अग्निपुराण – अध्याय 059 June 11, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 059 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ उनसठवाँ अध्याय अधिवास-विधि का वर्णन अधिवासकथनम् श्रीभगवान् हयग्रीव कहते हैं — ब्रह्मन् ! श्रीहरि का सांनिध्यकरण ‘अधिवासन’ कहलाता है। साधक यह चिन्तन करे कि ‘मैं अथवा मेरा आत्मा सर्वज्ञ सर्वव्यापी पुरुषोत्तमरूप है।’ इस प्रकार भावना करके आत्मा की ‘ॐ’ इस… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 058 June 11, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 058 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ अट्ठावनवाँ अध्याय भगवद्विग्रह को स्नान और शयन कराने की विधि स्नानादिविधिः श्रीभगवान् हयग्रीव कहते हैं — ब्रह्मन् ! आचार्य ईशानकोण में एक होमकुण्ड तैयार करे और उसमें वैष्णव-अग्नि की स्थापना करे। तदनन्तर गायत्री मन्त्र से एक सौ आठ आहुतियाँ देकर… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 057 June 11, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 057 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ सत्तावनवाँ अध्याय कलशाधिवास की विधि का वर्णन कुम्भाधिवासविधिः श्रीभगवान् हयग्रीव कहते हैं — ब्रह्मन् ! प्रतिष्ठा के लिये अथवा देवपूजन के लिये जिस भूमि को ग्रहण करे, वहाँ नारसिंह- मन्त्र का पाठ करते हुए राक्षसों का अपसारण करनेवाले अक्षत और… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 056 June 11, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 056 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ छप्पनवाँ अध्याय प्रतिष्ठा के अङ्गभूत मण्डप निर्माण, तोरण-स्तम्भ, कलश एवं ध्वज के स्थापन तथा दस दिक्पाल याग का वर्णन दिक्पालयागकथनम् श्रीभगवान् हयग्रीव कहते हैं — ब्रह्मन् ! मैं प्रतिष्ठा के पाँच अङ्गों का वर्णन करूँगा। प्रतिमा पुरुष का प्रतीक है… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 055 June 10, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 055 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ पचपनवाँ अध्याय पिण्डिका का लक्षण का वर्णन पिण्डिकालक्षणकथनम् श्रीभगवान् हयग्रीव कहते हैं — ब्रह्मन् ! अब मैं प्रतिमाओं की पिण्डिका का लक्षण बता रहा हूँ। पिण्डिका लंबाई में तो प्रतिमा के बराबर होनी चाहिये और चौड़ाई में उससे आधी उसकी… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 054 June 10, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 054 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ चौवनवाँ अध्याय लिङ्ग-मान एवं व्यक्ताव्यक्त लक्षण आदि का वर्णन लिङ्गमानादिकथनम् श्रीभगवान् हयग्रीव कहते हैं — ब्रह्मन् ! अब मैं दूसरे प्रकार से लिङ्ग आदि का वर्णन करता हूँ, सुनो, लवण तथा घृत से निर्मित शिवलिङ्ग बुद्धि को बढ़ाने वाला होता… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 053 June 10, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 053 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तिरपनवाँ अध्याय लिङ्ग [^1] आदि का लक्षण का वर्णन लिङ्गलक्षणम् श्रीभगवान् हयग्रीव कहते हैं — कमलोद्भव ! अब मैं लिङ्ग आदि का लक्षण बताता हूँ, सुनो। लंबाई के आधे में आठ से भाग देकर आठ भागों में से तीन भाग… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 052 June 10, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 052 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ बावनवाँ अध्याय चौंसठ योगिनी आदि की प्रतिमाओं के लक्षण का वर्णन देवीप्रतिमालक्षणम् श्रीभगवान् बोले — ब्रह्मन् ! अब मेँ चाँसठ योगिनियों का वर्णन करूँगा। इनका स्थान क्रमशः पूर्वदिशा से लेकर ईशानपर्यन्त है। इनके नाम इस प्रकार हैं — १. अक्षोभ्या,… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 051 June 10, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 051 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ इक्यावनवाँ अध्याय सूर्यादि ग्रहों तथा दिक्पाल आदि देवताओं की प्रतिमाओं के लक्षणों का वर्णन सूर्य्यादिप्रतिमालक्षणम् श्रीभगवान् हयग्रीव कहते हैं — ब्रह्मन् ! सात अश्वों से जुते हुए एक पहिये वाले रथ पर विराजमान सूर्यदेव की प्रतिमा को स्थापित करना चाहिये… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 050 June 9, 2025 | aspundir | Leave a comment अग्निपुराण – अध्याय 050 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ पचासवाँ अध्याय चण्डी आदि देवी-देवताओं की प्रतिमाओं के लक्षण मत्स्यादिदशावतारप्रतिमालक्षणवर्णनम् श्रीभगवान् बोले — चण्डी बीस भुजाओं से विभूषित होती है। वह अपने दाहिने हाथों में शूल, खड्ग, शक्ति, चक्र, पाश, खेट, आयुध, अभय, डमरू और शक्ति धारण करती है। बायें… Read More