शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 27 शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 27 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता सत्ताईसवाँ अध्याय गौतमी गंगा एवं त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंगका माहात्म्यवर्णन ऋषिगण बोले— हे प्रभो ! गंगा किस स्थानसे जलरूपमें प्रवाहित होकर प्रकट हुईं? हे प्रभो ! उनका माहात्म्य सबकी अपेक्षा अधिक क्यों हुआ ? इसे बताइये। हे व्यासशिष्य ! जिन दुष्ट… Read More
शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 26 शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 26 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता छब्बीसवाँ अध्याय त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग तथा गौतमी गंगाके प्रादुर्भावका आख्यान सूतजी बोले— हे द्विजो ! उस समय स्त्रीसहित गौतमके द्वारा इस प्रकार प्रायश्चित्त करनेपर शिवजी प्रसन्न होकर पार्वतीजी तथा अपने गणोंके साथ प्रकट हो गये। इसके बाद प्रसन्न हुए कृपानिधि… Read More
शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 25 शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 25 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता पच्चीसवाँ अध्याय मुनियोंका महर्षि गौतमके प्रति कपटपूर्ण व्यवहार सूतजी बोले— हे ब्राह्मणो ! किसी समय गौतम ऋषिने अपने शिष्योंको जल लाने हेतु भेजा और वे हाथमें कमण्डलु लेकर भक्तिपूर्वक वहाँ पहुँचे ॥ १ ॥ उस समय जल लेनेके लिये… Read More
शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 24 शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 24 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता चौबीसवाँ अध्याय त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंगके माहात्म्य — प्रसंगमें गौतमऋषिकी परोपकारी प्रवृत्तिका वर्णन सूतजी बोले— हे श्रेष्ठ ऋषियो ! मैं पापोंका नाश करनेवाली कथा कहता हूँ, जैसा कि मैंने [ अपने] श्रेष्ठ गुरु व्यासजीसे सुना है, आपलोग सुनिये ॥ १ ॥… Read More
शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 23 शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 23 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता तेईसवाँ अध्याय काशीविश्वेश्वर ज्योतिर्लिंगके माहात्म्यके प्रसंगमें काशीमें मुक्तिक्रमका वर्णन ऋषि बोले— हे प्रभो ! हे सूतजी ! यदि वाराणसी महापुरी इतनी पवित्र है, तो आप उसका एवं अविमुक्त [ज्योतिर्लिंग]-का प्रभाव हमलोगोंसे कहिये ॥ १ ॥ सूतजी बोले— हे मुनीश्वरो… Read More
शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 22 शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 22 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता इक्कीसवाँ अध्याय बाईसवाँ अध्याय परब्रह्म परमात्माका शिव-शक्तिरूपमें प्राकट्य, पंचक्रोशात्मिका काशीका अवतरण, शिवद्वारा अविमुक्त लिंगकी स्थापना, काशीकी महिमा तथा काशीमें रुद्रके आगमनका वर्णन सूतजी बोले— हे श्रेष्ठ ऋषिगण ! अब विश्वेश्वरके महापापनाशक माहात्म्यका वर्णन करूँगा, आपलोग सुनें । संसारमें यह… Read More
शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 21 शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 21 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता इक्कीसवाँ अध्याय भीमशंकर ज्योतिर्लिंगकी उत्पत्ति तथा उसके माहात्म्यका वर्णन सूतजी बोले — [ उसके बाद ] शिवजी भी अपने गणोंको साथ लेकर राजाके कल्याणकी कामनासे आदरपूर्वक वहाँ गये और उसकी रक्षाके लिये गुप्तरूपसे स्थित हो गये ॥ १ ॥… Read More
शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 20 शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 20 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता बीसवाँ अध्याय भीमशंकर ज्योतिर्लिंगके माहात्म्य वर्णन-प्रसंग में भीमासुरके उपद्रवका वर्णन सूतजी बोल— [हे महर्षियो !] अब मैं भीमशंकरके माहात्म्यको कह रहा हूँ, जिसके सुननेमात्रसे मनुष्य सभी प्रकारके अभीष्टको प्राप्त कर लेता है ॥ १ ॥ कामरूप नामक देशमें लोकहितकी… Read More
शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 19 शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 19 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता उन्नीसवाँ अध्याय केदारेश्वर ज्योतिर्लिंगके प्राकट्य एवं माहात्म्यका वर्णन सूतजी बोले- हे द्विजो ! विष्णुके नर-नारायण नामक जिन दो अवतारोंने भारत [ वर्षके अन्तर्गत भरत] खण्डमें स्थित बदरिकाश्रममें तप किया था, उनके द्वारा पूजनहेतु प्रार्थना किये जानेपर भक्तके वशीभूत होनेके… Read More
शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 18 शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 18 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता अठारहवाँ अध्याय ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंगके प्रादुर्भाव एवं माहात्म्यका वर्णन ऋषि बोले— हे महाभाग सूतजी ! आपने अपने भक्तजनोंकी रक्षा करनेवाले महाकाल नामक ज्योतिर्लिंगकी अद्भुत कथा सुनायी ॥ १ ॥ हे ज्ञानियोंमें श्रेष्ठ ! अब कृपा करके ओंकारमें विद्यमान, समस्त पापोंको… Read More