अग्निपुराण – अध्याय 039 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ उन्तालीसवाँ अध्याय विष्णु आदि देवताओं की स्थापना के लिये भूपरिग्रह का विधान विष्ण्वादिदेवताप्रतिष्ठाने भूपरिग्रहविधानम् भगवान् हयग्रीव कहते हैं — ब्रह्मन् ! अब मैं विष्णु आदि देवताओं की प्रतिष्ठा के विषय में कहूँगा, ध्यान देकर सुनिये। इस विषय में मेरे द्वारा… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 038 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ अड़तीसवाँ अध्याय देवालय निर्माण से प्राप्त होनेवाले फल आदि का वर्णन देवालयनिर्माणफलादि अग्निदेव कहते हैं — मुनिवर वसिष्ठ ! भगवान् वासुदेव आदि विभिन्न देवताओं के निमित्त मन्दिर का निर्माण कराने से जिस फल आदि की प्राप्ति होती है, अब मैं… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 037 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ सैंतीसवाँ अध्याय संक्षेप से समस्त देवताओं के लिये साधारण पवित्रारोपण की विधि का वर्णन संक्षेपतः सर्वदेवसाधारणः पवित्रारोपणविधिः अग्निदेव कहते हैं — मुने! अब संक्षेप से समस्त देवताओं के लिये पवित्रारोपण की विधि सुनो। पहले जो चिह्न कहे गये हैं, उन्हीं… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 036 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ छत्तीसवाँ अध्याय भगवान् विष्णु के लिये पवित्रारोपण की विधि विष्णुपवित्रारोपणविधिः अग्निदेव कहते हैं — मुने! प्रात:काल स्नान आदि करके, द्वारपालों का पूजन करने के पश्चात् गुप्त स्थान में प्रवेश करके, पूर्वाधिवासित पवित्रक में से एक लेकर प्रसादरूप से धारण कर… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 035 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ पैंतीसवाँ अध्याय पवित्राधिवासन विधि का वर्णन पवित्राधिवासनविधिः अग्निदेव कहते हैं — मुनीश्वर ! सम्पाताहुति से पवित्राओं का सेचन करके उनका अधिवासन करना चाहिये। नृसिंह-मन्त्र का जप करके उन्हें अभिमन्त्रित करे और अस्त्रमन्त्र (अस्त्राय फट्) -से उन्हें सुरक्षित रखे। पवित्राओं में… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 034 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ चौंतीसवाँ अध्याय पवित्रारोपण के लिये पूजा-होमादि की विधि का वर्णन पवित्रकारोपणे पूजाहोमादिविधिः अग्निदेव कहते हैं — मुनीश्वर ! निम्नाङ्कित मन्त्र का उच्चारण करते हुए साधक यागमण्डप में प्रवेश करे और सजावट से यज्ञ के स्थान की शोभा बढ़ावे (तथा निम्नाङ्कित… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 033 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तैंतीसवाँ अध्याय पवित्रारोपण, भूतशुद्धि, योगपीठस्थ देवताओं तथा प्रधान देवता के पार्षद-आवरणदेवों की पूजा पवित्रकारोपण विधि कथनम् अग्निदेव कहते हैं — मुने! अब मैं पवित्रारोपण [^1]  की विधि बताऊँगा। वर्ष में एक बार किया गया पवित्रारोपण सम्पूर्ण वर्षभर की हुई श्रीहरि… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 032 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ बत्तीसवाँ अध्याय निर्वाणदि-दीक्षा की सिद्धि के उद्देश्य से ‌सम्पादनीय संस्कारों का वर्णन निर्वाणदीक्षासिद्‌ध्यर्थानां संस्काराणां वर्णनम् अग्निदेव कहते हैं —  ब्रह्मन् ! बुद्धिमान् पुरुष निर्वाणादि दीक्षाओं में अड़तालीस संस्कार करावे । उन संस्कारों का वर्णन सुनिये, जिनसे मनुष्य देवतुल्य हो जाता… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 031 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ इकतीसवाँ अध्याय ‘अपामार्जन-विधान’ एवं ‘कुशापामार्जन’ नामक स्तोत्र का वर्णन अपामार्जन विधानं च कुशापामार्जन स्तोत्रम् ॥ अग्निरुवाच ॥ रक्षां स्वस्य परेषाञ्च वक्ष्ये तां मार्जनाह्वयाम् । यया विमुच्यते दुःखैः सुखञ्च प्राप्नुयान्नरः ॥ १ ॥ ॐ नमः परमार्थाय पुरुषाय महात्मने । अरूपबहुरूपाय व्यापिने… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 030 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीसवाँ अध्याय भद्र-मण्डल आदि की पूजन-विधि का वर्णन सर्वतोभद्रमण्डलादिविधिकथनम् नारदजी कहते हैं — मुनिवरो ! पूर्वोक्त भद्रमण्डल के मध्यवर्ती कमल में अङ्गसहित ब्रह्म का पूजन करना चाहिये। पूर्ववर्ती कमल में भगवान् पद्मनाभ का, अग्निकोणवाले कमल में प्रकृतिदेवी का तथा दक्षिण… Read More