अग्निपुराण – अध्याय 020 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ बीसवाँ अध्याय सर्ग का वर्णन जगत्‌सर्गवर्णनम् अग्निदेव कहते हैं — मुने ! (प्रकृति से) पहले महत्तत्त्व की सृष्टि हुई, इसे ब्राह्मसर्ग समझना चाहिये। दूसरी तन्मात्राओं की सृष्टि हुई, इसे भूतसर्ग कहा गया है। तीसरी वैकारिक सृष्टि है, इसे ऐन्द्रियकसर्ग कहते… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 019 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ उन्नीसवाँ अध्याय कश्यप आदि के वंश का वर्णन कश्यपवंशवर्णनम् अग्निदेव बोले — हे मुने! अब मैं अदिति आदि दक्ष कन्याओं से उत्पन्न हुई कश्यपजी की सृष्टि का वर्णन करता हूँ — चाक्षुष मन्वन्तर में जो तुषित नामक बारह देवता थे,… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 018 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ अठारहवाँ अध्याय स्वायम्भुव मनु के वंश का वर्णन स्वायम्भुववंशवर्णनम् अग्निदेव कहते हैं — मुने! स्वायम्भुव मनु से उनकी तपस्विनी भार्या शतरूपा ने प्रियव्रत और उत्तानपाद नामक दो पुत्र और एक सुन्दरी कन्या उत्पन्न की। वह कमनीया कन्या (देवहूति) कर्दम ऋषि… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 017 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ सत्रहवाँ अध्याय जगत् की सृष्टि का वर्णन सृष्टिविषयकवर्णनम् अग्निदेव कहते हैं — ब्रह्मन् ! अब मैं जगत् की सृष्टि आदि का, जो श्रीहरि की लीलामात्र है, वर्णन करूँगा; सुनो। श्रीहरि ही स्वर्ग आदि के रचयिता हैं। सृष्टि और प्रलय आदि… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 016 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ सोलहवाँ अध्याय बुद्ध और कल्कि अवतारों की कथा बुद्धाद्यतारकथनम् अग्निदेव कहते हैं — अब मैं बुद्धावतार का वर्णन करूँगा, जो पढ़ने और सुनने वालों के मनोरथ को सिद्ध करने वाला है। पूर्वकाल में देवताओं और असुरों में घोर संग्राम हुआ।… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 015 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ पंद्रहवाँ अध्याय यदुकुल का संहार और पाण्डवों का स्वर्गगमन पाण्डवस्वर्गरोहणवर्णनम् अग्निदेव कहते हैं — ब्रह्मन् ! जब युधिष्ठिर राजसिंहासन पर विराजमान हो गये, तब धृतराष्ट्र गृहस्थ आश्रम से वानप्रस्थ आश्रम में प्रविष्ट हो वन में चले गये। [अथवा ऋषियों के… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 014 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ चौदहवाँ अध्याय कौरव और पाण्डवों का युद्ध तथा उसका परिणाम अग्निदेव कहते हैं — युधिष्ठिर और दुर्योधन की सेनाएँ कुरुक्षेत्र के मैदान में जा डटीं। अपने विपक्ष में पितामह भीष्म तथा आचार्य द्रोण आदि गुरुजनों को देखकर अर्जुन युद्ध से… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 013 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तेरहवाँ अध्याय महाभारत की संक्षिप्त कथा कुरुपाण्डवोत्पत्यादिकथनम् अग्निदेव कहते हैं — अब मैं श्रीकृष्ण की महिमा को लक्षित कराने वाला महाभारत का उपाख्यान सुनाता हूँ, जिसमें श्रीहरि ने पाण्डवों को निमित्त बनाकर इस पृथ्वी का भार उतारा था । भगवान्… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 012 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ अध्याय १२ श्रीहरिवंश का वर्णन एवं श्रीकृष्णावतार की संक्षिप्त कथा अग्निदेव कहते हैं — अब मैं हरिवंश का वर्णन करूँगा। श्रीविष्णु के नाभि-कमल से ब्रह्माजी का प्रादुर्भाव हुआ। ब्रह्माजी से अत्रि, अत्रि से सोम, सोम से [बुध एवं बुध से]… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 011 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ अध्याय ११ उत्तरकाण्ड की संक्षिप्त कथा नारदजी कहते हैं — जब रघुनाथजी अयोध्या के राजसिंहासन पर आसीन हो गये, तब अगस्त्य आदि महर्षि उनका दर्शन करने के लिये गये। वहाँ उनका भली भाँति स्वागत-सत्कार हुआ। तदनन्तर उन ऋषियों ने कहा… Read More