श्रीमद्भागवतमहापुराण – चतुर्थ स्कन्ध – अध्याय १ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पहला अध्याय स्वायम्भुव मनु की कन्याओं के वंश का वर्णन श्रीमैत्रेयज़ी कहते हैं — विदुरजी ! स्वायम्भुव मनु के महारानी शतरूपा से प्रियव्रत और उत्तानपाद— इन दो पुत्रों के सिवा तीन कन्याएँ भी हुई थीं; वे आकूति, देवहूति… Read More


सरस्वतीसूक्त वैदिक परम्परा में सरस्वतीरहस्योपनिषद् के अनुसार सरस्वती की उपासना ब्रह्म-ज्ञान प्राप्ति का परमोत्तम साधन है । महर्षि आश्वलायन ने इसके द्वारा तत्त्व-ज्ञान प्राप्त किया था । यह स्तवन ऋग्वेद के उपनिषद् भाग के अन्तर्गत है । इसका आश्रय लेने से माँ सरस्वती की कृपा से विद्याप्राप्ति के विघ्न विशेषरूप से दूर होते हैं तथा… Read More


श्रीपञ्चमी-वसन्तपञ्चमी वसन्तपञ्चमी पूजा माघ शुक्ल पूर्वविद्धा पञ्चमी को उत्तम वेदी पर वस्त्र बिछाकर अक्षतों का अष्टदल कमल बनाये। उसके अग्रभाग में गणेशजी और पृष्ठभाग में ‘वसन्त’-जौ, गेहूँ की बाल का पूञ्ज (जो जलपूर्ण कलश में ड़ठल सहित रखकर बनाया जाता है) स्थापित करके सर्वप्रथम गणेशजी का पूजन करे और पीछे उक्त पुञ्ज में “रति” और… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय ३३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तैंतीसवाँ अध्याय देवहूतिको तत्वज्ञान एवं मोक्षपद की प्राप्ति मैत्रेयजी कहते हैं — विदुरजी ! श्रीकपिल भगवान् के ये वचन सुनकर कर्दमजी की प्रिय पत्नी माता देवहूति के मोह का पर्दा हट गया और वे तत्त्वप्रतिपादक सांख्यशास्त्र के ज्ञान… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय ३२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय बत्तीसवाँ अध्याय धूममार्ग और अर्चिरादि मार्ग से जानेवालों की गति का और भक्तियोग की उत्कृष्टता का वर्णन कपिलदेवजी कहते हैं — माताजी ! जो पुरुष घर में रहकर सकामभाव से गृहस्थ के धर्मों का पालन करता है और… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय ३१ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय इकतीसवाँ अध्याय मनुष्य-योनि को प्राप्त हुए जीव की गति का वर्णन श्रीभगवान् कहते हैं — माताजी ! जब जीव को मनुष्यशरीर में जन्म लेना होता है, तो वह भगवान् की प्रेरणा से अपने पूर्वकर्मानुसार देहप्राप्ति के लिये पुरुष… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय ३० ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तीसवाँ अध्याय देह-गेह में आसक्त पुरुषों की अधोगति का वर्णन कपिलदेवजी कहते हैं — माताजी ! जिस प्रकार वायु के द्वारा उड़ाया जानेवाला मेघसमूह उसके बल को नहीं जानता, उसी प्रकार यह जीव भी बलवान् काल की प्रेरणा… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय २९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय उनतीसवाँ अध्याय भक्ति का मर्म और काल की महिमा देवहूति ने पूछा — प्रभो ! प्रकृति, पुरुष और महत्तत्वादि का जैसा लक्षण सांख्यशास्त्र में कहा गया है तथा जिसके द्वारा उनका वास्तविक स्वरूप अलग-अलग जाना जाता है और… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय २८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय अट्ठाईसवाँ अध्याय अष्टाङ्गयोग की विधि कपिल भगवान् कहते हैं— माताजी ! अब मैं तुम्हें सबीज (ध्येयस्वरूप के आलम्बन से युक्त) योग का लक्षण बताता हूँ, जिसके द्वारा चित्त शुद्ध एवं प्रसन्न होकर परमात्मा के मार्ग में प्रवृत्त हो… Read More


काम-देवता सिद्धि मन्त्र (१) – “ॐ नमो आदेश गुरु का । कामदेव -कामदेव क्या करे ? तुम मेरे पास हाजिर होकर सब स्त्री – पुरुष को मेरे वश में करे । हर वक्त मेरे साथ रहे । मेरा कार्य करे । ऐसा न हो, तो महादेव के नेत्र से भस्म हो जाए । आदेश गुरु… Read More