शिवमहापुराण — कैलाससंहिता — अध्याय 11 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कैलाससंहिता ग्यारहवाँ अध्याय भगवान् कार्तिकेयसे वामदेवमुनिकी प्रणवजिज्ञासा ऋषिगण बोले- हे सूतजी ! हे महाभाग ! आप हमलोगोंके श्रेष्ठ गुरु हैं, आपकी [हम सबपर बड़ी] कृपा है, इसीलिये हमलोग आपसे पूछ रहे हैं । आप – जैसे गुरु श्रद्धालु शिष्योंके प्रति… Read More


शिवमहापुराण — कैलाससंहिता — अध्याय 10 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कैलाससंहिता दसवाँ अध्याय सूतजीका काशीमें आगमन व्यासजी बोले – हे मुनीश्वर ! सूतजीके चले जानेपर मुनिगण बहुत ही आश्चर्यचकित हुए और आपसमें विचार करके कहने लगे कि वामदेवका मत जिसे सूतजीने कहा था और जो बहुत कठिन है, उसे तो… Read More


शिवमहापुराण — कैलाससंहिता — अध्याय 09 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कैलाससंहिता नौवाँ अध्याय प्रणवोपासनाकी विधि ईश्वर बोले- परमात्मा शिवजीके मुख्य नाम हैं – शिव, महेश्वर, रुद्र, विष्णु, पितामह, संसारवैद्य, सर्वज्ञ और परमात्मा। ये आठ नाम शिवजीके प्रतिपादक हैं, इनमें आदिसे पितामहपर्यन्त पाँच नामोंमें शान्त्यतीतादि पाँच उपाधियोंके ग्रहणक्रमसे शिवादि संज्ञाएँ ग्रहण… Read More


शिवमहापुराण — कैलाससंहिता — अध्याय 08 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कैलाससंहिता आठवाँ अध्याय आवरणपूजा-विधि-वर्णन ईश्वर बोले – हे महादेवि ! मेरी पूजाके पाँच आवरण हैं। अतः क्रमके अनुसार पाँचों आवरणोंकी पूजा करनी चाहिये । जहाँसे दोनोंकी पूजा की गयी है, उसी क्रमसे बुद्धिमान् पुरुष गणेश एवं कार्तिकेयका गन्धादिसे पूजन करे… Read More


शिवमहापुराण — कैलाससंहिता — अध्याय 07 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कैलाससंहिता सातवाँ अध्याय शिवजीके विविध ध्यानों तथा पूजा – विधिका वर्णन ईश्वर बोले— साधकको अपनी बायीं ओर चौकोर मण्डलका निर्माण करना चाहिये । उस मण्डलकी प्रणवके द्वारा पूजाकर अस्त्रमन्त्रसे शोधितकर आधारसहित शंख स्थापित करे । इस प्रकार मण्डलमें स्थित शंखका… Read More


शिवमहापुराण — कैलाससंहिता — अध्याय 06 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कैलाससंहिता छठा अध्याय पूजाके अंगभूत न्यासादि कर्म ईश्वर बोले- मण्डलके दक्षिणमें मनोहर व्याघ्रचर्म बिछाकर अस्त्र-मन्त्रके द्वारा शुद्ध जलसे उसका प्रोक्षण करे। पहले प्रणवका उद्धार करके बादमें आधारका उद्धार करे । उसके अनन्तर शक्तिकमलका उद्धार करे । इन सबमें चतुर्थी विभक्ति… Read More


शिवमहापुराण — कैलाससंहिता — अध्याय 05 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कैलाससंहिता पाँचवाँ अध्याय संन्यासदीक्षाहेतु मण्डलनिर्माणकी विधि ईश्वर बोले- भूमिके गन्ध, वर्ण, रस आदिकी भलीभाँति परीक्षाकर वहाँ अपने मनके अनुकूल स्थानपर वस्त्रका विशाल चँदोवा लगाकर दर्पणतलके तुल्य [सम तथा स्निग्ध] पृथ्वीतलपर दो हाथ प्रमाणके चौकोर मण्डलका निर्माण करे ॥ १-२ ॥… Read More


शिवमहापुराण — कैलाससंहिता — अध्याय 04 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कैलाससंहिता चौथा अध्याय संन्यासदीक्षासे पूर्वकी आह्निकविधि शिवजी बोले- हे महादेवि ! अब मैं आपके ऊपर स्नेहके कारण सम्प्रदायोंके अनुसार संन्यास लेनेसे पूर्व आह्निक कर्मका वर्णन करूँगा ॥ १ ॥ हे महादेवि! ब्राह्ममुहूर्तमें उठकर यति अपने सिरमें सहस्र दलवाले श्वेत कमलपर… Read More


शिवमहापुराण — कैलाससंहिता — अध्याय 03 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कैलाससंहिता तीसरा अध्याय प्रणवमीमांसा तथा संन्यासविधिवर्णन ईश्वर बोले – हे देवि ! आप मुझसे जो पूछ रही हैं, उसे मैं आपसे कह रहा हूँ, सुनिये; उसके सुननेमात्रसे जीव साक्षात् शिव हो जाता है ॥ १ ॥ प्रणवके अर्थको जान लेना… Read More


शिवमहापुराण — कैलाससंहिता — अध्याय 02 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कैलाससंहिता दूसरा अध्याय भगवान् शिवसे पार्वतीजीकी प्रणवविषयक जिज्ञासा व्यासजी बोले- हे ब्राह्मणो ! परम सौभाग्यशाली आपलोगोंने यह बहुत अच्छी बात पूछी है; क्योंकि प्रणवार्थको प्रकाशित करनेवाला शिवज्ञान [सर्वथा ] दुर्लभ है ॥ १ ॥ त्रिशूल नामक उत्तम आयुध धारण करनेवाले… Read More