श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय १९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय उन्नीसवाँ अध्याय भक्ति, ज्ञान और यम-नियमादि साधनों का वर्णन भगवान् श्रीकृष्ण कहते हैं — उद्धवजी ! जिसने उपनिषदादि शास्त्रों के श्रवण, मनन और निदिध्यासन के द्वारा आत्मसाक्षात्कार कर लिया है, जो श्रोत्रिय एवं ब्रह्मनिष्ठ हैं, जिसका निश्चय केवल… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय १८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय अठारहवाँ अध्याय वानप्रस्थ और संन्यासी के धर्म भगवान् श्रीकृष्ण कहते हैं — प्रिय उद्धव ! यदि गृहस्थ मनुष्य वानप्रस्थ-आश्रम में जाना चाहे, तो अपनी पत्नी को पुत्रों के हाथ सौंप दे अथवा अपने साथ ही ले ले और… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय १७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सत्रहवाँ अध्याय वर्णाश्रम-धर्म-निरूपण उद्धवजी ने कहा — कमलनयन श्रीकृष्ण ! आपने पहले वर्णाश्रम-धर्म का पालन करनेवालों के लिये और सामान्यतः मनुष्यमात्र के लिये इस धर्म का उपदेश किया था, जिससे आपकी भक्ति प्राप्त होती है । अब आप… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय १६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सोलहवाँ अध्याय भगवान् की विभूतियों का वर्णन उद्धजी ने कहा — भगवन् ! आप स्वयं परब्रह्म हैं, न आपका आदि है और न अन्त । आप आवरणरहित अद्वितीय तत्व हैं । समस्त प्राणियों और पदार्थों की उत्पत्ति, स्थिति,… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय १५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पंद्रहवाँ अध्याय भिन्न-भिन्न सिद्धियों के नाम और लक्षण भगवान् श्रीकृष्ण कहते हैं — प्रिय उद्धव ! जब साधक इन्द्रिय, प्राण और मन को अपने वश में करके अपना चित्त मुझमें लगाने लगता है, मेरी धारणा करने लगता है,… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय १४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय चौदहवाँ अध्याय भक्तियोग की महिमा तथा ध्यानविधि का वर्णन उद्धवजी ने पूछा — श्रीकृष्ण ! ब्रह्मवादी महात्मा आत्मकल्याण के अनेकों साधन बतलाते हैं । उनमें अपनी-अपनी दृष्टि के अनुसार सभी श्रेष्ठ अथवा किसी एक की प्रधानता है ?… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय १३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तेरहवाँ अध्याय हंसरूप से सनकादि को दिये हुए उपदेश का वर्णन भगवान् श्रीकृष्ण कहते हैं — प्रिय उद्धव ! सत्त्व, रज और तम — ये तीनों बुद्धि (प्रकृति) के गुण हैं, आत्मा के नहीं । सत्त्व के द्वारा… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय १२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय बारहवाँ अध्याय सत्सङ्ग की महिमा और कर्म तथा कर्मत्याग की विधि भगवान् श्रीकृष्ण कहते हैं — प्रिय उद्धव ! जगत् में जितनी आसक्तियाँ हैं, उन्हें सत्सङ्ग नष्ट कर देता है । यहीं कारण है कि सत्सङ्ग जिस प्रकार… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय ११ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ग्यारहवाँ अध्याय बद्ध, मुक्त और भक्तजनों के लक्षण भगवान् श्रीकृष्ण ने कहा — प्यारे उद्धव ! आत्मा बद्ध है या मुक्त है, इस प्रकार की व्याख्या या व्यवहार मेरे अधीन रहनेवाले सत्त्वादि गुणों की उपाधि से ही होता… Read More


वैशाख शुक्ल तृतीया (अक्षयतृत्तीया) वैशाख शुक्ल तृतीया को अक्षयतृतीया कहते हैं । यह सनातनधर्मियों का प्रधान त्यौहार है । इस दिन दिये हुए दान और किये हुए स्त्रान, होम, जप आदि सभी कर्मों का फल अनन्त 1 होता है – सभी अक्षय हो जाते हैं; इसीसे इसका नाम अक्षया 2 हुआ है । इसी तिथि… Read More