शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 37 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता सैंतीसवाँ अध्याय शिवकी पूजा करनेवाले विविध देवताओं, ऋषियों एवं राजाओंका वर्णन ऋषिगण बोले- हे महाभाग सूत ! हे सुव्रत ! आप ज्ञानी हैं, आप शिवजीके चरित्रका ही विस्तारपूर्वक पुनः वर्णन करें। पुरातन ऋषियों, देवताओं एवं राजाओंने उन देवाधिदेव शिवकी… Read More


शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 36 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता छत्तीसवाँ अध्याय शिवसहस्त्रनामस्तोत्रकी फल- श्रुति सूतजी बोले- विष्णुजीके द्वारा किये गये अपने उत्कृष्ट सहस्रनामस्तवनको सुनकर शिवजी प्रसन्न हो गये। उस समय जगत् के स्वामी महेश्वरने विष्णुकी परीक्षाके लिये उन कमलोंमेंसे एक कमलको छिपा लिया ॥ १-२ ॥ तब शिवपूजनमें… Read More


शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 35 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता पैंतीसवाँ अध्याय विष्णुप्रोक्त शिवसहस्त्रनामस्तोत्र * सूतजी बोले- हे मुनिवरो ! आपलोग सुनें, जिससे महेश्वर सन्तुष्ट हुए थे, उस शिवसहस्रनामस्तोत्रको मैं कह रहा हूँ ॥ १ ॥ भगवान् विष्णुने कहा – १. शिवः- कल्याण-स्वरूप, २. हरः – भक्तोंके पाप-ताप हर… Read More


शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 34 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता चौंतीसवाँ अध्याय हरीश्वरलिंगका माहात्म्य और भगवान् विष्णुके सुदर्शनचक्र प्राप्त करनेकी कथा व्यासजी बोले- उन सूतजीका यह वचन सुनकर सभी मुनीश्वरोंने उनकी प्रशंसा करके लोकहितकी कामनासे कहा – ॥ १ ॥ ऋषिगण बोले- हे सूतजी ! आप सब कुछ जानते… Read More


शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 33 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता तैंतीसवाँ अध्याय घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग एवं शिवालयके नामकरणका आख्यान सूतजी बोले- अपनी छोटी बहनके पुत्रको देखकर बड़ी बहन दुखी हुई और वह उसके पुत्रसुखको सहन न करती हुई उससे विरोध करने लगी ॥ १ ॥ सब लोग उस पुत्रवतीकी निरन्तर… Read More


शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 32 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता बत्तीसवाँ अध्याय घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंगके माहात्म्यमें सुदेहा ब्राह्मणी एवं सुधर्मा ब्राह्मणका चरित – वर्णन सूतजी बोले- हे मुनिश्रेष्ठो ! इसके बाद घुश्मेश नामक ज्योतिर्लिंग कहा गया है। उसका उत्तम माहात्म्य सुनिये ॥ १ ॥ दक्षिण दिशामें श्रेष्ठ देवगिरि नामक एक… Read More


शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 31 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता इकतीसवाँ अध्याय रामेश्वर नामक ज्योतिर्लिंगके प्रादुर्भाव एवं माहात्म्यका वर्णन सूतजी बोले- हे ऋषियो ! इसके बाद मैं रामेश्वर नामक ज्योतिर्लिंग पूर्व समयमें जिस प्रकार उत्पन्न हुआ, उसका वर्णन करता हूँ, आपलोग आदरपूर्वक सुनिये ॥ १ ॥ हे ब्राह्मणो! पूर्व… Read More


शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 30 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता तीसवाँ अध्याय नागेश्वर ज्योतिर्लिंगकी उत्पत्ति एवं उसके माहात्म्यका वर्णन सूतजी बोले – [ हे मुनियो ! ] किसी समय उस दुष्टात्मा राक्षस दारुकके एक सेवकने वैश्यके समक्ष [स्थित हुए] शिवजीका सुन्दर रूप देखा ॥ १ ॥ उसने जाकर राक्षसराजके… Read More


शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 29 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता उनतीसवाँ अध्याय दारुकावनमें राक्षसोंके उपद्रव एवं सुप्रिय वैश्यकी शिवभक्तिका वर्णन सूतजी बोले— इसके उपरान्त मैं परमात्मा शिवके नागेश नामक परमश्रेष्ठ ज्योतिर्लिंगकी जिस प्रकार उत्पत्ति हुई, उसे कह रहा हूँ ॥ १ ॥ पार्वतीके वरदानसे अहंकारमें डूबी हुई दारुका नामक… Read More


शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 28 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता अट्ठाईसवाँ अध्याय वैद्यनाथेश्वर ज्योतिर्लिंगके प्रादुर्भाव एवं माहात्म्यका वर्णन सूतजी बोले— किसी समय अभिमानी तथा मानपरायण राक्षस श्रेष्ठ रावण पर्वतोंमें उत्तम कैलासपर भक्तिपूर्वक शिवजीकी आराधना करने लगा ॥ १ ॥ जब कुछ समयतक आराधना किये जानेपर भी शिवजी प्रसन्न न… Read More