भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ७५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ७५ श्रवण द्वादशी-व्रत के प्रसंग में एक वणिक् की कथा युधिष्ठिर ने पूछा — भगवन् ! जो व्यक्ति दीर्घ उपवास करने में असमर्थ हो उसके लिये कौन-सा व्रत हैं ? इसे आप बतलायें । भगवान् श्रीकृष्ण ने… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ७३ से ७४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ७३ से ७४ मल्लद्वादशी एवं भीमद्वादशी-व्रत का विधान युधिष्ठिर के द्वारा मल्लद्वादशी के विषय में पूछे जानेप र भगवान् श्रीकृष्णचन्द्र ने कहा — महाराज ! जब मेरी अवस्था आठ वर्ष की थी, उस समय यमुना-तट… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ७२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ७२ भीष्मपञ्चक-व्रत की विधि एवं महिमा युधिष्ठिर ने कहा — हे यदुश्रेष्ठ कृष्ण ! कार्तिक मास में भीष्म-पञ्चक नाम का जो श्रेष्ठ व्रत होता है, अब कृपया उसका विधान बताइये । भगवान् श्रीकृष्ण बोले — महाराज !… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ७१ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ७१ नीराजनद्वादशीव्रत-कथा एवं व्रत-विधान भगवान् श्रीकृष्णने कहा — राजन् ! प्राचीन काल में अजपाल नाम के एक राजर्षि थे । एक बार प्रजा ने अपने दुःखों को दूर करने की उनसे प्रार्थना की, तब उन्होंने इस पर… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ७० ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ७० देवशयनी एवं देवोत्थानी द्वादशी व्रतोंका विधान भगवान् श्रीकृष्ण बोले — राजन् ! अब मैं गोविन्दशयन नामक व्रत का वर्णन कर रहा हूँ और कटिदान, समुत्थान एवं चातुर्मास्यव्रत का भी वर्णन करता हैं, उसे आप सुनें ।… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ६९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ६९ गोवत्स-द्वादशी… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ६८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ६८ अवियोग-व्रत का विधान महाराज युधिष्ठिर ने पूछा — भगवन् ! आप यह बतायें कि अवियोगव्रत किस विधि से किया जाता है ? भगवान् श्रीकृष्ण बोले — महाराज ! अवियोगव्रत सभी व्रतों में श्रेष्ठ है, मैं उसका… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ६७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ६७ रोहिणीचन्द्र-व्रत का विधान महाराज युधिष्ठिर ने पूछा — भगवन् ! वर्षाकाल में आकाश नीले मेघ से आच्छादित हो जाता है । मोर चारों ओर मीठी-मीठी बोली बोलने लगते हैं । मेढकों की ध्वनि भी बड़ी सुहावनी… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ६६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ६६ अरण्यद्वादशी-व्रत का विधान और फल महाराज युधिष्ठिर ने कहा — श्रीकृष्णचन्द्र ! आप अरण्यद्वादशी-व्रत का विधान बतलायें । भगवान् श्रीकृष्ण बोले — कौन्तेय ! प्राचीन काल में जिस व्रत को रामचन्द्रजी की आज्ञा से वन में… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय ६५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय ६५ तारकद्वादशी के प्रसंग में राजा कुशध्वज की कथा तथा व्रत-विधान महाराज युधिष्ठिर ने कहा — भगवन् ! मैं बहुत बड़ा पातकी हूँ । भीष्म, द्रोण आदि महात्माओं का मैंने वध किया । आप कृपाकर कोई ऐसा… Read More