शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 42 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता बयालीसवाँ अध्याय ‘सप्त व्याध’ सम्बन्धी श्लोक सुनकर राजा ब्रह्मदत्त और उनके मन्त्रियोंको पूर्वजन्मका स्मरण होना और योगका आश्रय लेकर उनका मुक्त होना भीष्मजी बोले- हे मार्कण्डेयजी ! हे महाप्राज्ञ ! हे पितृभक्तोंमें श्रेष्ठ! हे मुनिश्रेष्ठ ! इसके अनन्तर क्या… Read More


शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 41 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता इकतालीसवाँ अध्याय पितरोंकी महिमाके वर्णनक्रममें सप्त व्याधोंके आख्यानका प्रारम्भ सनत्कुमारजी बोले – हे तपस्वियोंमें श्रेष्ठ ! स्वर्गमें सात पितृगण कहे गये हैं, जिनमें चार मूर्तिमान् हैं एवं तीन अमूर्त हैं। वे पितर पूर्व से ही योगबलके द्वारा सोमको तृप्त… Read More


शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 40 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता चालीसवाँ अध्याय पितृश्राद्धका प्रभाव – वर्णन व्यासजी बोले – श्राद्धदेव सूर्यके वंशके वर्णनको सुनकर मुनिश्रेष्ठ शौनकने सूतजीसे आदरपूर्वक पूछा ॥ १ ॥ शौनकजी बोले- हे सूतजी ! हे चिरंजीव ! हे व्यासशिष्य ! आपको नमस्कार है, आपने परम दिव्य… Read More


शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 39 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता उनतालीसवाँ अध्याय सगरकी दोनों पत्नियोंके वंशविस्तारवर्णनपूर्वक वैवस्वतवंशमें उत्पन्न राजाओंका वर्णन शौनक बोले- हे सूतजी ! सगरके साठ हजार महाबली पुत्र किस प्रकार उत्पन्न हुए और उन्होंने किस प्रकार अपना पराक्रम प्रदर्शित किया, वह सब कहिये ॥ १ ॥ सूतजी… Read More


शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 38 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता अड़तीसवाँ अध्याय सत्यव्रत – त्रिशंकु – सगर आदिके जन्मके निरूपणपूर्वक उनके चरित्रका वर्णन सूतजी बोले- तदनन्तर सत्यव्रत उनकी सेवाके उद्देश्यसे तथा कृपासे और अपनी प्रतिज्ञासे विश्वामित्रकी पत्नीका [भरण-] पोषण करने लगा ॥ १ ॥ हे मुने! वह मृग, वाराह,… Read More


शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 37 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता सैंतीसवाँ अध्याय इक्ष्वाकु आदि मनुवंशीय राजाओंका वर्णन सूतजी बोले-  पूर्व समयमें [छींकते समय ] मनुकी नासिकासे इक्ष्वाकु नामक पुत्रका जन्म हुआ । उन इक्ष्वाकुके विपुल दक्षिणा देनेवाले सौ पुत्र हुए ॥ १ ॥ हे द्विजो ! उनके बाद इस… Read More


शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 36 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता छत्तीसवाँ अध्याय वैवस्वतमनुके नौ पुत्रोंके वंशका वर्णन सूतजी बोले – [ हे महर्षियो !] बादमें वैवस्वत मनुके नौ पुत्र उत्पन्न हुए, जो उन्हींके समान विशालकाय, धैर्यशाली एवं क्षत्रिय धर्ममें तत्पर थे ॥ १ ॥ [वे मनु पुत्र] इक्ष्वाकु, शिबि,… Read More


शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 35 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता पैंतीसवाँ अध्याय विवस्वान् एवं संज्ञाका वृत्तान्तवर्णनपूर्वक अश्विनीकुमारोंकी उत्पत्तिका वर्णन सूतजी बोले- महर्षि कश्यपसे दक्षपुत्री [ अदिति]- में विवस्वान् उत्पन्न हुए; उनकी पत्नी त्वष्टापुत्री देवी संज्ञा हुईं, जो सुरेणुका नामसे भी विख्यात हैं ॥ १ ॥ रूप-यौवनसे समन्वित वह [संज्ञा]… Read More


शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 34 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता चौंतीसवाँ अध्याय चतुर्दश मन्वन्तरोंका वर्णन शौनक बोले – हे सूत ! आप सभी मन्वन्तरोंका विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिये, अबतक जितने भी मनु हुए हैं, उनका वर्णन मैं सुनना चाहता हूँ ॥ १ ॥ सूतजी बोले- स्वायम्भुव, स्वारोचिष, उत्तम, तामस, रैवत,… Read More


शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 33 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता तैंतीसवाँ अध्याय मरुतोंकी उत्पत्ति, भूतसर्गका कथन तथा उनके राजाओंका निर्धारण सूतजी बोले- हे तात! यह सर्ग स्वारोचिष मन्वन्तरमें कहा गया है, वैवस्वत मन्वन्तरमें जब महान् वारुण यज्ञका विस्तार हुआ, उस समय ब्रह्मदेवद्वारा हवन करते समय जो सृष्टि हुई, उसका… Read More