शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 23 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः तेईसवाँ अध्याय हिमालय आदि का तपस्यानिरत पार्वती के पास जाना, पार्वती का पिता हिमालय आदि को अपने तप के विषय में दृढ़ निश्चय की बात बताना, पार्वती के तप के प्रभाव से त्रैलोक्य का संतप्त होना, सभी देवताओं का भगवान् शंकर… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 22 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः बाईसवाँ अध्याय पार्वती की तपस्या एवं उसके प्रभाव का वर्णन ब्रह्माजी बोले — हे देवर्षे ! आपके चले जाने पर प्रसन्नचित्त पार्वती ने शिवजी को तपस्या से ही साध्य माना और तपस्या करने का मन बना लिया । तदनन्तर पार्वती ने… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 21 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः इक्कीसवाँ अध्याय कामदेव के भस्म हो जाने पर पार्वती का अपने घर आगमन, हिमवान् तथा मेना द्वारा उन्हें धैर्य प्रदान करना, नारद द्वारा पार्वती को पंचाक्षर मन्त्र का उपदेश नारदजी बोले — हे विधे ! हे तात ! हे महाप्राज्ञ !… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 20 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः बीसवाँ अध्याय शिव की क्रोधाग्नि का वडवारूप-धारण और ब्रह्मा द्वारा उसे समुद्र को समर्पित करना नारदजी बोले — हे विधे ! भगवान् हर के [तृतीय] नेत्र से निकली हुई वह अग्नि की ज्वाला कहाँ गयी ? आप चन्द्रशेखर के उस चरि… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 19 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः उन्नीसवाँ अध्याय भगवान् शिव की नेत्रज्वाला से कामदेव का भस्म होना और रति का विलाप, देवताओं द्वारा रति को सान्त्वना प्रदान करना और भगवान् शिव से काम को जीवित करने की प्रार्थना करना नारदजी बोले — हे ब्रह्मन् ! हे विधे… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 18 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः अठारहवाँ अध्याय कामदेव द्वारा असमय में वसन्त-ऋतु का प्रभाव प्रकट करना, कुछ क्षण के लिये शिव का मोहित होना, पुनः वैराग्य-भाव धारण करना ब्रह्माजी बोले — शिवजी की माया से मोहित होकर वह महाभिमानी तथा मोह उत्पन्न करनेवाला काम शिवजी के… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 17 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः सत्रहवाँ अध्याय इन्द्र के स्मरण करने पर कामदेव का उपस्थित होना, शिव को तप से विचलित करने के लिये इन्द्र द्वारा कामदेव को भेजना ब्रह्माजी बोले — उन देवताओं के चले जाने पर दुरात्मा तारकासुर से अत्यन्त पीड़ित हुए इन्द्र ने… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 16 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः सोलहवाँ अध्याय तारकासुर से उत्पीड़ित देवताओं को ब्रह्माजी द्वारा सान्त्वना प्रदान करना ब्रह्माजी बोले — उसके बाद तारकासुर से पीड़ित वे समस्त देवता मुझ प्रजापति को भली-भाँति प्रणामकर परम भक्ति से स्तुति करने लगे ॥ १ ॥ देवताओं की यथार्थ एवं… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 15 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः पन्द्रहवाँ अध्याय वरांगी के पुत्र तारकासुर की उत्पत्ति, तारकासुर की तपस्या एवं ब्रह्माजी द्वारा उसे वरप्राप्ति, वरदान के प्रभाव से तीनों लोकों पर उसका अत्याचार ब्रह्माजी बोले — तदनन्तर वरांगी ने आदरपूर्वक गर्भ धारण किया । वह बहुत वर्षों तक परम… Read More


शिवमहापुराण – द्वितीय रुद्रसंहिता [तृतीय-पार्वतीखण्ड] – अध्याय 14 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः चौदहवाँ अध्याय तारकासुर की उत्पत्ति के प्रसंग में दितिपुत्र वज्रांग की कथा, उसकी तपस्या तथा वरप्राप्ति का वर्णन नारदजी बोले — हे विष्णुशिष्य ! हे महाशैव ! हे विधे ! आपने यह शिवा एवं शिवजी के परम पवित्र चरित्र का अच्छी… Read More