शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 04 शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 04 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता चौथा अध्याय शिवकी मायाका प्रभाव मुनिगण बोले – हे तात! हे तात! हे महाभाग ! हे महामते ! आप धन्य हैं; क्योंकि आपने परम भक्ति प्रदान करनेवाली यह अद्भुत शिवकथा सुनायी है ॥ १ ॥ [ हे सूतजी !… Read More
शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 03 शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 03 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता तीसरा अध्याय श्रीकृष्णकी तपस्या तथा शिव-पार्वतीसे वरदानकी प्राप्ति, अन्य शिवभक्तोंका वर्णन सनत्कुमार बोले— उनकी यह बात सुनकर श्रीकृष्णने अति विस्मित होकर शान्तचित्त उन महामुनिसे कहा—॥ १ ॥ वासुदेव बोले- हे विप्रेन्द्र ! आप धन्य हैं, आप [ विशुद्धात्मा] –… Read More
शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 02 शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 02 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता दूसरा अध्याय श्रीकृष्णके प्रति उपमन्युका शिवभक्तिका उपदेश सनत्कुमार बोले- महात्मा उपमन्युका यह वचन सुनकर महादेवके प्रति उत्पन्न हुई भक्तिवाले कृष्णने उन मुनिसे कहा – ॥ १ ॥ श्रीकृष्ण बोले – हे उपमन्यो ! हे मुने! हे तात ! आप… Read More
शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 01 शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 01 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता पहला अध्याय पुत्रप्राप्ति के लिये कैलासपर गये हुए श्रीकृष्णका उपमन्युसे संवाद यो धत्ते भुवनानि सत्त्वगुणवान्स्रष्टा रजःसंश्रयः संहर्त्ता तमसान्वितो गुणवतीं मायामतीत्य स्थितः । सत्यानन्दमनन्तबोधममलं ब्रह्मादिसंज्ञास्पदं नित्यं सत्त्वसमन्वयादधिगतं पूर्णं शिवं धीमहि ॥ जो परमात्मा सत्त्वगुणसे युक्त होकर अर्थात् सत्त्वगुणका आश्रय लेकर… Read More
शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 43 शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 43 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता तैंतालीसवाँ अध्याय ज्ञानका निरूपण तथा शिवपुराणकी कोटिरुद्रसंहिताके श्रवणादिका माहात्म्य सूतजी बोले- हे ऋषियो ! अत्यन्त गोपनीय तथा परममुक्तिस्वरूप शिवज्ञानको जैसा मैंने सुना है, वैसा ही कहता हूँ, आप सभी लोग सुनिये ॥ १ ॥ ब्रह्मा, नारद, सनत्कुमार, व्यास एवं… Read More
शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 42 शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 42 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता बयालीसवाँ अध्याय भगवान् शिवके सगुण और निर्गुण स्वरूपका वर्णन ऋषिगण बोले— [हे सूतजी ! ] शिवजी कौन हैं, विष्णु कौन हैं, रुद्र कौन हैं तथा ब्रह्मा कौन हैं और इनमें निर्गुण कौन है ? हमलोगोंके इस संशयको दूर कीजिये… Read More
शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 41 शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 41 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता इकतालीसवाँ अध्याय ब्रह्म एवं मोक्षका निरूपण ऋषिगण बोले – [ हे सूतजी ! ] आपने मुक्तिकी चर्चा की, उस मुक्तिमें क्या होता है और उसकी कैसी अवस्था होती है ? हमलोगोंको यह बताइये ॥ १ ॥ सूतजी बोले- सुनिये,… Read More
शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 40 शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 40 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता चालीसवाँ अध्याय शिवरात्रिव्रतमाहात्म्यके प्रसंगमें व्याध एवं मृगपरिवारकी कथा तथा व्याधेश्वरलिंगका माहात्म्य ऋषिगण बोले- हे सूत ! आपकी वाणीको सुनकर हमलोग अत्यन्त आनन्दित हुए। आप उसी उत्तम व्रतको प्रीतिसे विस्तारपूर्वक कहिये ॥ १ ॥ हे सूत! यहाँपर इस उत्तम व्रतको… Read More
शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 39 शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 39 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता उनतालीसवाँ अध्याय शिवरात्रिव्रतकी उद्यापन विधिका वर्णन ऋषिगण बोले – [ हे सूत ! ] अब आप शिवरात्रिव्रतके उद्यापनका विधान कहिये, जिसके करनेसे साक्षात् शंकरजी निश्चित रूपसे प्रसन्न होते हैं ॥ १ ॥ सूतजी बोले- हे ऋषियो ! आपलोग उसके… Read More
शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 38 शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 38 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता अड़तीसवाँ अध्याय भगवान् शिवके विविध व्रतोंमें शिवरात्रिव्रतका वैशिष्ट्य ऋषि बोले— हे तात! आप धन्य हैं । कृतकृत्य हैं और आपका जीवन सफल है जो आप हमलोगोंको महेश्वरकी कल्याणकारी कथा सुना रहे हैं ॥ १ ॥ हे सूतजी! यद्यपि हमलोगोंने… Read More