श्रीमद्भागवतमहापुराण – प्रथम स्कन्ध – अध्याय १० श्रीमद्भागवतमहापुराण – प्रथम स्कन्ध – अध्याय १० ॐ श्रीपरमात्मने नम : ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय दसवाँ अध्याय श्रीकृष्ण का द्वारका-गमन शौनकजी ने पूछा — धार्मिक-शिरोमणि महाराज युधिष्ठिर ने अपनी पैतृक सम्पत्ति को हड़प जाने के इच्छुक आततायियों का नाश करके अपने भाइयों के साथ किस प्रकार से राज्य-शासन किया और कौन-कौन-से काम… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – प्रथम स्कन्ध – अध्याय ९ श्रीमद्भागवतमहापुराण – प्रथम स्कन्ध – अध्याय ९ ॐ श्रीपरमात्मने नम : ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नवाँ अध्याय युधिष्ठिरादि का भीष्मजी के पास जाना और भगवान् श्रीकृष्ण की स्तुति करते हुए भीष्मजी का प्राणत्याग करना सूतजी कहते हैं — इस प्रकार राजा युधिष्ठिर प्रजाद्रोह से भयभीत हो गये । फिर सब धर्मों का… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – प्रथम स्कन्ध – अध्याय ८ श्रीमद्भागवतमहापुराण – प्रथम स्कन्ध – अध्याय ८ ॐ श्रीपरमात्मने नम : ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय आठवाँ अध्याय गर्भ में परीक्षित् की रक्षा, कुन्ती के द्वारा भगवान् की स्तुति और युधिष्ठिर का शोक सूतजी कहते हैं — इसके बाद पाण्डव श्रीकृष्ण के साथ जलाञ्जलि के इच्छुक मरे हुए स्वजनों का तर्पण करने के… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – प्रथम स्कन्ध – अध्याय ७ श्रीमद्भागवतमहापुराण – प्रथम स्कन्ध – अध्याय ७ ॐ श्रीपरमात्मने नम : ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सातवाँ अध्याय अश्वत्थामा द्वारा द्रौपदी के पुत्रों का मारा जाना और अर्जुन के द्वारा अश्वत्थामा का मानमर्दन श्रीशौनकजी ने पूछा — सूतजी ! सर्वज्ञ एवं सर्वशक्तिमान् व्यास भगवान् ने नारदजी का अभिप्राय सुन लिया । फिर उनके… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – प्रथम स्कन्ध – अध्याय ६ श्रीमद्भागवतमहापुराण – प्रथम स्कन्ध – अध्याय ६ ॐ श्रीपरमात्मने नम : ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय छठा अध्याय नारदजी के पूर्वचरित्र का शेष भाग श्रीसूतजी कहते हैं — शौनकजी ! देवर्षि नारद के जन्म और साधना की बात सुनकर सत्यवतीनन्दन भगवान् श्रीव्यासजी ने उनसे फिर यह प्रश्न किया ॥ १ ॥ श्रीव्यासजी ने… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – प्रथम स्कन्ध – अध्याय ५ श्रीमद्भागवतमहापुराण – प्रथम स्कन्ध – अध्याय ५ ॐ श्रीपरमात्मने नम : ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पाँचवाँ अध्याय भगवान् के यश-कीर्तन की महिमा और देवर्षि नारदजी का पूर्वचरित्र सूतजी कहते हैं — तदनन्तर सुखपूर्वक बैठे हुए वीणापाणि परम यशस्वी देवर्षि नारद ने मुसकराकर अपने पास ही बैठे ब्रह्मर्षि व्यासजी से कहा ॥ १… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – प्रथम स्कन्ध – अध्याय ४ श्रीमद्भागवतमहापुराण – प्रथम स्कन्ध – अध्याय ४ ॐ श्रीपरमात्मने नम : ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय चौथा अध्याय महर्षि व्यासका असन्तोष व्यासजी कहते हैं — उस दीर्घकालीन सत्र में सम्मिलित हुए मुनियों में विद्या-वयोवृद्ध कुलपति… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – प्रथम स्कन्ध – अध्याय ३ श्रीमद्भागवतमहापुराण – प्रथम स्कन्ध – अध्याय ३ ॐ श्रीपरमात्मने नम : ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तीसरा अध्याय भगवान् के अवतारों का वर्णन श्रीसूतजी कहते हैं — सृष्टि के आदि में भगवान् ने लोक के निर्माण की इच्छा की । इच्छा होते ही उन्होंने महत्तत्त्व आदि से निष्पन्न पुरुषरूप ग्रहण किया । उसमें… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – प्रथम स्कन्ध – अध्याय २ श्रीमद्भागवतमहापुराण – प्रथम स्कन्ध – अध्याय २ ॐ श्रीपरमात्मने नम : ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय दूसरा अध्याय भगवत्कथा और भगवद्भक्ति का माहात्म्य श्रीव्यासजी कहते हैं — शौनकादि ब्रह्मवादी ऋषियों के ये प्रश्न सुनकर रोमहर्षण के पुत्र उग्रश्रवा को बड़ा ही आनन्द हुआ । उन्होंने ऋषियोंके इस मङ्गलमय प्रश्न का अभिनन्दन करके कहना… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – प्रथम स्कन्ध – अध्याय १ श्रीमद्भागवतमहापुराण – प्रथम स्कन्ध – अध्याय १ ॐ श्रीपरमात्मने नम : ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पहला अध्याय श्रीसूतजी से शौनकादि ऋषियों का प्रश्न ॥ मङ्गलाचरण ॥ जन्माद्यस्य यतोऽन्वयादितरतः चार्थेष्वभिज्ञः स्वराट् । तेने ब्रह्म हृदा य आदिकवये मुह्यन्ति यत् सूरयः । तेजोवारिमृदां यथा विनिमयो यत्र त्रिसर्गोऽमृषा । धाम्ना स्वेन सदा निरस्तकुहकं सत्यं परं… Read More