शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 48 September 11, 2019 | aspundir | Leave a comment शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 48 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः अड़तालीसवाँ अध्याय शिव-पार्वती के विवाह का प्रारम्भ, हिमालय द्वारा शिव के गोत्र के विषय में प्रश्न होने पर नारदजी के द्वारा उत्तर के रूपमें शिवमाहात्म्य प्रतिपादित करना, हर्षयुक्त हिमालय द्वारा कन्यादानकर विविध उपहार प्रदान करना ब्रह्माजी बोले — इसी समय वहाँ… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 47 September 11, 2019 | aspundir | Leave a comment शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 47 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः सैंतालीसवाँ अध्याय पाणिग्रहण के लिये हिमालय के घर शिव के गमनोत्सव का वर्णन ब्रह्माजी बोले — तदनन्तर शैलराज ने प्रसन्नतापूर्वक बड़े उत्साह से वेदमन्त्रों के द्वारा शिवा एवं शिवजी का उपनयन-संस्कार सम्पन्न कराया । तदनन्तर विष्णु आदि देवताओं एवं मुनियों ने… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 46 September 11, 2019 | aspundir | Leave a comment शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 46 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः छियालीसवाँ अध्याय नगर में बरातियों का प्रवेश, द्वाराचार तथा पार्वती द्वारा कुलदेवता का पूजन ब्रह्माजी बोले — तदनन्तर शिवजी प्रसन्नचित्त होकर अपने गणों, देवताओं, दूतों तथा अन्य सभी लोगों के साथ कुतूहलपूर्वक हिमालय के घर गये ॥ १ ॥ हिमालय की… Read More
पितृ दोष शान्ति के उपाय September 10, 2019 | aspundir | Leave a comment पितृ दोष शान्ति के उपाय पितृदोष का नाम सुनते ही व्यक्ति चिंतित हो उठता है और अपनी सभी समस्याओं एवं कष्टों के कारण के रूप में उसी दोष को देखने लगता है । साथ ही उसके उपाय के लिए वह चाहता है कि कोई एक पूजा करवा दे, जिससे उसे इस दोष से छुटकारा मिल… Read More
पितृसूक्त September 10, 2019 | aspundir | Leave a comment ॥ पितृसूक्त ॥ ऋग्वेदके १० वें मण्डलके १५वें सूक्तकी १-१४ ऋचाएँ ‘पितृसूक्त’ के नामसे ख्यात हैं । पहली आठ ऋचाओं में विभिन्न स्थानों में निवास करनेवाले पितरों को हविर्भाग स्वीकार करने के लिये आमन्त्रित किया गया है । अन्तिम छः ऋचाओं में अग्नि से प्रार्थना की गयी है कि वे सभी पितरों को साथ लेकर… Read More
वेदोक्त पितृसूक्त September 10, 2019 | aspundir | Leave a comment ॥ वेदोक्त पितृसूक्त ॥ शुक्लयजुर्वेद के अध्याय 35 में पितृसूक्त दिया गया है। इसका नियमित पाठ करने से पितृदोष की शान्ति होती है। यह सूक्त निम्नलिखित है – अपेतो यन्तु पणयोऽसुम्ना देवपीयवः । अस्य लोकः सुतावतः । द्युभिरहोभिरक्तुभिर्व्यक्तं यमो ददात्ववसानमस्मै ॥ १ ॥ सविता ते शरीरेभ्यः पृथिव्याँल्लोकमिच्छतु । तस्मै युज्यन्तामुस्रियाः ॥ २ ॥ वायुः पुनातु… Read More
पुराणोक्त पितृस्तोत्र September 10, 2019 | aspundir | Leave a comment ॥ पुराणोक्त पितृस्तोत्र ॥ मनोकामनाओं की पूर्ति करते है । यहाँ मार्कण्डेय पुराण (04/1-13) में वर्णित चमत्कारी पितस्तोत्र दिया जा रहा है । इसका नियमित पाठ करना चाहिए । ॥ रुचिरुवाच ॥ (सप्तार्चिस्तपम्) अमूर्त्तानां च मूर्त्तानां पितृणां दीप्ततेजसाम् ॥ नमस्यामि सदा तेषां ध्यानिनां दिव्यचक्षुषाम् । इन्द्रादीनां च नेतारो दक्षमारीचयोस्तथा ॥… Read More
अभीष्ट फलदायक बाह्य शान्ति सूक्त September 10, 2019 | aspundir | Leave a comment अभीष्ट फलदायक बाह्य शान्ति सूक्त (कुल-देवता की प्रसन्नता के लिए अमोघ अनुभूत सूक्त) नमो वः पितरो, यच्छिव तस्मै नमो, वः पितरो यतृस्योन तस्मै । नमो वः पितरः, स्वधा वः पितरः ॥ 1 ॥ नमोऽस्तु ते निर्ऋर्तु, तिग्म तेजोऽयस्यमयान विचृता बन्ध-पाशान् । यमो मह्यं पुनरित् त्वां ददाति । तस्मै यमाय नमोऽस्तु मृत्यवे ॥ 2 ॥ नमोऽस्त्वसिताय,… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 45 September 9, 2019 | aspundir | Leave a comment शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 45 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः पैंतालीसवाँ अध्याय भगवान् शिव का अपने परम सुन्दर दिव्य रूप को प्रकट करना, मेना की प्रसन्नता और क्षमा-प्रार्थना तथा पुरवासिनी स्त्रियों का शिव के रूप का दर्शन करके जन्म और जीवन को सफल मानना ब्रह्माजी बोले — हे मुने ! इसी… Read More
शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 44 September 9, 2019 | aspundir | Leave a comment शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 44 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः चौवालीसवाँ अध्याय शिवजी के रूप को देखकर मेना का विलाप, पार्वती तथा नारद आदि सभी को फटकारना, शिव के साथ कन्या का विवाह न करने का हठ, विष्णु द्वारा मेना को समझाना ब्रह्माजी बोले — [हे नारद!] चेतना प्राप्तकर शैलप्रिया सती… Read More