श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय २७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सत्ताईसवाँ अध्याय प्रकृति-पुरुष के विवेक से मोक्ष-प्राप्ति का वर्णन श्रीभगवान् कहते हैं — माताजी ! जिस तरह जल में प्रतिबिम्बित सूर्य के साथ जल की शीतलता, चञ्चलता आदि गुण का सम्बन्ध नहीं होता, उसी प्रकार प्रकृति के कार्य… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय २६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय छब्बीसवाँ अध्याय महदादि भिन्न-भिन्न तत्त्वों की उत्पत्ति का वर्णन श्रीभगवान् ने कहा — माताजी ! अब मैं तुम्हें प्रकृति आदि सब तत्त्वों के अलग-अलग लक्षण बतलाता हूँ; इन्हें जानकर मनुष्य प्रकृति के गुणों से मुक्त हो जाता है… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय २५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पचीसवाँ अध्याय देवहूति का प्रश्न तथा भगवान् कपिल द्वारा भक्तियोग की महिमा का वर्णन शौनकजी ने पूछा — सूतजी ! तत्त्वों की संख्या करनेवाले भगवान् कपिल साक्षात् अजन्मा नारायण होकर भी लोगों को आत्मज्ञान का उपदेश करने के… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय २४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय चौबीसवाँ अध्याय श्रीकपिलदेवजी का जन्म श्रीमैत्रेयजी कहते हैं — उत्तम गुणों से सुशोभित मनुकुमारी देवहूति ने जब ऐसी वैराग्ययुक्त बातें कहीं, तब कृपालु कर्दम मुनि को भगवान् विष्णु के कथन का स्मरण हो आया और उन्होंने उससे कहा… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय २३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तेईसवाँ अध्याय कर्दम और देवहूति का विहार श्रीमैत्रेयजी ने कहा — विदुरजी ! माता-पिता के चले जाने पर पति के अभिप्राय को समझ लेने में कुशल साध्वी देवहूति कर्दमजी की प्रतिदिन प्रेमपूर्वक सेवा करने लगी, ठीक उसी तरह,… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय २२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय बाईसवाँ अध्याय देवहुति के साथ कर्दम प्रजापति का विवाह मैत्रेयजी कहते हैं — विदुरजी ! इस प्रकार जब कदर्मजी ने मनुजी के सम्पूर्ण गुणों और कर्मों की श्रेष्ठता का वर्णन किया, तो उन्होंने उन निवृत्तिपरायण मुनि से कुछ… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय २१ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय इक्कीसवाँ अध्याय कर्दमजी की तपस्या और भगवान् का वरदान विदुरजी ने पूछा — भगवन् ! स्वायम्भुव मनु का वंश बड़ा आदरणीय माना गया है । उसमें मैथुनधर्म के द्वारा प्रजा की वृद्धि हुई थी । अब आप मुझे… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय २० ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय बीसवाँ अध्याय ब्रह्माजी की रची हुई अनेक प्रकार की सृष्टि का वर्णन शौनकजी कहते हैं — सूतजी ! पृथ्वीरूप आधार पाकर स्वायंभुव मनु ने आगे होनेवाली सन्तति को उत्पन्न करने के लिये किन-किन उपायों का अवलम्बन किया ?… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय १९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय उन्नीसवाँ अध्याय हिरण्याक्ष-वध मैत्रेयजी कहते हैं — विदुरजी ! ब्रह्माजी के ये कपटरहित अमृतमय वचन सुनकर भगवान् ने उनके भोलेपन पर मुसकराकर अपने प्रेमपूर्ण कटाक्ष के द्वारा उनकी प्रार्थना स्वीकार कर ली ॥ १ ॥ फिर उन्होंने झपटकर… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – तृतीय स्कन्ध – अध्याय १८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय अठारहवाँ अध्याय हिरण्याक्ष के साथ वराहभगवान् का युद्ध श्रीमैत्रेजी ने कहा — तात ! वरुणजी की यह बात सुनकर वह मदोन्मत्त दैत्य बड़ा प्रसन्न हुआ । उसने उनके इस कथन पर कि ‘तू उनके हाथ से मारा जायगा’… Read More