ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 12 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ बारहवाँ अध्याय गङ्गा का प्रकट होना, देवताओं के प्रति श्रीकृष्ण का आदेश तथा गङ्गा के विष्णुपत्नी होने का प्रसङ्ग नारद ने कहा — भगवन्! लक्ष्मी, सरस्वती, गङ्गा और जगत्‌ को पावन बनाने वाली तुलसी — ये चारों देवियाँ भगवान्… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 11 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ ग्यारहवाँ अध्याय श्रीराधाजी का गङ्गा पर रोष, श्रीकृष्ण के प्रति राधा का उपालम्भ, श्रीराधा के भय से गङ्गा का श्रीकृष्ण के चरणों में छिप जाना, जलाभाव से पीड़ित देवताओं का गोलोक में जाना, ब्रह्माजी की स्तुति से राधा का… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 10 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ दसवाँ अध्याय गङ्गा की उत्पत्ति का विस्तृत प्रसङ्ग नारदजी ने कहा — वेदवेत्ताओं में श्रेष्ठ भगवन्! पृथ्वी का यह परम मनोहर उपाख्यान सुन चुका । अब आप गङ्गा का विशद प्रसङ्ग सुनाने की कृपा कीजिये। प्रभो! सुरेश्वरी, विष्णुस्वरूपा एवं… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 09 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ नौवाँ अध्याय पृथ्वी के प्रति शास्त्र विपरीत व्यवहार करने पर नरकों की प्राप्ति का वर्णन नारदजी बोले — भगवन्! पृथ्वी का दान करने से जो पुण्य तथा उसे छीनने, दूसरे की भूमि का हरण करने, अम्बुवाची में पृथ्वी का… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 08 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ आठवाँ अध्याय पृथ्वी की उत्पत्ति का प्रसङ्ग, ध्यान और पूजन का प्रकार तथा स्तुति नारदजी ने कहा — भगवन् ! आपने बतलाया है कि श्रीकृष्ण के निमेषमात्र में ब्रह्मा की आयु पूरी हो जाती है। उन का सत्ता-शून्य हो… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 07 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ सातवाँ अध्याय कलियुग के भावी चरित्र का, कालमान का तथा गोलोक की श्रीकृष्ण-लीला का वर्णन भगवान् नारायण कहते हैं — नारद ! तदनन्तर सरस्वती अपनी एक कला से तो पुण्यक्षेत्र भारतवर्ष में पधारीं तथा पूर्ण अंश से उन्हें भगवान्… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 06 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ छठा अध्याय विष्णुपत्नी लक्ष्मी, सरस्वती एवं गङ्गा का परस्पर शापवश भारतवर्ष में पधारना भगवान् नारायण कहते हैं —  नारद! वे भगवती सरस्वती स्वयं वैकुण्ठ में भगवान् श्रीहरि के पास रहती हैं। पारस्परिक कलह के कारण गङ्गा ने इन्हें शाप… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 05 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ पाँचवाँ अध्याय याज्ञवल्क्य द्वारा भगवती सरस्वती की स्तुति [ ऋषिप्रवर ] भगवान् नारायण कहते हैं — नारद! सरस्वती देवीका स्तोत्र सुनो, जिससे सम्पूर्ण मनोरथ सिद्ध हो जाते हैं । प्राचीन समय की बात है — याज्ञवल्क्य नाम से प्रसिद्ध… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 04 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ चौथा अध्याय सरस्वती की पूजा का विधान तथा कवच नारदजी ने कहा — भगवन्! आपके कृपा-प्रसाद से यह अमृतमयी सम्पूर्ण कथा मुझे सुनने को मिली है। अब आप इन प्रकृति-संज्ञक देवियों के पूजन का प्रसंग विस्तार के साथ बताने… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 03 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ तीसरा अध्याय परिपूर्णतम श्रीकृष्ण और चिन्मयी श्रीराधा से प्रकट विराट्स्वरूप बालक का वर्णन भगवान् नारायण कहते हैं — नारद ! तदनन्तर वह बालक जो केवल अण्डाकार था, ब्रह्माकी आयुपर्यन्त ब्रह्माण्ड-गोलक के जल में रहा। फिर समय पूरा हो जाने… Read More