ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 52 February 7, 2025 | aspundir | Leave a comment ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 52 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ बावनवाँ अध्याय शेष कृतघ्नों के कर्मफलों का विभिन्न मुनियों द्वारा प्रतिपादन पार्वती ने पूछा — प्रभो ! अन्य कृतघ्नों को जिस-जिस फल की प्राप्ति होती है, उसके विषय में उन वेद-वेदाङ्ग के पारंगत विद्वानों ने क्या कहा ? श्रीमहेश्वर… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 51 February 7, 2025 | aspundir | Leave a comment ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 51 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ इक्यावनवाँ अध्याय ऋषियों द्वारा ब्राह्मण को क्षमा के लिये प्रेरित करते हुए कृतघ्नों के भेद तथा विभिन्न पापों के फल का प्रतिपादन पार्वती ने पूछा — प्रभो ! ब्राह्मणों और ब्रह्माजी के पुत्रों ने, जो नीति के विद्वान् थे,… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 50 February 7, 2025 | aspundir | Leave a comment ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 50 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ पचासवाँ अध्याय राजा सुयज्ञ की यज्ञशीलता और उन्हें ब्राह्मण के शाप की प्राप्ति पार्वती ने पूछा — प्रभो ! राजा सुयज्ञ कौन थे? किस वंश में उनका जन्म हुआ था ? उन्हें ब्राह्मण का शाप कैसे प्राप्त हुआ था… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 49 February 6, 2025 | aspundir | Leave a comment ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 49 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ उनचासवाँ अध्याय श्रीराधा और श्रीकृष्ण के चरित्र तथा श्रीराधा की पूजा-परम्परा का अत्यन्त संक्षिप्त परिचय श्रीमहादेवजी कहते हैं — पार्वति ! एक समय की बात है, श्रीकृष्ण विरजा नाम वाली सखी के यहाँ उसके पास थे। इससे श्रीराधाजी को… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 48 February 6, 2025 | aspundir | Leave a comment ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 48 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ अड़तालीसवाँ अध्याय नारद-नारायण-संवाद में पार्वतीजी के पूछने पर महादेवजी के द्वारा श्रीराधा के प्रादुर्भाव एवं महत्त्व आदि का वर्णन नारदजी बोले — भगवान् नारायण के ध्यान में तत्पर रहनेवाले महाभाग मुनिवर नारायण ! आप नारायण के ही अंश हैं।… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 47 February 6, 2025 | aspundir | Leave a comment ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 47 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ सैंतालीसवाँ अध्याय आदि-गौ सुरभीदेवी का उपाख्यान नारदजी ने पूछा — ब्रह्मन् ! वह सुरभीदेवी कौन थी, जो गोलोक से आयी थी ? मैं उसके जन्म और चरित्र सुनना चाहता हूँ । भगवान् नारायण बोले — नारद! देवी सुरभी गोलोक… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 46 February 6, 2025 | aspundir | Leave a comment ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 46 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ छियालीसवाँ अध्याय मनसा देवी के स्तोत्र आदि नारायण बोले — मुनिवर ! अब मैं देवी मनसा की पूजा का विधान तथा सामवेदोक्त ध्यान बतलाता हूँ, सुनो। श्वेतचम्पकवर्णाभां रत्नभूषणभूषिताम् । वह्निशुद्धांशुकाधानां नागयज्ञोपवीतिनीम् ॥ २ ॥ महाज्ञानयुतां चैव प्रवरां ज्ञानिनां सताम्… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 45 February 6, 2025 | aspundir | Leave a comment ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 45 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ पैंतालीसवाँ अध्याय मनसा देवी का उपाख्यान भगवान् नारायण कहते हैं — नारद! आगमों के अनुसार देवी षष्ठी और मङ्गलचण्डिका का उपाख्यान कह चुका । अब मनसादेवी का चरित्र, जो धर्म के मुख से मैं सुन चुका हूँ, तुमसे कहता… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 44 February 5, 2025 | aspundir | Leave a comment ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 44 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ चौवालीसवाँ अध्याय भगवती मङ्गलचण्डी का उपाख्यान भगवान् नारायण कहते हैं — ब्रह्मपुत्र नारद ! आगम शास्त्र के अनुसार षष्ठीदेवी का चरित्र कह दिया। अब भगवती मङ्गलचण्डी का उपाख्यान सुनो, साथ ही उनकी पूजा का विधान भी । इसे मैंने… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 43 February 5, 2025 | aspundir | Leave a comment ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 43 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ तैंतालीसवाँ अध्याय देवी षष्ठी के ध्यान, पूजन, स्तोत्र तथा विशद महिमा का वर्णन नारदजी ने कहा — प्रभो ! भगवती ‘षष्ठी’, मङ्गलचण्डिका तथा देवी मनसा — ये देवियाँ मूलप्रकृति की कला मानी गयी हैं। मैं अब इनके प्राकट्य का… Read More