अग्निपुराण – अध्याय 010 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ अध्याय १० युद्धकाण्ड की संक्षिप्त कथा नारदजी कहते हैं —  तदनन्तर श्रीरामचन्द्रजी के आदेश से अङ्गद रावण के पास गये और बोले — ‘रावण! तुम जनककुमारी सीता को ले जाकर शीघ्र ही श्रीरामचन्द्रजी को सौंप दो अन्यथा मारे जाओगे ।’… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 009 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ अध्याय ९ सुन्दरकाण्ड की संक्षिप्त कथा नारदजी कहते हैं — सम्पाति की बात सुनकर हनुमान् और अङ्गद आदि वानरों ने समुद्र की ओर देखा। फिर वे कहने लगे — ‘कौन समुद्र को लाँघकर समस्त वानरों को जीवन दान देगा?’ ॥… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 008 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ अध्याय ८ किष्किन्धाकाण्ड की संक्षिप्त कथा नारदजी कहते हैं — श्रीरामचन्द्रजी पम्पा- सरोवर पर जाकर सीता के लिये शोक करने लगे। वहाँ वे शबरी से मिले। फिर हनुमान् जी से उनकी भेंट हुई। हनुमान् जी उन्हें सुग्रीव के पास ले… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 007 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ सातवाँ अध्याय अरण्यकाण्ड की संक्षिप्त कथा नारदजी कहते हैं — मुने! श्रीरामचन्द्रजी ने महर्षि वसिष्ठ तथा माताओं को प्रणाम करके उन सबको भरत के साथ विदा कर दिया । तत्पश्चात् महर्षि अत्रि तथा उनकी पत्नी अनसूया को, शरभङ्गमुनि को, सुतीक्ष्ण… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 006 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ छठा अध्याय अयोध्याकाण्ड की संक्षिप्त कथा नारदजी कहते हैं — भरत के ननिहाल चले जाने पर [लक्ष्मणसहित ] श्रीरामचन्द्रजी ही पिता- माता आदि के सेवा-सत्कार में रहने लगे। एक दिन राजा दशरथ ने श्रीरामचन्द्रजी से कहा — ‘ रघुनन्दन !… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 005 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ पाँचवाँ अध्याय श्रीरामावतार-वर्णन के प्रसङ्ग में रामायण – बालकाण्ड की संक्षिप्त कथा अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ! अब मैं ठीक उसी प्रकार रामायण का वर्णन करूँगा, जैसे पूर्वकाल में नारदजी ने महर्षि वाल्मीकिजी को सुनाया था। इसका पाठ भोग और… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 004 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ चौथा अध्याय वराह, नृसिंह, वामन और परशुराम अवतारकी कथा अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ ! अब मैं वराहावतार की पापनाशिनी कथा का वर्णन करता हूँ। पूर्वकाल में ‘हिरण्याक्ष’ नामक दैत्य असुरों का राजा था। वह देवताओं को जीतकर स्वर्ग में… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 003 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीसरा अध्याय समुद्र मन्थन, कूर्म तथा मोहिनी अवतार की कथा अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ! अब मैं कूर्मावतारका वर्णन करूँगा। यह सुनने पर सब पापों का नाश हो जाता है। पूर्वकाल की बात है, देवासुर संग्राम में दैत्यों ने देवताओं… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 002 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दूसरा अध्याय मत्स्यावतार की कथा वसिष्ठजी ने कहा — अग्निदेव ! आप सृष्टि आदि के कारणभूत भगवान् विष्णु के मत्स्य आदि अवतारों का वर्णन कीजिये । साथ ही ब्रह्मस्वरूप अग्निपुराण को भी सुनाइये, जिसे पूर्वकाल में आपने श्रीविष्णुभगवान् के मुख… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 001 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ पहला अध्याय मङ्गलाचरण तथा अग्नि और वसिष्ठ के संवाद-रूप से अग्निपुराण का आरम्भ श्रियं सरस्वतीं गौरीं गणेशं स्कन्दमीश्वरम् । ब्रह्माणं वह्निमिन्द्रादीन् वासुदेवं नमाम्यहम् ॥ ‘लक्ष्मी, सरस्वती, पार्वती, गणेश, कार्तिकेय, महादेवजी, ब्रह्मा, अग्नि, इन्द्र आदि देवताओं तथा भगवान् वासुदेव को मैं… Read More