ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 22 January 31, 2025 | aspundir | Leave a comment ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 22 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ बाईसवाँ अध्याय तुलसी पूजन, ध्यान, नामाष्टक तथा तुलसी-स्तवन का वर्णन नारदजी ने पूछा — प्रभो! तुलसी भगवान् नारायण की प्रिया हैं, इसलिये परम पवित्र हैं । अतएव वे सम्पूर्ण जगत् के लिये पूजनीया हैं; परंतु इनकी पूजा का क्या… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 21 January 30, 2025 | aspundir | Leave a comment ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 21 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ इक्कीसवाँ अध्याय शङ्खचूड़-वेषधारी श्रीहरि द्वारा तुलसी का पातिव्रत्य भङ्ग, शङ्खचूड़ का पुनः गोलोक जाना, तुलसी और श्रीहरि का वृक्ष एवं शालग्राम-पाषाण के रूप में भारतवर्ष में रहना तथा तुलसी महिमा, शालग्राम के विभिन्न लक्षण तथा महत्त्व का वर्णन नारदजी… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 20 January 30, 2025 | aspundir | Leave a comment ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 20 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ बीसवाँ अध्याय भगवान् शंकर और शङ्खचूड़ का युद्ध, शंकर के त्रिशूल से शङ्खचूड़ का भस्म होना तथा सुदामा गोप के स्वरूप में उसका विमान द्वारा गोलोक पधारना भगवान् नारायण कहते हैं — नारद! भगवान् शिव तत्त्व जानने में परम… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 19 January 30, 2025 | aspundir | Leave a comment ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 19 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ उन्नीसवाँ अध्याय भगवान् शंकर और शङ्खचूड़ के पक्षों में युद्ध, भद्रकाली का घोर युद्ध और आकाशवाणी ‘सुनकर काली का ‘शङ्खचूड़ पर पाशुपतास्त्र न चलाना भगवान् नारायण कहते हैं — मुने! प्रतापी दानवराज शङ्खचूड़ सिर झुका भगवान् शिव को प्रणाम… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 18 January 29, 2025 | aspundir | Leave a comment ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 18 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ अठारहवाँ अध्याय शङ्खचूड़का पुष्पभद्रा नदीके तटपर जाना, वहाँ भगवान् शंकरके दर्शन तथा उनसे विशद वार्तालाप भगवान् नारायण कहते हैं — नारद! राजा शङ्खचूड़ श्रीकृष्ण का भक्त था। वह मन में भगवान् श्रीकृष्ण का ध्यान करके ब्राह्ममुहूर्त में ही अपनी… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 17 January 29, 2025 | aspundir | Leave a comment ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 17 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ सत्रहवाँ अध्याय पुष्पदन्त का दूत बनकर शङ्खचूड़ के पास जाना और शङ्खचूड़ के द्वारा तुलसी के प्रति ज्ञानोपदेश भगवान् नारायण कहते हैं — नारद! तदनन्तर ब्रह्मा दानव के संहार कार्य में शंकर को नियुक्त करके स्वयं उसी क्षण अपने… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 16 January 29, 2025 | aspundir | Leave a comment ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 16 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ सोलहवाँ अध्याय तुलसी को स्वप्न में शङ्खचूड़ के दर्शन, शङ्खचूड़ तथा तुलसी के विवाह के लिये ब्रह्माजी का दोनों को आदेश, तुलसी के साथ शङ्खचूड़ का गान्धर्व-विवाह तथा देवताओं के प्रति उसके पूर्वजन्म का स्पष्टीकरण भगवान् नारायण कहते हैं… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 15 January 28, 2025 | aspundir | Leave a comment ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 15 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ पन्द्रहवाँ अध्याय भगवती तुलसी के प्रादुर्भाव का प्रसङ्ग भगवान् नारायण कहते हैं — नारद ! धर्मध्वज की पत्नी का नाम माधवी था। वह राजा के साथ गन्धमादन पर्वत पर सुन्दर उपवन में आनन्द करती थी । यों दीर्घकाल बीत… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 14 January 28, 2025 | aspundir | Leave a comment ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 14 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ चौदहवाँ अध्याय वेदवती की कथा, इसी प्रसङ्ग में भगवान् राम के चरित्र का एक अंश-कथन, भगवती सीता तथा द्रौपदी के पूर्वजन्म का वृत्तान्त भगवान् नारायण कहते हैं — मुने ! धर्मध्वज और कुशध्वज — इन दोनों नरेशों ने कठिन… Read More
ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 13 January 28, 2025 | aspundir | Leave a comment ब्रह्मवैवर्तपुराण – प्रकृतिखण्ड – अध्याय 13 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ तेरहवाँ अध्याय तुलसी के कथा-प्रसङ्ग में राजा वृषध्वज का चरित्र – वर्णन नारदजी ने पूछा — प्रभो ! साध्वी तुलसी भगवान् श्रीहरि की पत्नी कैसे बनी ? इसका जन्म कहाँ हुआ था और पूर्वजन्म में यह कौन थी ?… Read More