सर्व-वशीकरण मन्त्र — “ॐ नमो आदेश गुरु को । राजा मोहूँ, प्रजा मोहूँ, ब्राह्मण बनिया । हनुमन्त-रूप से जगत मोहूँ, तो रामचन्द्र पर मनिया । गुरू की शक्ति, मेरी भक्ति । फुरो मन्त्र, ईश्वरो वाचा ।”… Read More


वशीकरण-पान मन्त्र – “हरे पान, हरियाले पान । चिकनी सुपारी, श्वेत खैर । दाहिने कर चूना, मोहि लेय । पान हाथ में देय, हाथ रस लेय । पेट दे, पेठ रस लेय । श्री नरसिंह वीर । तुम्हारी शक्ति, मेरी भक्ति । फुरो मन्त्र, ईश्वर महादेव की बाचा ।”… Read More


कामदार का वशीकरण मन्त्र – “बिसमिल्लाह दाना कुल्हू अल्लाह या दाना दिल है । सख्त तुम हो दाना, हमारे बीच ‘फलां’ को करो दिवाना ।”… Read More


सभा-मोहक सिन्दूर मन्त्र — “हथेली तो हनुमन्त बसै, भैरों बसै कपाल । नृसिंह की मोहनी मोह्यो सब संसार ! मोहन रे मोहता बीर, सब बीरन में तेरा सीर । सबकी दृष्टि बांधि दे, तोहि तेल-सिन्दूर चढाऊँ । तोहि तेल- सिन्दूर कहाँ से आया ? कैलास – परवत से आया । कौन लाया ? अञ्जनी का… Read More


बहु-जन-हिताय अनुभूत शाबर-मन्त्र सभा-मोहक सुरमा मन्त्र — “कालू मुख धोएँ, करूँ सलाम । मेरी आँखों में सुरमा बसे । जो देखें, सो पायन पड़ें । दुहाई गउसल आज़म–दस्त-गीर की छू: छू: छू: ।”… Read More


भक्त ठाकुर श्री किशनसिंह राठौड़ (गारबदेसर, बीकानेर) बीकानेर राज्य के संस्थापक राव बीकाजी राठौड़ के दो पुत्र हुए लूणकरणजी और घड़सी जी । बडे लूणकरणजी बीकाजी के बाद गद्दी पर बैठे । छोटे घड़सी घडसाना के जागीरदार हुए । घड़सीजी के पुत्र देदलजी को 84 गांव सहित गारबदेसर का तामीजी ठिकाना मिला । देदलजी के… Read More


श्री नाभादासजी (गलता / रेवासा) भक्तमाल के रचयिता परम भागवत श्री नाभादासजी का चरित्र आदि से अन्त तक सन्त-सेवा-मय है। उन्होंने जन्म से ही आँखें बन्द रखी और तब तक नहीं खोली, जब तक उनको संतों के दर्शन नहीं हुए। आजन्म संतों की सेवा की और संतों की सीध-प्रसादी का सेवन किया। उसी का चेतन… Read More