आञ्जनेयास्त्रम् ।। अथ आञ्जनेयास्त्रम् ।। अधुना गिरिजानन्द आञ्जनेयास्त्रमुत्तमम् । समन्त्रं सप्रयोगं च वद मे परमेश्वर ।।१।। ।।ईश्वर उवाच।। ब्रह्मास्त्रं स्तम्भकाधारि महाबलपराक्रम् । मन्त्रोद्धारमहं वक्ष्ये श्रृणु त्वं परमेश्वरि ।।२।। आदौ प्रणवमुच्चार्य मायामन्मथ वाग्भवम् । शक्तिवाराहबीजं व वायुबीजमनन्तरम् ।।३।। विषयं द्वितीयं पश्चाद्वायु-बीजमनन्तरम् । ग्रसयुग्मं पुनर्वायुबीजं चोच्चार्य पार्वति ।।४।। स्फुर-युग्मं वायु-बीजं प्रस्फुरद्वितीयं पुनः । वायुबीजं ततोच्चार्य हुं फट् स्वाहा… Read More
मनोवांछित वर-प्राप्ति प्रयोग मनोवांछित वर-प्राप्ति प्रयोग १॰ भगवती सीता ने गौरी की उपासना निम्न मन्त्र द्वारा की थी, जिसके फलस्वरुप उनका विवाह भगवान् श्रीराम से हुआ। अतः कुमारी कन्याओं को मनोवाञ्छित वर पाने के लिये इसका पाठ करना चाहिए। “ॐ श्रीदुर्गायै सर्व-विघ्न-विनाशिन्यै नमः स्वाहा। सर्व-मङ्गल-मङ्गल्ये, सर्व-काम-प्रदे देवि, देहि मे वाञ्छितं नित्यं, नमस्ते शंकर-प्रिये।। दुर्गे शिवेऽभये माये, नारायणि सनातनि,… Read More
अभीष्ट फल-दायक सदा-शिव-कवच अभीष्ट फल-दायक सदा-शिव-कवच भगवान् शिव का प्रस्तुत कल्याणकारी कवच अत्यन्त छोटा है और प्रायः अनुभूत है । आशा है, भक्त-जन इसका प्रातः-काल नित्य-पाठ कर इससे लाभ उठाएँगे । इस कवच के पाठ से सभी कामनाओं की पूर्ति एवं सर्व प्रकार से रक्षा होती है । ।।श्रीदेवी उवाच।। भगवन् देव-देवेश ! सर्वाम्नाय-प्रपूजित! सर्वं मे कथितं देव… Read More
दरिद्रता-नाशक तथा धन-सम्पत्ति-दायक स्तोत्र दरिद्रता-नाशक तथा धन-सम्पत्ति-दायक स्तोत्र शाण्डिल्य मुनि ने एक दरिद्र पुत्र की माता से कहा- ‘शिवजी की प्रदोषकाल के अन्तर्गत की गयी पूजा का फल श्रेष्ठ होता है। जो प्रदोषकाल में शिव की पूजा करते हैं, वे इसी जन्म में धन-धान्य, कुल-सम्पत्ति से समृद्ध हो जाते हैं। ब्राह्मणी ! तुम्हारा पुत्र पूर्व-जन्म में ब्राह्मण था। इसने… Read More
शत्रु नाशक प्रमाणिक प्रयोग शत्रु नाशक प्रमाणिक प्रयोग शत्रु-बाधा निवारक ‘दारूण-सप्तक’ जब हिरण्यकश्यप को भगवान् नृसिंह ने अपनी गोद में रखकर अपने खर-तर नखों से उसके उदर को सर्वथा विदीर्ण कर चीर दिया और प्रह्लाद का दुःख दूर हो गया । तदनन्तर श्री भगवान् नृसिंह का वह क्रोध शान्त न हुआ, तब भगवान् विष्णु के आग्रह पर भगवान् रुद्र… Read More
महाकवि श्रीहर्ष और चिन्तामणि मन्त्र महाकवि श्रीहर्ष और चिन्तामणि मन्त्र बात तो है बारहवीं शताब्दी की, किन्तु लगती है कल की जैसी। वैसा प्रखर पाण्डित्य, उतनी गहराएयों के साथ दार्शनिक अनुशीलन की शक्ति, संस्कृत भाषा पर अद्भुत अधिकार, काव्य-निर्माण की अद्वितीय अप्रतिहत प्रतिज्ञा और कारयित्री तथा भावयित्री प्रतिभाओं का अविछिन्न संगम ‘महाकवि’- “श्रीहर्ष” के रोम-रोम में प्रवाहित हो रहा था।… Read More
अर्द्ध-नारीश्वर-चिन्तामणि-मन्त्र-साधना अर्द्ध-नारीश्वर-चिन्तामणि-मन्त्र-साधना भगवान् अर्द्ध-नारीश्वर के “चिन्ता-मणि” नामक मन्त्र की उपासना से सभी प्रकार की सिद्धियाँ मिलती है । इसकी साधना विधि निम्न प्रकार है – विनियोगः- ॐ अस्य अर्द्ध-नारीश्वर-चिन्तामणि-मन्त्रस्य कश्यप ऋषिः, अनुष्टुप छन्दः, अर्द्ध-नारीश्वर देवता, सर्व-कामना-सिद्धयर्थे जपे विनियोगः । ऋष्यादि-न्यासः- शिरसि कश्यप ऋषये नमः, मुखे अनुष्टुप छन्दसे नमः, हृदि अर्द्ध-नारीश्वर देवतायै नमः, अञ्जलौ सर्व-कामना-सिद्धयर्थे जपे विनियोगाय… Read More
रोग एवं अपमृत्यु-निवारक प्रयोग रोग एवं अपमृत्यु-निवारक प्रयोग ।। श्री अमृत-मृत्युञ्जय-मन्त्र प्रयोग ।। किसी प्राचीन शिवालय में जाकर गणेश जी की “ॐ गं गणपतये नमः” मन्त्र से षोडशोपचार पूजन करे । तदनन्तर “ॐ नमः शिवाय” मन्त्र से महा-देव जी की पूजा कर हाथ में जल लेकर विनियोग पढ़े – विनियोगः- ॐ अस्य श्री अमृत-मृत्युञ्जय-मन्त्रस्य श्री कहोल ऋषिः, विराट् छन्दः,… Read More
अमोघ शिव कवच अमोघ शिव कवच भगवान् शङ्कर का नाम लेने से ही प्राणियों के सब दुःख दूर हो जाते हैं, फिर उनकी विधिवत् उपासना करने से क्या नहीं हो सकता ! निश्चय ही भगवान् शिव की पूजा करके लोग अपना सभी प्रकार का हित साधन कर सकते हैं । यहाँ श्रीस्कन्द-पुराण के ब्रह्मोत्तर खण्ड में ‘भद्रायु’ को… Read More
साबर मन्त्रों को सिद्ध कैसे करें ? साबर मन्त्रों को सिद्ध कैसे करें ? ‘साबर’ मन्त्रों की साधना के पूर्व ‘सर्वार्थ-साधक’ मन्त्र को 21 बार जप लेना चाहिए । इसके बाद अपने अभीष्ट मन्त्र की साधना करें । ‘सर्वार्थ-साधक’ मन्त्र का जप करते समय ध्यान रखें कि इसका कोई भी शब्द या वर्ण उच्चारण में अशुद्ध न हो । सर्वार्थ-साधक-मन्त्र- “गुरु सठ… Read More