अग्निपुराण – अध्याय 323 अग्निपुराण – अध्याय 323 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ तेईसवाँ अध्याय गङ्गा-मन्त्र, शिवमन्त्रराज, चण्डकपालिनी-मन्त्र, क्षेत्रपाल-बीजमन्त्र, सिद्धविद्या, महामृत्युंजय, मृतसंजीवनी, ईशानादि मन्त्र तथा इनके छः अङ्ग एवं अघोरास्त्र का कथन षडङ्गान्यघोरास्त्राणि महादेवजी कहते हैं — स्कन्द ! ‘ॐ ह्रूं हं सः‘ इस मन्त्र से मृत्युरोग आदि शान्त हो जाते… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 322 अग्निपुराण – अध्याय 322 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ बाईसवाँ अध्याय पाशुपतास्त्र-मन्त्रद्वारा शान्ति का कथन पाशुपतशान्तिः महादेवजी कहते हैं — स्कन्द ! अब में पाशुपतास्त्र-मन्त्र से शान्ति तथा पूजा आदि की बात बताऊँगा। शान्ति और जप आदि पूर्ववत् (पूर्व अध्याय में कहे अनुसार) कर्तव्य हैं। इस मन्त्र… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 321 अग्निपुराण – अध्याय 321 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ इक्कीसवाँ अध्याय अघोरास्त्र आदि शान्ति-विधान का कथन अघोरास्त्रादिशान्तिकल्पः महादेवजी कहते हैं — स्कन्द ! पहले समस्त कर्मों में ‘अस्त्रयाग’ करना चाहिये। यह सिद्धि प्रदान करने वाला है। मध्यभाग में शिव, विष्णु आदि के अस्त्र की पूजा करनी चाहिये… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 320 अग्निपुराण – अध्याय 320 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ बीसवाँ अध्याय सर्वतोभद्र आदि मण्डलों का वर्णन मण्डलविधान का वर्णन भगवान् शिव कहते हैं — स्कन्द। अब मैं ‘सर्वतोभद्र’ नामक आठ प्रकार के मण्डलों का वर्णन करता हूँ। पहले शङ्कु या कील से प्राचीदिशा का साधन करे। इस… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 319 अग्निपुराण – अध्याय 319 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ उन्नीसवाँ अध्याय वागीश्वरी की पूजा एवं मन्त्र आदि वागीश्वरीपूजा भगवान् शिव कहते हैं — स्कन्द! अब मैं मण्डलसहित ‘वागीश्वरी-पूजन’ की विधि बता रहा हूँ। ऊहक (ऊ) को काल (घ) — से संयुक्त करके उसका चन्द्रमा (अनुस्वार) से योग… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 318 अग्निपुराण – अध्याय 318 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ अठारहवाँ अध्याय अन्तःस्थ, कण्ठोष्ठ तथा शिव स्वरूप मन्त्र का वर्णन; अघोरास्त्र-मन्त्र का उद्धार; ‘विघ्न मर्द’ नामक मण्डल तथा गणपति-पूजन की विधि गणपूजाः भगवान् शिव कहते हैं — स्कन्द ! जिसके ऊपर तेज (र्) हो, ऐसे विश्वरूप (ह्) को… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 317 अग्निपुराण – अध्याय 317 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ सत्रहवाँ अध्याय सकलादि मन्त्रों के उद्धार का क्रम सकलादिमन्त्रोद्धारः भगवान् शिव कहते हैं — स्कन्द ! सकल, निष्कल, शून्य, कलाढ्य, समलंकृत, क्षपण, क्षय, अन्तःस्थ, कण्ठोष्ठ तथा आठवाँ शिव [^1] —ये प्रासादपरासंज्ञक मन्त्र के आठ स्वरूप माने गये हैं।… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 316 अग्निपुराण – अध्याय 316 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ सोलहवाँ अध्याय त्वरिता आदि विविध मन्त्र एवं कुब्जिका विद्याका कथन नानामन्त्राः अग्निदेव कहते हैं — मुने। पहले ‘हूं’ रखे, फिर ‘खे चच्छे’ — ये तीन पद जोड़कर मन्त्र की शोभा बढ़ावे। तत्पश्चात् ‘क्षः स्त्रीं हूं क्षे’ लिखकर अन्त… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 315 अग्निपुराण – अध्याय 315 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ पंद्रहवाँ अध्याय स्तम्भन आदि के मन्त्रों का कथन स्तम्भनादिमन्त्रः अग्निदेव कहते हैं — मुने ! अब मैं स्तम्भन, मोहन, वशीकरण, विद्वेषण तथा उच्चाटन के प्रयोग बताता हूँ। विषव्याधि, आरोग्य, मारण तथा उसके शमन के प्रयोग भी बता रहा… Read More
अग्निपुराण – अध्याय 314 अग्निपुराण – अध्याय 314 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीन सौ चौदहवाँ अध्याय त्वरिता के पूजन तथा प्रयोग का विज्ञान त्वरिताज्ञानम् निग्रहयन्त्र अग्निदेव कहते हैं — मुने ! ‘ॐ ह्रीं ह्रूं खे च च्छे क्षः स्वी ह्रूं क्षे ह्रीं फट् त्वरितायै नमः ।’ इस मन्त्र से न्यासपूर्वक त्वरितादेवी की… Read More