शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 12 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता बारहवाँ अध्याय जलदान, सत्यभाषण और तपकी महिमा सनत्कुमार बोले – [ हे व्यासजी !] जलका दान सभी दानोंमें सदा अति श्रेष्ठ है; क्योंकि वह सभी जीव- समुदायको तृप्त करनेवाला जीवन कहा गया है ॥ १ ॥ अतः बिना किसी… Read More


शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 11 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता ग्यारहवाँ अध्याय दानके प्रभावसे यमपुरके दुःखका अभाव तथा अन्नदानका विशेष माहात्म्यवर्णन व्यासजी बोले- हे प्रभो ! पाप करनेवाले मनुष्य बड़े दुःखसे युक्त होकर यममार्गमें गमन करते हैं, अब आप उन धर्मोंको कहिये, जिनके द्वारा वे सुखपूर्वक यममार्गमें गमन करते… Read More


शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 10 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता दसवाँ अध्याय नरकविशेषमें दुःखवर्णन सनत्कुमार बोले – हे व्यासजी ! मिथ्या शास्त्रमें प्रवृत्त व्यक्ति द्विजिह्व नामक नरकमें जाता है, जहाँ जिह्वाके समान पतले, आधे कोशके विस्तारवाले तथा तीखे फालोंवाले हलोंसे उसे विशेष पीड़ा पहुँचायी जाती है । जो क्रूर… Read More


शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 09 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता नौवाँ अध्याय नरककी यातनाओंका वर्णन सनत्कुमार बोले— [ हे व्यास!] इन नरकाग्नियोंमें पापीजन अनेक प्रकारकी विचित्र यातनाओंके द्वारा कर्मोंके विनष्ट होनेतक सताये तथा सुखाये जाते हैं ॥ १ ॥ जिस प्रकार मल दूर होनेतक धातुएँ अग्निमें तपायी जाती हैं,… Read More


शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 08 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता आठवाँ अध्याय नरक – भेद-निरूपण चित्रगुप्त बोले – हे पापकर्मवालो! हे दूसरोंके द्रव्यका अपहरण करनेवालो ! हे रूप एवं पराक्रमपर घमण्ड करनेवालो! हे परनारीप्रसंग करनेवालो ! तुमलोगोंने स्वयं जो कर्म किया है, उसे तुम्हें भोगना पड़ रहा है। तुमलोगोंने… Read More


शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 07 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता सातवाँ अध्याय यमलोकका मार्ग एवं यमदूतोंके स्वरूपका वर्णन सनत्कुमार बोले – चार प्रकारके पापोंके कारण विवश होकर समस्त शरीरधारी मनुष्य भयको उत्पन्न करनेवाले घोर यमलोकको जाते हैं ॥ १ ॥ यह बात गर्भस्थ, उत्पन्न बालक, युवा, मध्यम, वृद्ध, स्त्री,… Read More


शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 06 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता छठा अध्याय पापभेदनिरूपण सनत्कुमार बोले- ब्राह्मणके धनका अपहरण, पैतृक सम्पत्तिके बँटवारेमें उलट-फेर करना, अत्यन्त अहंकार, अत्यन्त क्रोध, पाखण्ड, कृतघ्नता, विषयोंमें अत्यधिक आसक्ति, कृपणता, सज्जनोंसे द्वेष, परस्त्रीगमन, कुलीन सच्चरित्र कन्याओंको दूषित करना, परिवित्ति, परिवेत्ता * एवं जिस कन्यासे ये दोनों… Read More


शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 05 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता पाँचवाँ अध्याय महापातकोंका वर्णन व्यासजी बोले – हे भगवन्! हे ब्रह्मपुत्र ! महानरकमें जानेवाले जो पापपरायण जीव हैं, उनका वर्णन कीजिये, आपको नमस्कार है ॥ १ ॥ सनत्कुमार बोले – हे व्यासजी ! पापोंमें संलग्न जो महानरकगामी जीव हैं,… Read More


शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 04 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता चौथा अध्याय शिवकी मायाका प्रभाव मुनिगण बोले – हे तात! हे तात! हे महाभाग ! हे महामते ! आप धन्य हैं; क्योंकि आपने परम भक्ति प्रदान करनेवाली यह अद्भुत शिवकथा सुनायी है ॥ १ ॥ [ हे सूतजी !… Read More


शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 03 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता तीसरा अध्याय श्रीकृष्णकी तपस्या तथा शिव-पार्वतीसे वरदानकी प्राप्ति, अन्य शिवभक्तोंका वर्णन सनत्कुमार बोले— उनकी यह बात सुनकर श्रीकृष्णने अति विस्मित होकर शान्तचित्त उन महामुनिसे कहा—॥ १ ॥ वासुदेव बोले- हे विप्रेन्द्र ! आप धन्य हैं, आप [ विशुद्धात्मा] –… Read More