ब्रह्मवैवर्तपुराण – ब्रह्मखण्ड – अध्याय 22 January 16, 2025 | aspundir | Leave a comment ब्रह्मवैवर्तपुराण – ब्रह्मखण्ड – अध्याय 22 ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः बाईसवाँ अध्याय ब्रह्मा जी के पुत्रों के नामों की व्युत्पत्ति सौति कहते हैं — शौनक जी! तदनन्तर कुछ कल्प व्यतीत होने पर जब ब्रह्मा जी पुनः सृष्टि-कार्य में संलग्न हुए, तब उनके ‘नरद’ नामक कण्ठ देश से मरीचि आदि मुनियों के साथ वे… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण – ब्रह्मखण्ड – अध्याय 21 January 15, 2025 | aspundir | Leave a comment ब्रह्मवैवर्तपुराण – ब्रह्मखण्ड – अध्याय 21 ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः इक्कीसवाँ अध्याय शूद्रयोनि में उत्पन्न बालक नारद की जीवनचर्या, नाम की व्युत्पत्ति, उसके द्वारा संतों की सेवा, सनत्कुमार द्वारा उसे उपदेश की प्राप्ति, उसके द्वारा श्रीहरि के स्वरूप का ध्यान, आकाशवाणी तथा उस बालक के देह-त्याग का वर्णन सौति कहते हैं — शौनक… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण – ब्रह्मखण्ड – अध्याय 20 January 14, 2025 | aspundir | Leave a comment ब्रह्मवैवर्तपुराण – ब्रह्मखण्ड – अध्याय 20 ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः बीसवाँ अध्याय गोपपत्नी कलावती के गर्भ से एक शिशु के रूप में उपबर्हण का जन्म, शूद्रयोनि में उत्पन्न बालक नारद का वर्णन सौति कहते हैं — उपबर्हण गन्धर्व अपनी पत्नी मालावती के साथ तथा अन्य पत्नियों के साथ भी निर्जन वन में आनन्दपूर्वक… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण – ब्रह्मखण्ड – अध्याय 19 January 13, 2025 | aspundir | Leave a comment ब्रह्मवैवर्तपुराण – ब्रह्मखण्ड – अध्याय 19 ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः उनीसवाँ अध्याय ब्रह्माण्ड पावन नामक कृष्ण कवच, संसार पावन नामक शिव कवच और शिवस्तवराज का वर्णन तथा इन सबकी महिमा सौति कहते हैं — मालावती ब्राह्मणों को धन देकर बहुत प्रसन्न हुई। उसने स्वामी की सेवा के लिये नाना प्रकार अपना श्रृंगार किया।… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण – ब्रह्मखण्ड – अध्याय 18 January 12, 2025 | aspundir | Leave a comment ब्रह्मवैवर्तपुराण – ब्रह्मखण्ड – अध्याय 18 ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः अठारहवाँ अध्याय ब्रह्मा आदि देवताओं द्वारा उपबर्हण को जीवित करने की चेष्टा, मालावती द्वारा भगवान् श्रीकृष्ण का स्तवन, शक्ति सहित भगवान् का गन्धर्व के शरीर में प्रवेश तथा गन्धर्व का जी उठना, मालावती द्वारा दान एवं मंगलाचार तथा पूर्वोक्त स्तोत्र के पाठ की… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण – ब्रह्मखण्ड – अध्याय 17 January 10, 2025 | aspundir | Leave a comment ब्रह्मवैवर्तपुराण – ब्रह्मखण्ड – अध्याय 17 ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः सत्रहवां अध्याय ब्राह्मण-बालक के साथ क्रमशः ब्रह्मा, महादेवजी तथा धर्म की बातचीत, देवताओं द्वारा श्रीविष्णु की तथा ब्राह्मण द्वारा भगवान् श्रीकृष्ण की उत्कृष्ट महत्ता का प्रतिपादन सौति कहते हैं — ब्राह्मण को आया देख देव समुदाय उठकर खड़ा हो गया। फिर वहाँ सभा… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण – ब्रह्मखण्ड – अध्याय 16 January 9, 2025 | aspundir | Leave a comment ब्रह्मवैवर्तपुराण – ब्रह्मखण्ड – अध्याय 16 ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः सोलहवाँ अध्याय मालावती के पूछने पर ब्राह्मण द्वारा वैद्यकसंहिता का वर्णन, आयुर्वेद की आचार्य परम्परा, उसके सोलह प्रमुख विद्वानों तथा उनके द्वारा रचित तन्त्रों का नाम-निर्देश, ज्वर आदि चौंसठ रोग, उनके हेतुभूत वात, पित्त, कफ की उत्पत्ति के कारण और उनके निवारण के… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण – ब्रह्मखण्ड – अध्याय 15 January 8, 2025 | aspundir | Leave a comment ब्रह्मवैवर्तपुराण – ब्रह्मखण्ड – अध्याय 15 ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः पन्द्रहवाँ अध्याय ब्राह्मण द्वारा अपनी शक्ति का परिचय, मृतक को जीवित करने का आश्वासन, मालावती का पति के महत्त्व को बताना और काल, यम, मृत्युकन्या आदि को ब्राह्मण द्वारा बुलवाकर उनसे बात करना, यम आदि का अपने को ईश्वर की आज्ञा का पालक… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण – ब्रह्मखण्ड – अध्याय 14 January 7, 2025 | aspundir | Leave a comment ब्रह्मवैवर्तपुराण – ब्रह्मखण्ड – अध्याय 14 ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः चौदहवाँ अध्याय ब्राह्मण-बालक रूपधारी विष्णु का मालावती के साथ संवाद, ब्राह्मण के पूछने पर मालावती का अपने दुःख और इच्छा को व्यक्त करना तथा ब्राह्मण का कर्मफल के विवेचनपूर्वक विभिन्न देवताओं की आराधना से प्राप्त होने वाले फल का वर्णन करना, श्रीकृष्ण एवं… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण – ब्रह्मखण्ड – अध्याय 13 January 4, 2025 | vadicjagat | Leave a comment ब्रह्मवैवर्तपुराण – ब्रह्मखण्ड – अध्याय 13 ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः तेरहवाँ अध्याय ब्रह्मा जी के शाप से उपबर्हण का योगधारण द्वारा अपने शरीर को त्याग देना, मालावती का विलाप एवं प्रार्थना करना, देवताओं को शाप देने के लिये उद्यत होना, आकाशवाणी द्वारा भगवान् का आश्वासन पाकर देवताओं का कौशिकी के तट पर मालावती… Read More