ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 32 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ बत्तीसवाँ अध्याय पञ्चदेवोपासकों के नरक में न जाने का कथन सावित्री ने कहा — महाभाग धर्मराज ! आप वेद एवं वेदाङ्ग के पारगामी विद्वान् हैं। जो सबका सारभूत, अभीष्ट, सर्व-सम्मत, कर्म का उच्छेद करने में कारणभूत, परम श्रेष्ठ, मनुष्यों… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 31 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ इकतीसवाँ अध्याय नरक-कुण्डों और उनमें जाने वाले पापियों तथा पापों का वर्णन यम बोले — साध्वि ! जो द्विज पुंश्चली और वेश्या का अन्न खाता तथा उसके साथ गमन करता है, वह मरने के पश्चात् कालसूत्र नामक नरक में… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 30 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ तीसवाँ अध्याय नरक-कुण्डों और उनमें जाने वाले पापियों तथा पापों का वर्णन धर्मराज ने कहा — साध्वि ! भगवान् श्रीहरि की सेवामें संलग्न रहने वाले पुण्यात्मा, योगी, सिद्ध, व्रती, तपस्वी और ब्रह्मचारी पुरुष नरक में नहीं जाते, यह ध्रुव… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 29 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ उनतीसवाँ अध्याय नरक-कुण्डों और उनमें जाने वाले पापियों तथा पापों का वर्णन भगवान् नारायण कहते हैं — नारद! रविनन्दन धर्मराज ने सावित्री को विधिपूर्वक विष्णु का महामन्त्र देकर ‘अशुभकर्म का विपाक’ कहना आरम्भ किया। धर्मराज ने कहा- —पतिव्रते !… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 28 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ अट्ठाइसवाँ अध्याय सावित्री-धर्मराज के प्रश्नोत्तर तथा सावित्री के द्वारा धर्मराज को प्रणाम-निवेदन भगवान् नारायण कहते हैं — नारद! धर्मराज के मुख से उपर्युक्त वर्णन सुनकर सावित्री की आँखों में आनन्द के आँसू छलक पड़े। उसका शरीर पुलकायमान हो गया।… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 27 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ सताईसवाँ अध्याय सावित्री – धर्मराज के प्रश्नोत्तर सावित्री ने कहा — धर्मराज! जिस कर्म के प्रभाव से पुण्यात्मा मनुष्य स्वर्ग अथवा अन्य लोक में जाते हैं, वह मुझे बताने की कृपा करें । धर्मराज बोले — पतिव्रते ! ब्राह्मण… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 26 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ छब्बीसवाँ अध्याय सावित्री – धर्मराज के प्रश्नोत्तर, सावित्री को वरदान भगवान् नारायण कहते हैं — नारद! सावित्री के वचन सुनकर यमराज के मन में बड़ा आश्चर्य हुआ। वे हँसकर प्राणियों के कर्म विपाक कहने के लिये उद्यत हो गये… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 25 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ पच्चीसवाँ अध्याय सावित्री और यमराज का संवाद भगवान् नारायण कहते हैं — मुने! पतिव्रता सावित्री ने यमराज की बात सुनकर परम भक्ति के साथ उनका स्तवन किया; फिर वह उनसे पूछने लगी । सावित्री ने पूछा — भगवन्! कौन… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 24 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ चौबीसवाँ अध्याय राजा अश्वपति द्वारा सावित्री की उपासना तथा फलस्वरूप सावित्री नामक कन्या की उत्पत्ति, सत्यवान् ‌के साथ सावित्री का विवाह, सत्यवान् की मृत्यु, सावित्री और यमराज का संवाद भगवान् नारायण कहते हैं — नारद! जब राजा अश्वपति ने… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 23 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ तेईसवाँ अध्याय सावित्री देवी की पूजा-स्तुति का विधान नारदजी ने कहा — भगवन् ! अमृत की तुलना करने वाली तुलसी की कथा मैं सुन चुका। अब आप सावित्री का उपाख्यान कहने की कृपा करें । देवी सावित्री वेदों की… Read More