भगवान श्रीकृष्ण के विभिन्न मन्त्र  आप सभी को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं (१) एकाक्षर कृष्णः क॰ “क्लीं” (हिन्दी-तन्त्रसार / मेरुतन्त्र) ख॰ “ग्लौं” (मेरु-तन्त्र) ग॰ बाल-गोपाल-मन्त्र- “कृः” (हिन्दी-तन्त्रसार) घ॰ बाल-गोपाल-मन्त्र- “कृं” (मेरु-तन्त्र)… Read More


भगवान् श्रीकृष्णोपासना मन्त्रः- “ॐ क्लीं ग्लौं क्लीं कृष्णाय क्लीं ग्लौं क्लीं ॐ” विनियोगः- ॐ अस्य श्री एकादशाक्षर श्रीकृष्ण-मन्त्रस्य भगवान् नारद ऋषिः, गायत्री छन्दः, श्रीकृष्ण परमात्मा देवता, ॐ इति शक्तिः, क्लीं बीजं, ग्लौं कीलकं, भगवान्-श्रीकृष्ण-परमात्मा-प्रीत्यर्थे जपे विनियोगः। ऋष्यादि-न्यासः- श्रीनारद ऋषये नमः शिरसि, गायत्री छन्दसे नमः मुखे, श्रीकृष्ण परमात्मा देवतायै नमः हृदि, ॐ इति शक्तये नमः नाभौ,… Read More


श्रीकृष्णस्तवराजः ॥ श्रीमहादेव उवाच ॥ श्रृणु देवि प्रवक्ष्यामि स्तोत्रं परमदुर्लभम् । यज्ज्ञात्वा न पुनर्गच्चेन्नरो निरययातनाम् ॥ १ ॥ नारदाय च यत्प्रोक्तं ब्रह्मपुत्रेण धीमता । सनत्कुमारेण पुरा योगींद्रगुरुवर्त्मना ॥ २ ॥… Read More


सर्व-सिद्ध-प्रद ब्रह्माण्ड-पावन श्रीकृष्ण कवच ॥ ब्रह्मोवाच ॥ राधाकान्त महाभाग ! कवचं यत् प्रकाशितं । ब्रह्माण्ड-पावनं नाम, कृपया कथय प्रभो ! ॥ १ ॥ मां महेशं च धर्मं च, भक्तं च भक्त-वत्सल । त्वत्-प्रसादेन पुत्रेभ्यो, दास्यामि भक्ति-संयुतः ॥ २ ॥ ब्रह्माजी बोले – हे महाभाग ! राधा-वल्लभ ! प्रभो ! ‘ब्रह्माण्ड-पावन’ नामक जो कवच आपने प्रकाशित… Read More


नागपत्नीकृतं श्रीकृष्णस्तोत्रं ।।सुरसोवाच।। हे जगत्कान्त कान्तं मे देहि मानं च मानद । पतिः प्राणाधिकः स्त्रीणां नास्ति बन्धुश्च तत्परः ।।१ अयि सुरवरनाथ प्राणनाथं मदीयं न कुरु वधमनन्तप्रेमसिन्धो सुबन्धो । अखिलभुवनबन्धो राधिकाप्रेमसिन्धो पतिमिह कुरु दानं मे धिधातुर्विधातः ।।२ त्रिनयनविधिशेषाः षण्मुखश्चास्यसङ्घैः स्तवनविषयजाड्याः स्तोतुमीशा न वाणी । न खलु निखिलवेदाः स्तोतुमन्येऽपि देवाः स्तवनविषयशक्ताः सन्ति सन्तस्तवैव ।।३… Read More


शीघ्र विवाह के टोटके १॰ जिस समय भी कन्या के परिजन वर पक्ष से विवाह वार्ता करने के लिए जाएँ, उस समय कन्या प्रसन्नतापूर्वक उन्हें मिष्ठान्न खिलाकर विदा करे तथा अपने बालों को खोले रखें। २॰ विवाह के लिए वर पक्ष के घर में प्रवेश करते समय कन्या के पिता अथवा अन्य जिम्मेदार व्यक्ति को… Read More


उड़िया विलंकारामायण उड़िया भाषा में एक ऐसी रामायण लिखी गई, जिसकी विषयवस्तु वाल्मीकि रामायण, अध्यात्म रामायण एवं रामचरितमानस से सर्वथा भिन्न है । इस ग्रन्थ का नाम है विलंकारामायण । इसके रचयिता हैं उड़िया के आदिकवि शारलादास । ऐसा माना जाता है कि उन्होंने इसकी रचना जगन्नाथपुरी के राजा गजपति गौड़ेश्व कपिलेन्द्रदेव के शासनकाल (1452-1479… Read More


श्रीबालरक्षा श्रीगणेशाय नमः । श्रीकृष्णाय नमः । अव्यादजोङघ्रिंमणिमांस्तव जान्वथोरू यज्ञोऽच्युतः कटितटं जठरं हयास्यः । ह्रत्केशवस्त्वदुर ईश इनस्तु कंठं विष्णुर्भुजं मुखमुरुक्रम ईश्वरः कम् ॥ १ ॥ चक्रयग्रतः सहगदो हरिरस्तु पश्‍चात्त्वत्पार्श्वयोर्धनुरसौ मधुहाजनश्‍च । कोणेषु शंख उरुगाय उपर्युपेन्द्रस्तार्क्ष्यः क्षितौ हलधरः पुरुषः समंतात् ॥ २ ॥… Read More


॥ श्रीलक्ष्मीस्तव ॥ नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते । शङ्खचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥ १॥ नमस्ते गरुडारूढे कोलासुरभयङ्करि । सर्वपापहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥ २॥ सर्वज्ञे सर्ववरदे सर्वदुष्टभयङ्करि । सर्वदुःखहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥ ३॥ सिद्धिबुद्धिप्रदे देवि भुक्तिमुक्तिप्रदायिनि । मन्त्रपूते सदा देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥ ४॥ आद्यन्तरहिते देवि आद्यशक्तिमहेश्वरि । योगजे योगसम्भूते महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥ ५॥ स्थूलसूक्ष्ममहारौद्रे… Read More


कलश एवं जयन्ती का माहात्म्य माँ दुर्गा की पूजा का शुभारम्भ ‘कलश’-स्थापना से होता है। स्थापना हेतु ‘कलश’ स्वर्ण, चाँदी, पीतल, ताम्र अथवा मिट्टी का होना चाहिए। ‘कलश’ देखने में सुडौल और पवित्र होने चाहिए। मिट्टी के ऐसे ‘कलश’ प्रयोग में नहीं लाने चाहिए, जिनमें छिद्र होने की सम्भावना हो।विशेष अनुष्ठान करना हो, तो धातु… Read More