृसिंह पूजन विधि वैष्णव भक्तों को नृसिंह जयन्ती के दिन नृसिंह जी की षोडशोपचार विधि से पूजा-अर्चना करनी चाहिए । इस दिन भगवान् नृसिंह की पूजा करने से उनकी विशिष्ट कृपा प्राप्त होती है । पूजन विधि:- पूजाकक्ष या किसी अन्य कक्ष में चौकी पर पीला रेशमी वस्त्र बिछाकर उस पर अष्टदल कमल चावलों से… Read More
शत्रुबाधा निवारण हेतु नृसिंह कवच प्रयोग शत्रुबाधा निवारण हेतु नृसिंह कवच प्रयोग सर्वप्रथम दाहिने हाथ में जल लेकर निम्नलिखित विनियोग का पाठ करें :- विनियोगः- “ॐ अस्य श्रीनृसिंह कवच मन्त्रस्य प्रजापतिर्ऋषिः गायत्रीश्छन्दः नृसिंह देवता, क्ष्रौं बीजं, मम सर्वारिष्ट च शत्रुक्षयाय पूर्वकं ममाभीष्ट सिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ॥” ध्यान :- हाथ में पुष्प लेकर भगवान् नृसिंह का निम्नलिखित श्लोक से ध्यान करें :… Read More
जानकी नवमी से करें शीघ्र विवाह हेतु जानकी मंगल प्रयोग जानकी नवमी से करें शीघ्र विवाह हेतु जानकी मंगल प्रयोग शीघ्र विवाह के लिए जहाँ गौरी और शंकर की पूजा की जाती है, वहीं दूसरी ओर जानकी और श्रीराम की भी पूजा-उपासना की जाती है । माता जानकी की कृपा से न केवल शीघ्र विवाह होता है, वरन् अच्छे वर की भी प्राप्ति होती है… Read More
महर्षि आश्वलायन-कृत माँ सरस्वती का विशिष्ट पाठ महर्षि आश्वलायन-कृत माँ सरस्वती का विशिष्ट पाठ मंगलाचरणः ॐ वाङ् मे मनसि प्रतिष्ठिता। मनो मे वाचि प्रतिष्ठितमाविरावीर्य एधि। वेदस्य म आणीस्थः। श्रुतं मे मा प्रहासीः। अनेनाधीतेनाहो-रात्रान्। सन्दधाम्यमृतं वदिष्यामि। सत्यं वदिष्यामि। तन्मामवतु वक्तारम्। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः पहले मन्त्र का विनियोग हाथ में जल लेकर पढ़े- विनियोगः ॐ अस्य श्रीसरस्वती-दश-श्लोकी-महा-मन्त्रस्य अहमाश्वलायन ऋषिः। अनुष्टुप् छन्दः। श्रीवागीश्वरी देवता।… Read More
श्रीपञ्चमी-वसन्तपञ्चमी श्रीपञ्चमी-वसन्तपञ्चमी वसन्तपञ्चमी पूजा माघ शुक्ल पूर्वविद्धा पञ्चमी को उत्तम वेदी पर वस्त्र बिछाकर अक्षतों का अष्टदल कमल बनाये। उसके अग्रभाग में गणेशजी और पृष्ठभाग में ‘वसन्त’-जौ, गेहूँ की बाल का पूञ्ज (जो जलपूर्ण कलश में ड़ठल सहित रखकर बनाया जाता है) स्थापित करके सर्वप्रथम गणेशजी का पूजन करे और पीछे उक्त पुञ्ज में “रति” और… Read More
श्रीआकाशभैरव चित्रमाला मंत्र ॥ श्रीआकाशभैरव चित्रमाला मंत्र ॥ आकाशभैरव से तात्पर्य रुद्रावतार भगवान् शरभ शालुव पक्षिराज से है । शत्रूनाश हेतु यह प्रयोग किया जाता है । गुरु स्मरण एवं इष्ट-देवता-पूजन कर निम्न मन्त्र का १०८ बार पाठ करें अथवा शरभ पूजन उपरांत एक बार पाठ करे । इससे सभी कार्य सिद्ध होते हैं । साधारण कार्यों हेतु… Read More
शरभ मालामन्त्रम् ॥ अथ शरभ मालामन्त्रम् ॥ माला विनियोग मंत्रः- अस्य मंत्रस्य कालाग्नि रुद्र ऋषिः अति जगती छन्दः श्री शरभेश्वरो देवता, खं बीजं , स्वाहा शक्तिः:, फट् कीलकं चतुर्विध पुरूषार्थ सिद्धयर्थे जपे विनियोगः । ॥ ध्यानम् ॥ चन्द्रार्काग्निस्त्रिदृष्टि कुलिशवरनखश्चञ्चलोऽत्युग्र जिह्वः । काली दुर्गा च पक्षौ हृदय जठरगो भैरवो वाडवाग्निः ॥ ऊरूस्थौ-व्याधिमृत्युशरभवरखगरचश्चण्ड – वातातिवेगः । संहर्ता-सर्वशत्रून स जयति… Read More
देवी-देवताओं के गायत्री मन्त्र ॥ देवी-देवताओं के गायत्री मन्त्र ॥ सरस्वती गायत्री मन्त्रः- “ॐ ऐं वाग्देव्यै विद्महे कामराजाय धीमहि तन्नो देवी प्रचोदयात् ॥” षडङ्गन्यासः- ॐ ऐं वाग्देव्यै हृदयाय नमः ॥ १ ॥ ॐ विद्महे शिरसे स्वाहा ॥२॥ ॐ कामराजाय शिखायै वषट् ॥ ३ ॥ ॐ धीमहि कवचाय हुम् ॥ ४ ॥ ॐ तन्नो देवी नेत्र-त्रयाय वौषट् ॥ ५ ॥… Read More
श्रीनाथादि गुरुत्रयं मण्डल पूजन प्रयोगः ।। श्रीनाथादि गुरुत्रयं मण्डल पूजन प्रयोगः ।। श्रीनाथादिगुरुत्रयं गणपतिं पीठत्रयं भैरवं, सिद्धौघं वटुकत्रयं पदयुगं दूतीक्रमं मण्डलम् । वीरानष्टचतुकषष्टिनवकं वीरावलीपञ्चकं, श्रीमन्मालिनि मन्त्रराजसहितं वन्दे गुरोर्मण्डलम् ।। (उपर्युक्त ‘ श्रीनाथादिगुरुत्रय० ‘ गुरुमण्डल के अर्चन का रहस्यमय ‘ मन्त्र ‘ है ।)… Read More
हनुमान जी का वीर-साधन-प्रयोग हनुमान जी का वीर-साधन-प्रयोग ब्राह्म-मुहूर्त में उठकर, ‘सन्ध्या-वन्दनादि’ नित्य क्रिया करने के उपरान्त साधक नदी किनारे जाए। नदी में स्नान करके, ‘तीर्थ-आवाहन’ कर आठ बार मूल-मन्त्र का जप करे। फिर मूल-मन्त्र जपते हुए बारह बार अपने मस्तक पर जल के द्वारा ‘अभिषेक’ करे। अभिषेक करने के बाद वस्त्र धारण कर नदी के किनारे बैठ- ‘ह्रां… Read More