अग्निपुराण – अध्याय 313 अग्निपुराण – अध्याय 313 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ तेरहवाँ अध्याय नाना मन्त्रों का वर्णन नानामन्त्राः अग्निदेव कहते हैं — अब मैं सच्चिदानन्दस्वरूप भगवान् विनायक (गणेश) के पूजन की विधि बताऊँगा। योगपीठ पर प्रथम तो आधारशक्ति की पूजा करे। फिर अग्नि आदि कोणों तथा पूर्वादि दिशाओं में… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 312 अग्निपुराण – अध्याय 312 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ बारहवाँ अध्याय त्वरिता-विद्या से प्राप्त होने वाली सिद्धियों का वर्णन त्वरिता-विद्या अग्निदेव कहते हैं — मुने। अब मैं विद्या प्रस्ताव का वर्णन करूँगा, जो धर्म, काम आदि की सिद्धि प्रदान करने वाला है। नौ कोष्ठों के विभाग से… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 311 अग्निपुराण – अध्याय 311 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ ग्यारहवाँ अध्याय त्वरिता-मन्त्र के दीक्षा ग्रहण की विधि त्वरितामूलमन्त्रादिः अग्निदेव कहते हैं —- मुने। अब सिंहासन पर स्थित वज्र से व्याप्त कमल में मन्त्र न्यासपूर्वक दीक्षा आदि का विधान बताऊँगा ॥ १ ॥ ‘हे हे हुति वज्रदन्त पुरु… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 310 अग्निपुराण – अध्याय 310 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ दसवाँ अध्याय अपरत्वरिता-मन्त्र एवं मुद्रा आदि का वर्णन त्वरितामन्त्रादि अग्निदेव कहते हैं — मुने। अब मैं दूसरी ‘अपरा विद्या’ का वर्णन करता हूँ, जो भोग और मोक्ष प्रदान करने वाली है। धूलि से निर्मित, वज्र चिह्न से आवृत… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 309 अग्निपुराण – अध्याय 309 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ नवाँ अध्याय त्वरिता-पूजा त्वरितापूजाः अग्निदेव कहते हैं — मुने! त्वरिता-विद्या का ज्ञान भोग और मोक्ष प्रदान करने वाला है; अतः अब उसी का वर्णन करूँगा। पहले ॐ आधारशक्त्यै नमः ।’ — इस मन्त्र से आधारशक्ति का स्मरण और… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 308 अग्निपुराण – अध्याय 308 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ आठवाँ अध्याय त्रैलोक्यमोहिनी लक्ष्मी एवं भगवती दुर्गा के मन्त्रों का कथन त्रैलोक्यमोहनीलक्ष्म्यादि पूजा अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ! वान्त (श्), वह्नि (र), वामनेत्र (ईकार) और दण्ड (अनुस्वार) — इनके योग से ‘श्रीं’ बीज बनता है जो ‘श्री’ देवी… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 307 अग्निपुराण – अध्याय 307 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ सातवाँ अध्याय त्रैलोक्यमोहन आदि मन्त्र त्रैलोक्य मोहनमन्त्राः अग्निदेव कहते हैं — मुने! अब मैं धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष — इन चारों पुरुषार्थों की सिद्धि के लिये ‘त्रैलोक्यमोहन’ नामक मन्त्र का वर्णन करूँगा ॥ १ ॥ ॐ श्रीं… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 306 अग्निपुराण – अध्याय 306 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ छठवाँ अध्याय श्री नरसिंह आदि के मन्त्र नारसिंहादिमन्त्राः अग्निदेव कहते हैं — मुने ! स्तम्भन, विद्वेषण, उच्चाटन, उत्सादन, भ्रमण, मारण तथा व्याधि — ये ‘क्षुद्र ‘ संज्ञक अभिचारिक कर्म हैं । इनसे छुटकारा कैसे प्राप्त हो? यह बात… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 305 अग्निपुराण – अध्याय 305 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ पाँचवाँ अध्याय पचपन विष्णुनाम पञ्चपञ्चाशद्विष्णुनामानि अग्निदेव कहते हैं — मुने। जो मनुष्य भगवान् विष्णु के निम्नाङ्कित पचपन नामों का जप करता है, वह मन्त्रजप आदि के फल का भागी होता है तथा तीर्थों में पूजनादि के अक्षय पुण्य… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 304 अग्निपुराण – अध्याय 304 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ चारवाँ अध्याय पञ्चाक्षर-दीक्षा-विधान; पूजा के मन्त्र पञ्चाक्षरादिपूजामन्त्राः अग्निदेव कहते हैं — मेष (न) सर्गि विष — विसर्ग युक्त मकार (मः) य से पहले का अक्षर श और उसके साथ अक्षि — इकार (शि) दीर्घोदक (वा) मरुत् (य) —… Read More