शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 22 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता बाईसवाँ अध्याय देहकी उत्पत्तिका वर्णन व्यासजी बोले- हे मुनीश्वर ! हे तात! रागनिवृत्तिके लिये इस समय विधिपूर्वक जीवके जन्म तथा गर्भमें उसकी स्थितिका वर्णन कीजिये ॥ १ ॥ सनत्कुमार बोले – हे व्यास ! अब मैं संक्षेपमें सम्पूर्ण शास्त्रोंके… Read More


शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 21 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता इक्कीसवाँ अध्याय कर्मानुसार जन्मका वर्णनकर क्षत्रियके लिये संग्रामके फलका निरूपण व्यासजी बोले- स्वभावतः ब्राह्मणत्वकी प्राप्ति बहुत कठिन है । ईश्वरके मुखसे ब्राह्मण, भुजाओंसे क्षत्रिय और जंघासे वैश्य उत्पन्न हुए हैं, उनके चरणोंसे शूद्र उत्पन्न हुआ है-ऐसी बात उनके मुखसे… Read More


शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 20 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता बीसवाँ अध्याय तपस्यासे शिवलोककी प्राप्ति, सात्त्विक आदि तपस्याके भेद, मानवजन्मकी प्रशस्तिका कथन व्यासजी बोले – हे सर्वज्ञ ! सनत्कुमार! हे सत्तम ! अब आप उस [ शिवलोक ] – की प्राप्तिका वर्णन करें, जहाँ जाकर शिवभक्त मनुष्य फिर नहीं… Read More


शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 19 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता उन्नीसवाँ अध्याय सूर्यादि ग्रहों की स्थितिका निरूपण करके जन आदि लोकोंका वर्णन सनत्कुमार बोले— [हे व्यासजी !] जहाँतक सूर्य एवं चन्द्रमाकी किरणें प्रकाश करती हैं, वहाँतक पृथ्वी है, उसीको भूलोक कहा जाता है ॥ १ ॥ पृथ्वीसे एक लाख… Read More


शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 18 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता अठारहवाँ अध्याय भारतवर्ष तथा प्लक्ष आदि छः द्वीपोंका वर्णन सनत्कुमार बोले— [ हे व्यास!] अब मैं हिमालयके दक्षिण तथा समुद्रके उत्तर भागमें स्थित भारतवर्षका वर्णन करूँगा, जहाँ भारती सृष्टि है ॥ १ ॥ हे महामुने ! इसका विस्तार नौ… Read More


शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 17 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता सत्रहवाँ अध्याय ब्रह्माण्डके वर्णन-प्रसंगमें जम्बूद्वीपका निरूपण सनत्कुमार बोले – हे पराशरपुत्र [ व्यासजी ! ] आप सातों द्वीपोंसे समन्वित भूमण्डलका संक्षेपमें वर्णन करते हुए मुझसे भलीभाँति सुनिये ॥ १ ॥ भूमण्डलमें जम्बूद्वीप, प्लक्षद्वीप, शाल्मलिद्वीप, कुशद्वीप, क्रौंचद्वीप, शाकद्वीप और सातवाँ… Read More


शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 16 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता सोलहवाँ अध्याय विभिन्न पापकर्मोंसे प्राप्त होनेवाले नरकोंका वर्णन और शिव – नाम – स्मरणकी महिमा सनत्कुमार बोले – हे मुनिश्रेष्ठ ! उन लोकोंके ऊपर स्थित नरकोंको मुझसे सुनिये, जहाँपर पापीजन दुःख भोगते हैं ॥ १ ॥ रौरव, शूकर, रोध,… Read More


शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 15 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता पन्द्रहवाँ अध्याय ब्रह्माण्डदानकी महिमाके प्रसंगमें पाताललोकका निरूपण व्यासजी बोले – हे सनत्कुमारजी ! जिस एक ही दानके करनेसे सभी दानोंका फल मिल जाता है, मनुष्योंके हितके लिये उस दानको आप मुझसे कहें ॥ १ ॥ सनत्कुमार बोले – समयपर… Read More


शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 14 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता चौदहवाँ अध्याय दानमाहात्म्य तथा दानके भेदका वर्णन सनत्कुमार बोले – हे व्यासजी ! जो घोरदान तथा महादान कहे गये हैं, उन्हें सदा सत्पात्रको ही देना चाहिये, ये आत्माका उद्धार करते हैं ॥ १ ॥ हे द्विजोत्तम! सुवर्णदान, गोदान, भूमिदान… Read More


शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 13 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता तेरहवाँ अध्याय पुराणमाहात्म्यनिरूपण सनत्कुमार बोले— हे मुने ! जो वनके कन्द-मूल एवं फल खाकर अरण्यमें तपस्या करता है और जो वेदकी एक ऋचामात्रका अध्ययन करता है, उन दोनोंका समान फल होता है ॥ १ ॥ श्रेष्ठ ब्राह्मण वेदके अध्ययनसे… Read More